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गुजरात: नोटबंदी के बाद आयकर की रडार पर आया एक बैंक, जमा हुए थे 871 करोड़ से ज्यादा के पुराने नोट

आईटी विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी के बाद कई निष्क्रिय खातों में 10 करोड़ रुपए जमा किए गए।
Author नई दिल्ली | January 8, 2017 15:36 pm
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

आयकर विभाग ने राजकोट के एक सहकारी बैंक में भारी कथित विसंगतियों का पता लगाया है जहां आठ नवंबर की नोटबंदी के बाद 871 करोड़ रुपए जमा किए गए, 4500 नए खाते खोले गए और एक ही मोबाइल नंबर से पांच दर्जन से अधिक खाते शुरू किए। यह नोटबंदी के बाद कालाधन सृजन के सबसे बड़े मामलों में एक है। विभाग की अहमदाबाद अन्वेषण शाखा ने कर नियमों के तहत कार्रवाई शुरू की है तथा बैंक से पूरा ब्योरा मांगा है। उसने कुछ समय पहले उसका सर्वेक्षण किया था और भारी विसंगतियां पायी थीं।

अधिकारियों ने बताया कि विभाग की अब तक की जांच के अनुसार पिछले साल नौ नवंबर और 30 दिसंबर के बीच 871 करोड़ रुपए जमा किए गए जिनमें ज्यादातर 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट थे। उसी अवधि में 108 करोड़ रुपए संदिग्ध तरीके से निकाले गए। ये सब बातें 2015 की समान अवधि की अनुपातिक नहीं थीं। जांच दल ने नोटबंदी के बाद जमा की गई कम से कम 25 बड़ी राशियों की पहचान की जहां कथित कमजोर केवाईसी नियमों से कथित संदिग्ध एवं असंतोषजनक तरीके से 30 करोड़ रुपए का विनिमय हुआ।

आईटी विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी के बाद कई निष्क्रिय खातों में 10 करोड़ रुपए जमा किए गए। उनमें एक पेट्रोलियम फर्म का खाता था जिसमें 2.53 करोड़ रुपए जमा किए गए। जिस बात ने कर अधिकारी को चौंका दिया, वह यह था कि नोटबंदी के बाद 4,551 नये खाते खोले गए जबकि पूरे साल में सामान्यत: औसत 5000 ऐसे खाते खुले। 62 खाते तो एक ही मोबाइल नंबर से खोले गए।

यह भी पता चला कि जमा करने के लिए भरी गयी पर्चियों में भारी विसंगतियां थीं। एक में भी पैन नंबर नहीं दिया गया था। कई में तो जमाकर्ता के हस्ताक्षर भी नहीं थे। किसी भी पर्ची में इन रकम के स्रोत का दर्शाने वाले दस्तावेज नहीं थे। रिपोर्ट में आरोप लगाया है, ‘पाया गया कि बैंक के पूर्व निदेशक के बेटे को 30 बैंक खातों में नकद जमा से एक करोड़ रुपए मिले। सारी जमा पर्चियां एक ही व्यक्ति ने भरीं। बैंक के उपाध्यक्ष की मां को भी 64 लाख रुपए नकद जमा मिले जिसे आखिरकार एक ज्वैलर को अंतरित किया गया।’

रिपोर्ट के अनुसार पैसों का लेन-देन आरटीजीएस और अन्य बैंकिंग अंतरण उपायों से हुआ। अधिकारियों ने कहा कि इन दोनों लागों के बयान शीघ्र ही दर्ज किए जाएंगे। रिपोर्ट में एक खास घटना का जिक्र है जिसके अनुसार नये खातों में जमा की गई बड़ी रकम का संबंध साझे पते और फोन नंबर से था। उनमें एक नये बैंक खातों 1.22 करोड़ रुपए जमा कराया जाना है और सभी के सभी आपस में एक दूसरे से जुड़े थे। अधिकारियों ने कहा कि राजकोट के इस सहकारी बैंक का मामला अति महत्वपूर्ण मामलों में एक बन गया है जहां नोटबंदी के बाद भारी मात्रा में कालेधन का सृजन एवं विनिमय हुआ। विभाग कई कोणों से इसकी जांच कर रहा है।

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  1. R
    Ram Dhan
    Jan 8, 2017 at 10:16 am
    Nice
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग