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गुड़गांव निकाय चुनाव: 6 निर्दलीयों को खेमे में लाकर बीजेपी ने बचाई इज्जत, बनाएगी अपना मेयर

इन चुनावों में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था। 2011 में हुए पिछले चुनाव की ही तरह ही कांग्रेस ने कई निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन दिया था।
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

गुरुग्राम के नगर निकाय चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू कर दी है। चुनाव जीते 6 निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने पाले में कर भाजपा अब अब अपने पार्षदों की संख्या 20 होने का दावा कर रही है। इसके साथ ही भाजपा अपना मेयर बनाने की जुगत में भी जुट गई है। बता दें कि रविवार (24 सितंबर) को सभी 35 सीटों पर हुए नगर निकाय चुनाव में भाजपा को मात्र 14 सीटों पर जीत मिली थी। इसके बाद पार्टी ने 6 निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने पाले में कर लिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अब नगर निगम पर कब्जे का दावा कर रहे हैं।

इन चुनावों में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था। 2011 में हुए पिछले चुनाव की ही तरह ही कांग्रेस ने कई निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन दिया था। उधर, इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) ने 35 में से 23 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। अन्य वार्डों में आईएनएलडी ने भी निर्दलीयों को समर्थन किया था। आईएनएलडी को एक सीट पर ही संतोष करना पड़ा है। जीत हासिल करने वाले 35 उम्मीदवारों में से 15 महिलाएं हैं।

जिन बीजेपी उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है, उनमें गुड़गांव के विधायक उमेष अग्रवाल की रिश्तेदार हिमानी अग्रवाल के अलावा गौसेवा आयोग के अध्यक्ष भनी राम मंगला के बेटे प्रमोद मंगली भी शामिल हैं। माना जाता है कि पार्टी ने टिकट बंटवारे में पारदर्शिता नहीं बरती। इस वजह से बीजेपी कैम्प के कई लोगों ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

पार्टी नेताओं ने हार के लिए शीर्ष नेताओं को भी जिम्मेदार ठहराया है। उनमें से एक ने टीओआई को बताया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को कई बार कहा गया कि वो गुड़गांव नगर निकाय चुनावों में प्रचार करें लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। आखिर में जब पार्टी को लगा कि बीजेपी को 12 से ज्यादा सीटें नहीं मिल सकेंगी तब आखिरी वक्त में सीएम मनोहर लाल खट्टर गुड़गांव आए और चुनाव प्रचार किया।

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