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गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार: 9 जून को होगा सजा का ऐलान, पीड़ि‍तों ने की फांसी देने की मांग

एक विशेष एसआइटी अदालत के साल 2002 के गुलबर्ग सोसायटी दंगा मामले में 24 दोषियों को सोमवार को सजा सुनाने की उम्मीद है।
Author अमदाबाद | June 6, 2016 14:41 pm
गुलबर्ग सोसाइटी केस: राहत और बचाव में लगे कर्मियों को जिंदा जला दिए गए लोगों की लाशें मिली थीं। (EXPRESS ARCHIVE)

गोधरा कांड के ठीक बाद 2002 के गुलबर्ग सोसायटी दंगा मामले में एक विशेष एसआइटी अदालत 24 दोषियों को 9 जून को सजा सुनाएगी अदालत ने गत दो जून को इस मामले में 24 आरोपियों को दोषी ठहराया था। अभियोजन पक्ष हत्या के आरोप में दोषी ठहराए गए 11 लोगों के लिए फांसी की सजा की मांग करेगा जबकि पीड़ितों के वकील उनके प्रति नरमी बरतने की मांग कर सकते हैं।

विशेष सीबीआइ न्यायाधीश पीबी देसाई ने गत दो जून को गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार मामले में 66 आरोपियों में से 24 को दोषी ठहराया था। इस मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोगों की हत्या कर दी गई थी। कुल 66 आरोपियों में से छह की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई। 24 दोषियों में से 11 पर हत्या का आरोप लगाया गया है जबकि विहिप नेता अतुल वैद्य समेत 13 अन्य आरोपियों को हल्के अपराधों का दोषी ठहराया गया है।

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फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा था कि इस मामले में आपराधिक साजिश का कोई साक्ष्य नहीं है और आइपीसी की धारा 120 बी के तहत आरोप हटा दिए थे। दरअसल जो लोग बरी किए गए हैं, उसमें भाजपा के वर्तमान पार्षद बिपिन पटेल, गुलबर्ग सोसाइटी जहां है, उस इलाके के तत्कालीन पुलिस निरीक्षक के जी एर्डा और कांग्रेस के पूर्व पार्षद मेघसिंह चौधरी शामिल हैं।

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