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चुनावी मंशा के साथ रावत ने किए लुभाऊ एलान

राजनीतिक पंडित यह संभावना जाहिर कर रहे हैं कि हरीश रावत जून के आखिरी सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह में विधानसभा के चुनाव की घोषणा कर सकते हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत। (PTI File Photo)

45 दिन बाद सत्ता संभालते ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ताबड़तोड़ फैसले करने शुरू कर दिए हैं। हरीश रावत ने गुरुवार (12 मई) को सचिवालय में कैबिनेट की बैठक की। रावत ने दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद कैबिनेट की इस पहली बैठक में 15 से ज्यादा फैसले लिए। जिस तरह रावत ने कैबिनेट की पहली बैठक में ताबड़तोड़ निर्णय लिए, उसे देखते हुए राजनीतिक पंडित यह संभावना जाहिर कर रहे हैं कि रावत जून के आखिरी सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह में विधानसभा के चुनाव की घोषणा कर सकते हैं।

इस बैठक में रावत मंत्रिमंडल ने बेनामी संपत्ती विधेयक और चार नए विश्वविद्यालय खोलने की मंजूरी दी। साथ ही कैबिनेट ने मलिन बस्तियों के विनियमितीकरण, पर्वतीय क्षेत्रों में चकबंदी अध्यादेश लागू करने, अतिथि शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति करने, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारियों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने और आंदोलनकारियों को पेंशन देने, समाज कल्याण विभाग के तहत आने वाले सभी पेंशनधारियों की पेंशन में दो सौ रुपए प्रतिमाह का इजाफा करने का फैसला किया। राज्य में जमीनों के सर्किल रेट दोबारा से निर्धारित करने के लिए मंत्रिमंडल की उपसमिति बनाने का फैसला भी लिया गया। रावत ने कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि उनकी प्राथमिकता राज्य में महिलाओं, अल्पसंख्यकों, पिछड़ों, अनुसूचित जाति, जनजाति, अति पिछड़ों, गरीबों और बेराजगारों के कल्याण की है। रावत की कैबिनेट की बैठक के बाद यह तय हो गया है कि रावत का फोकस लोकलुभावन फैसले कर जनता का दिल जीतकर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत दिलाने का है। इसलिए रावत ने कैबिनेट बैठक में सभी फैसले सूबे की जनता को खुश करने की दृष्टि से लिए।

कैबिनेट के बैठक के बाद रावत अपने सभी मंत्रियों के साथ राज्यपाल डॉ केके पॉल से मिलने राजभवन गए और गुलदस्ता देकर उनका आभार जताया। राज्यपाल से मिलने के बाद रावत अपने सभी मंत्रियों के साथ सोनिया और राहुल गांधी का आभार जताने के लिए दिल्ली रवाना हो गए। स्टिंग आॅपरेशनों के जरिए भाजपा ने रावत की जो छवि बिगाड़ने का प्रयास किया, भाजपा के इए प्रयास को धूमिल करने के लिए रावत ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ने का इरादा जताया है। रावत ने कहा कि वे नैनीताल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलकर राज्य में 2007 से लेकर अब तक हुए भूमि और अन्य घोटालों की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग बनाने की पहल करेंगे। रावत का असली मकसद इस आयोग के बहाने पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, बागी कांग्रेसी नेता विजय बहुगुणा, सतपाल महाराज और हरक सिंह रावत पर शिकंजा कसने की है।

रावत ने एलान किया कि पुलिस विभाग के तहत आर्थिक अपराध शाखा की स्थापना की जाएगी। यह शाखा बेनामी संपत्तियों और भूमि संबंधित अपराधों की जांच करेगी। रावत ने गुरुवार (12 मई) को  पुलिस महकमे के आला अधिकारियों के साथ बैठक कर यह फैसला लिया। साथ ही उन्होंने सूबे की कानून व्यवस्था की समीक्षा की। नेपाल और उत्तरप्रदेश से लगे सूबे के इलाकों में खासी सावधानी बरतने की हिदायत अधिकारियों को दी। रावत ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिना दबाव के वे अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें ताकि अपराधियों पर कानून का भय कायम किया जा सके। उन्होंने पुलिस को भूमि संबंधित अपराधों का जल्दी खुलासा कर अपराधियों को शिकंजे में लाने के निर्देश दिए। रावत ने सूबे में सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ने की आशंका जताते हुए कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस को कड़ी चौकसी रखने के निर्देश दिए।

रावत ने कहा कि पुलिस विभाग को और अधिक सक्षम बनाने के लिए राज्य सरकार संसाधनों की कमी नहीं आने देगी। मुख्यमंत्री की इस बैठक में सूबे के पुलिस महानिदेशक एमए गणपति, अपर पुलिस महानिदेशक एके रतूडी, आरएस मीणा, अशोक कुमार, पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल समेत कई आलाधिकारी मौजूद थे।

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