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गुरुग्राम के ग्वाल पहाड़ी मामले में सरकार नहीं करवाएगी सीबीआइ जांच

गुरुग्राम के ग्वाल पहाड़ी में हुआ भूमि विवाद हरियाणा सरकार के गले की फांस बन गया है। सरकार इस कथित घोटाले की जांच सीबीआइ या किसी अन्य आयोग से करवाने के मामले में पीछे हट गई है।
Author संजीव शर्मा | March 11, 2017 00:36 am
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर। (फाइल फोटो)

संजीव शर्मा

गुरुग्राम के ग्वाल पहाड़ी में हुआ भूमि विवाद हरियाणा सरकार के गले की फांस बन गया है। सरकार इस कथित घोटाले की जांच सीबीआइ या किसी अन्य आयोग से करवाने के मामले में पीछे हट गई है। इस मुद्दे पर सदन में कांग्रेस व इनेलो ने शुक्रवार को जहां सरकार की घेराबंदी की वहीं इस कथित घोटाले के व्हीसल ब्लोअर बने गुड़गांव के विधायक उमेश अग्रवाल मुख्यमंत्री के खिलाफ पूरी तरह से मुखर हो गए और उन्होंने अपनी ही सरकार पर घोटाले के आरोप लगा दिए।  शुक्रवार को बजट सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी के अलावा कांग्रेस व इनेलो के आठ विधायकों द्वारा ग्वाल पहाड़ी भूमि विवाद पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा गया। कांग्रेस विधायकों ने यह प्रस्ताव सत्र की शुरुआत में ही रख दिया था लेकिन इसे शुक्रवार को अंतिम दिन अंतिम कार्यवाही का हिस्सा बनाया गया। सरकार की ओर से शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन ने स्पष्ट किया कि ग्वालपहाड़ी की भूमि के कब्जे और स्वामित्व में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

जैन के जवाब से विपक्ष आक्रामक हो गया और मुख्यमंत्री को खुद ही मोर्चा संभालना पड़ गया। किरण चौधरी ने उद्योग विभाग के प्रधान सचिव देवेंद्र सिंह की उस चिट्ठी का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने गुरुग्राम के तत्कालीन डीसी टीएल सत्यप्रकाश को मेट्रो वैली भूमि मामले का छह सप्ताह में निपटारा करने के निर्देश दिए थे। यह आदेश सीएम के निर्देशों पर जारी हुए थे। साथ ही, केंद्र की ओर से भी इस मामले में पत्र लिखने का मुद्दा किरण ने सदन में उठाया। किरण ने कहा कि जमीन की म्यूटेशन बदलने के मामले में हजारों करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है।

किरण ने कहा कि टीएल सत्यप्रकाश ने अपने आदेशों में प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा दिए गए निर्देशों का भी साफ-साफ उल्लेख किया है। इससे स्पष्ट है कि इस मामले में अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। कांग्रेस व इनेलो के कई विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष के साथ-साथ जब भाजपा विधायक उमेश अग्रवाल व मूल चंद ने भी सरकार को घेरा तो मुख्यमंत्री ने कहा ‘सरकार इस पूरे मामले की जांच करवाएगी’। उनकी इस घोषणा से असंतुष्ट कांग्रेस व इनेलो विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

सीएम के खिलाफ मुखर हुए उमेश अग्रवाल
भाजपा विधायक उमेश अग्रवाल ने शुक्रवार को सदन में मुख्यमंत्री के खिलाफ मुखर हो गए। ग्वाल पहाड़ी के कथित भूमि घोटाले को लेकर उन्होंने सीएम की सफाई को नकारते हुए कहा कि यह म्यूटेशन का नहीं बल्कि आॅनरशिप का मामला है। स्पीकर कंवरपाल गुर्जर ने उमेश को रोकने की कोशिश की तो अग्रवाल ने कहा कि उन्हें न तो राज्यपाल अभिभाषण पर बोलने दिया और न ही बजट पर। यह उनके विधानसभा क्षेत्र का मामला है। इसलिए वह चुप नहीं बैठ सकते।

दागी अधिकारी पर मेहरबान
ग्वाल पहाड़ी भूमि विवाद मामले में हरियाणा सरकार पूरी तरह संदेह के दायरे में है। इस मामले में आज विधानसभा में समूचे विपक्ष ने एकजुटता के साथ गुरुग्राम के तत्कालीन उपायुक्त टीएल सत्यप्रकाश का नाम उछाला। गुरुग्राम में जब यह भूमि विवाद हुआ था तो उस समय टीएल सत्यप्रकाश गुरुग्राम के उपायुक्त थे। इसके चलते हरियाणा सरकार ने सत्यप्रकाश के तबादले की तैयारी कर ली। इसी दौरान सत्यप्रकाश ने उनके स्थान पर आने वाले उपायुक्त को एक पत्र लिख कर पूरे घटनाक्रम के लिए खुद को सेफ करते हुए परोक्ष रूप से अपनी गलती को स्वीकार कर लिया। इसके बाद हरियाणा सरकार भी बैकफुट पर आ गई और टीएल सत्यप्रकाश को उपायुक्त के पद से हटाकर चंडीगढ़ को दो अतिमहत्वपूर्ण एवं संवेदनशील विभागों की जिम्मेदारी सौंप दी।

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