May 01, 2017

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देशद्रोह के मुलजिम से परहेज नहीं खट्टर को, यशपाल के खिलाफ कार्रवाई के बजाय सरकार ने कई बार की मंत्रणा

आखिर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और दो केंद्रीय मंत्रियों की क्या मजबूरी है कि वे देशद्रोह के एक आरोपी के साथ मंच साझा कर रहे हैं।

Author चंडीगढ़ | March 21, 2017 01:54 am
हरियाणा सीएम मनोहर लाल खट्टर।

संजीव शर्मा

आखिर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और दो केंद्रीय मंत्रियों की क्या मजबूरी है कि वे देशद्रोह के एक आरोपी के साथ मंच साझा कर रहे हैं। यही नहीं प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन करने वाले मुख्य सचिव और कई अन्य अधिकारी भी इस आरोपी के साथ दो बार वार्ता कर चुके हैं। इसे राजनीतिक मजबूरी या सरकार की बेबसी ही कहा जाएगा। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों द्वारा देशद्रोह के आरोपी के साथ मंच साझा किए जाने के बाद समूची प्रशासनिक व्यवस्था की कलई खुल गई है। हरियाणा में पिछले साल हुए जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जींद के सिटी पुलिस थाने में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक व अन्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस रिकार्ड के अनुसार 25 मई, 2016 को जींद की जाट धर्मशाला में यशपाल मलिक और अन्य लोगों ने एक रैली का आयोजन किया था। यहां पुलिस कांस्टेबल सुरेश कुमार की जिम्मेदारी समूचे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी बाकी पेज 8 पर करने की थी। सुरेश ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि रैली के दौरान यशपाल मलिक व अन्यों ने जाति विशेष का पक्ष लेते हुए हिंसा को बढ़ावा देने वाला भाषण दिया था।

कुमार की शिकायत पर जींद के सिटी पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए (राजद्रोह), धारा 153-ए (धर्म, भाषा, नस्ल के आधार पर लोगों में नफरत फैलाने की कोशिश) और 154 (मामला दर्ज करने के लिए सभी दस्तावेजों को पूरा करना) आदि के तहत मामला दर्ज किया था। जींद पुलिस ने इस मामले में मलिक के अलावा आरएस सहरावत, ईश्वर सिंह मोर, राज सिवाच, ईश्वर मलिक, कृष्ण किरमारा, कृष्ण श्योकंद को तो नामजद किया था जबकि 100 से अधिक लोगों के खिलाफ बगैर नाम के मामला दर्ज किया गया था।
यह मामला दर्ज होने के करीब एक वर्ष बाद भी पुलिस द्वारा जाट नेता के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर, उनके साथ कई बार वार्ताएं की जा चुकी हैं। दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल इन्हीं धाराओं के तहत कई और लोगों के खिलाफ भी मामले दर्ज किए गए थे जिन्हें गिरफ्तार भी किया जा चुका है और वे जमानत पर बाहर भी आ चुके हैं।
इसे सरकार की मजबूरी ही कहा जाएगा कि प्रशासनिक व्यवस्था को चलाने वाले सबसे वरिष्ठ अधिकारी प्रदेश के मुख्य सचिव और राज्य मशीनरी के प्रमुख (मुख्यमंत्री) ऐसे आरोपियों के साथ न केवल कई-कई बार बैठकें करते हैं, बल्कि उनके साथ साझा पत्रकार वार्ता तक कर लेते हैं। ऐसे में पुलिस और सरकार बगैर किसी पक्षपात के कैसे काम करती हैं इसका अंदाजा सहज से लगाया जा सकता है।

मलिक के खिलाफ कार्रवाई हो: सैनी

चंडीगढ़, 20 नार्च। भाजपा के तेज-तर्रार सांसद राजकुमार सैनी ने जाट आरक्षण के मुद्दे पर एक बार फिर से अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सोमवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में सैनी ने कहा कि एक व्यक्ति के बुलावे पर कुछ उपद्रवी समाज को गंदा करने लग गए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा की खाप पंचायतें भी यशपाल मलिक के साथ नहीं और सरकार उसके दबाव में है। देश की वास्तविकता दिखाने वाले लोगों और चौथे स्तंभ पर हमले को लेकर प्रदेश असमंजस में है। सांसद सैनी ने प्रदेश सरकार और जाट नेता यशपाल मालिक के बीच हुए समझौते पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति पर देशद्रोह के आरोप हैं, उससे प्रदेश के मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री व मंत्री परिषद के मंत्री कई बार बैठक करते हैं, यह हैरत की बात है। जिस आदमी की तलाश में दिन-रात पुलिस खाक छान रही हो, उसको पहले गिरफ्तार करना चाहिए।

 

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First Published on March 21, 2017 1:54 am

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