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नील गाय और जंगली सूअर को ‘दरिंदा’ बताकर शिकार नहीं करेगी गुजरात सरकार, 200 करोड़ खर्च करके बचाएगी

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ राज्यों में नीलगाय और जंगली सुअरों के शिकार पर प्रतिबंध लगा हुआ है।
नीलगाय के शव पर अधिकार न होने से लोग सरकार की इस योजना में जरा भी रुचि नहीं दिखा रहे। (File Photo)

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने कहा है कि उनकी सरकार ने केंद्र से उस प्रस्ताव को खारिज करने के लिए कहा है जिसमें उन्होंने नीलगाय और जंगली सुअरों को हिंसक जानवर की श्रेणी में रखा था। उन्होंने कहा कि इसके पीछे उनका मकसद है कि इन जानवरों को कृमि घोषित कर सके। साथ ही इन जानवरों को शिकार करने के बजाय राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में प्रभावित खेत के आसपास 97.5 लाख मीटर की बाड़ लगाई है।

सीएम ने कहा है कि नीलगाय और जंगली सुअरों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने 200 करोड़ रुपये आवंटित किया है। रूपानी ने राज्य सरकार के वन्य विभाग के लिए आयोजित एक बैठक के दौरान इस मुद्दे पर विभिन्न पहलुओं को लेकर चर्चा की।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने नीलगाय और जंगली सूअरों के शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया था, क्योंकि वे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सुरक्षित थे। हालांकि, उनकी तादाद काफी हो गई थी और वे लगातार फसलों को नुकसान पहुंचा रहे थे तो राज्य सरकार ने केंद्र को एक प्रस्ताव भेजकर मांग की थी कि नीलगाय और जंगली सुअरों को हिंसक जानवरों की श्रेणी में रखा जाए।

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ राज्यों में नीलगाय और जंगली सुअरों के शिकार पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इन प्रदेशों में 2013 से लेकर अब तक 100 नीलगाय भी नहीं मारी जा सकी है। इसमें ‘वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम-1972’ ही आड़े आ रहा है। इस अधिनियम की धारा 39 में यह व्यवस्था है कि नीलगाय का वध करने के बाद उसके शव पर वन विभाग का ही अधिकार होगा। वन अधिकारी ने बताया, ‘वध के बाद नीलगाय के शव पर अधिकार न होने से लोग सरकार की इस योजना में जरा भी रुचि नहीं दिखा रहे। यही कारण है कि नीलगायों का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है।’

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