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शर्मनाक: पांचवीं कक्षा की छात्रा को लड़कों के शौचालय में खड़ा कर दिया

हैदराबाद की घटना : स्कूल की वर्दी नहीं पहनने पर मिली सजा, शिक्षिका का आरोपों से इनकार, कहा-अंदर नहीं, शौचालय के बाहर खड़ी थी लड़की
Author हैदराबाद | September 12, 2017 00:41 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर किया गया है।

हैदराबाद में स्कूल की वर्दी पहनकर नहीं आने पर पांचवीं कक्षा की 11 वर्षीय एक छात्रा को सजा के तौर पर लड़कों के शौचालय में खड़े होने के लिए मजबूर किया गया। लड़की के पिता ने यह आरोप लगाया है। इस घटना का विरोध करने के लिए बड़ी संख्या में अभिभावक और स्थानीय लोग यहां आरसी पुरम क्षेत्र में स्थित स्कूल में सोमवार एकत्र हुए। तेलंगाना के आइटी मंत्री के टी रामा राव ने इस घटना की निंदा की और कहा कि वह उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के श्रीहरि से इस विषय पर बात करेंगे। राज्य सरकार ने सोमवार इस मामले की जांच के आदेश दिए और जिला शिक्षा अधिकारी से इस मामले में रिपोर्ट जमा करने को कहा। लड़की के पिता के अनुसार स्कूल की एक पीटीई (शारीरिक प्रशिक्षण शिक्षा) शिक्षिका ने उनकी बेटी से शनिवार को वर्दी पहनकर नहीं आने का कारण पूछा। पिता ने कहा, ‘उन्होंने (शिक्षिका) मेरी बच्ची की बात सुनने की कोशिश भी नहीं की कि हमने पहले ही उसकी डायरी में लिखकर अनुरोध किया था कि उसे एक दिन स्कूल की वर्दी पहने बिना स्कूल आने की अनुमति दी जाए। उन्होंने (अध्यापिका) मेरी बच्ची को जबरन खींचा और वर्दी नहीं पहन कर आने की सजा के तौर पर उसे पांच मिनट तक लड़कों के शौचालय में खड़े रहने को कहा।’

उन्होंने कहा, इस घटना का मेरी बच्ची पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है और उसकी गरिमा को ठेस पहुंची है। पिता ने कहा, मेरी बच्ची अब अपने सहपाठियों के सामने जाने को भी तैयार नहीं है क्योंकि उसे शर्मिंदगी महसूस हो रही है। हालांकि शिक्षिका ने इन आरोपों का खंडन किया और मीडियाकर्मियों से कहा कि लड़की ने वर्दी नहीं पहनी थी और उन्होंने उससे केवल इसका कारण पूछा था। शिक्षिका ने कहा कि छात्रा लड़कों के शौचालय के बाहर खड़ी थी और उसे अंदर खड़े होने को कभी नहीं कहा गया। इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए के टी रामाराव ने ट्वीट किया, घृणास्पद और बेहद अमानवीय। इस मामले को माननीय उप मुख्यमंत्री तक लेकर जाऊंगा ताकि वे स्कूल के खिलाफ उचित कार्रवाई कर सकें। लड़की के पिता ने रविवार इस मामले में शहर के एक एनजीओ से संपर्क किया था।

 

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