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फिर शुरू हुआ जाटों का आरक्षण आंदोलन, हरियाणा में हाई अलर्ट, बीस हजार सुरक्षाकर्मी तैनात

करीब तीन महीने पहले जाटों के हिंसक आंदोलन में 30 लोगों की मौत के बाद रविवार से जाट नेताओं ने कड़ी सुरक्षा के बीच एक बार फिर हरियाणा में अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया।
Author चंडीगढ़ | June 6, 2016 02:36 am
जाट आंदोलन की एक तस्वीर

करीब तीन महीने पहले जाटों के हिंसक आंदोलन में 30 लोगों की मौत के बाद रविवार से जाट नेताओं ने कड़ी सुरक्षा के बीच एक बार फिर हरियाणा में अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया। फिलहाल यह प्रदर्शन छोटी-छोटी बैठकों तक सीमित है। पिछली बार हिंसक प्रदर्शन के केंद्र रहे रोहतक जिले के जसिया गांव के जाट नेताओं ने हवन कर आरक्षण आंदोलन के दूसरे दौर की शुरुआत की। कुछ प्रभावशाली खाप पंचायतों और जाट गुटों ने प्रदर्शन से खुद को दूर रखा है।

हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) राम निवास ने बताया कि राज्य में शांति रही और किसी हिस्से से किसी अनहोनी की खबर नहीं आई है। यातायात भी सामान्य रहा। प्रदर्शनकारियों ने न तो राजमार्ग और न ही रेल लाइनों को जाम किया। उन्होंने कहा कि कई जिलों में जाट समुदाय के लोगों ने कोई प्रदर्शन नहीं किया। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारी धरने पर बैठे। उपायुक्तों को ज्ञापन सौंपने के बाद वे धरने से उठ गए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों और रेल पटरियों सहित पूरे हरियाणा में चौकसी बरतने के लिए केंद्र और राज्य के करीब 20,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।

प्रदर्शन का आह्वान करने वाले अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति (एआइजेएएसएस) ने जसिया के ठीक बाहर रोहतक-पानीपत राजमार्ग पर एक टेंट लगा दिया है। साथ ही प्रदेश के 21 में से 15 जिलों और दिल्ली में धरना भी दिया ताकि अपनी मांगों को लेकर समर्थन जुटा सकें।

समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। एआइजेएएसएस दिल्ली सहित अन्य राज्यों में सांकेतिक धरना देगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में रविवार शाम ऐसा ही एक प्रदर्शन किया गया। मलिक ने कहा कि हमने रविवार को हरियाणा से शुरुआत की। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में सांकेतिक धरना दिया जाएगा।

जाट प्रदर्शनकारी ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण देने, पिछले प्रदर्शन के दौरान समुदाय के सदस्यों पर दर्ज मामले वापस लिए जाने, मारे गए लोगों को शहीद का दर्जा देने और उनके परिजन के लिए नौकरी और जख्मी हुए लोगों को मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। इस बार का प्रदर्शन तथाकथित ‘जाट बेल्ट’ तक सीमित है, जिसमें झज्जर, सोनीपत, रोहतक, पानीपत, हिसार, फतेहाबाद और जींद जैसे जिले शामिल हैं ।

एक अधिकारी ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में प्रदर्शनकारियों के छोटे-छोटे समूह हैं। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने जिले के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे हैं। राज्य भर में प्रदर्शनकारियों की संख्या 2000 से ज्यादा नहीं रही।
इसी बीच, दिल्ली पुलिस ने कहा कि जाट आंदोलन के सिलसिले में हरियाणा से सटे इलाकों और कुछ अन्य स्थानों पर सोमवार को निषेधाज्ञा लागू रहेगी ।

दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा कि हरियाणा की सीमा से सटे दिल्ली के जिलों और शहर के अन्य हिस्सों, जिसमें दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व दिल्ली शामिल हैं, में सीआरपीसी की धारा 144 लागू की जाएगी। यमुनानगर, पंचकुला, फरीदाबाद, गुड़गांव, पलवल और सिरसा जैसी जगहों पर कोई धरना नहीं दिया गया।

हरियाणा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) मुहम्मद अकील ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण है। हम प्रदर्शन के दौरान किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार हैं। झज्जर में प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा और फरवरी के प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार हुए लोगों की रिहाई की मांग की। अधिकारियों ने बताया कि हालात पर नजर रखने के लिए चंडीगढ़ में एक नियंत्रण कक्ष बनाया गया है जो चौबीसों घंटे सक्रिय रहेगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी सहित वरिष्ठ अधिकारी हालात पर नजर रख रहे हैं।

हरियाणा सरकार ने कहा कि वह जाटों के आरक्षण से जुड़े मामले से अदालत में निपट रही है और यदि किसी ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा कि एक लोकतांत्रिक ढांचे में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती। लेकिन कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। राज्य के गृह सचिव ने लोगों से अपील की कि वे अफवाह फैलाने वालों के झांसे में न आएं।

हरियाणा के कृषि मंत्री ओपी धनकड़ ने कहा कि धरने शांतिपूर्ण रहे हैं। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी राय जाहिर करने का लोगों को अधिकार है, लेकिन यह कानून के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने उनकी मांग पूरी कर दी थी लेकिन इसे अदालत में चुनौती दी गई। इसके लिए राज्य सरकार जरूरी कदम उठा रही है।

पुलिस ने बताया कि हिसार में जाट समुदाय के लोगों ने मय्यर गांव के एक स्टेडियम में बेमियादी धरना की शुरुआत की है। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जाट नेताओं ने हरियाणा सरकार पर आरोप लगाया कि वह उन्हें आरक्षण देने की मांग पर गंभीर नहीं है। जाट नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने सकारात्मक तौर पर उनकी मांगें पूरी नहीं की तो उनके पास सड़कों पर उतरने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा। जींद में भी एआइजेएएसएस के सदस्यों ने झंज कलां गांव में धरना दिया।

पिछले जाट आंदोलन के बाद हरियाणा सरकार ने जाटों और पांच अन्य समुदायों को पिछड़ा वर्ग (सी) नाम की एक नई श्रेणी के तहत आरक्षण देने के लिए कानून बनाया था। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए इस कानून पर रोक लगा दी थी। इसके बाद जाट संगठनों ने फिर से आंदोलन की घोषणा की है।

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