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हरियाणा: दलित और महिलाओं का उत्पीड़न बढ़ा

हरियाणा की 85 फीसदी लड़कियों एवं युवतियों का मानना है कि छेड़छाड़ की घटनाएं उनके लिए बेहद डरावनी और असहनीय होती हैं।
Author चंडीगढ़ | May 24, 2017 05:10 am
हरियाणा सीएम मनोहर लाल खट्टर। साल 2015 में सीएम खट्टर ने गौसेवा आयोग का गठन किया था।

संजीव शर्मा 

हरियाणा में सरकार भले ही किसी भी राजनीतिक दल की क्यों न हो लेकिन ये सरकारों महिला उत्पीड़न अथवा विशेष रूप से दलित महिलाओं एवं युवतियों के साथ उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने में कामयाब नहीं रही हैं। हाल के सालों में उत्पीड़न का ग्राफ बढ़ा है।  प्रदेश में दलित दूल्हों को घुड़चड़ी न करने देना, दलितों को सवर्ण जातियों के लिए आरक्षित कुओं से पानी न भरने देने की घटनाएं तो अब आम हो चुकी हैं लेकिन खेतों में या अन्य स्थानों पर दलित युवतियों एवं दलित महिलाओं के साथ आए दिन बलात्कार की खबरें आती रहती हैं। हरियाणा की पूर्व हुड्डा सरकार के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2012 में जब एक माह के भीतर दुष्कर्म की 19 घटनाएं हुर्इं तो कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी को अपनी सरकार का बचाव करने के लिए हरियाणा में आना पड़ा था। 9 अक्तूबर 2012 को सोनिया गांधी जब जींद जिले सामूहिक दुष्कर्म के बाद आत्महत्या करने वाली युवती के परिजनों को सांत्वना दे रही थीं तो उसी समय थोड़ी दूरी पर स्थित कैथल में एक दलित युवती के साथ अपहरण व दुष्कर्म की घटना घटी थी। वर्ष 2012 में हिसार जिले में दबंगों ने एक दलित युवती से सामूहिक बलात्कार किया था और उसका एमएमएस बना लिया था। प्रदेश में भले ही सत्ता परिवर्तन हो गया है लेकिन दलित महिलाओं के उत्पीड़न की घटनाओं में कोई कमी नहीं आई है।

प्रदेश में पहले रोहतक और बाद में गुरुग्राम में अपहरण, दुषकर्म की दो बड़ी घटनाओं ने मौजूदा सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। पिछले साल रोहतक में नेपाली मूल की युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म व हत्या की घटना के दोषियों को अदालत ने भले ही मौत की सजा क्यों न सुना दी हो लेकिन पिछले सप्ताह सोनीपत से अपहरण व रोहतक में दुष्कर्म व हत्या की घटना ने एक बार फिर तंत्र पर सवालिया निशान लगा दिया है। इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि महिलाओं पर होने वाली अपराधिक घटनाएं कब रुकेंगी। गृह विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2005 से जुलाई 2016 की अवधि के दौरान 608 दलित महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं दर्ज की गई हैं। हालांकि इनमें से बहुत सी घटनाओं में पुलिस आरोपियों को गिरतार कर चुकी है और मामले विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। पिछले 11 साल के दौरान हुई दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर जारी की गई इस रिपोर्ट के अनुसार दलित महिलाओं के लिए वर्ष 2013 सबसे बुरा साबित हुआ है। 2013 में 142 महिलाएं दुष्कर्म का शिकार हुई है वहीं इस वर्ष सर्वाधिक 119 दलित महिलाएं तथा युवतियां छेड़छाड़ का शिकार हुई हैं।

स्कूल, कॉलेज, बस स्टॉप कहीं भी महिलाएं सुरक्षित नहीं

हरियाणा की 85 फीसदी लड़कियों एवं युवतियों का मानना है कि छेड़छाड़ की घटनाएं उनके लिए बेहद डरावनी और असहनीय होती हैं। जिनसे वह शारीरिक तथा मानसिक रूप से प्रताड़ित होती हैं। हरियाणा पुलिस ने प्रदेश में महिलाओं तथा युवतियों के साथ होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं की वास्तविकता पता लगाने के लिए एक पोर्टल के माध्यम से आॅनलाइन सर्वे कराया है। यह सर्वे प्रदेश के विभिन्न जिलों में किया गया है। इसमें 14 वर्ष से अधिक उम्र की लड़कियों के अलावा अन्य आयु वर्ग के महिलाओं तथा पुरुषों को शामिल किया गया है। इस सर्वे में कुल 28 हजार 539 लोगों ने भाग लिया।
हरियाणा के एडीजीपी ओ.पी. सिंह का कहना है कि इस सर्वे का एकमात्र उद्देश्य हरियाणा में छेड़छाड़ की घटनाओं के मामले में महिलाओं की मनोदशा के बारे में जानकारी हासिल करना है। सर्वे के माध्यम से अपराध वाले स्थानों, अपराध की स्थिति तथा अपराधियों के बारे में लोगों की राय पता लगी है। अब पुलिस इस फीडबैक के आधार पर इन घटनाओं को रोकने के लिए अपनी रणनीति तैयार करेगी।

 

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