April 24, 2017

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नोटबंदी का विरोध कर रही पार्टियों पर बरसीं स्मृति ईरानी, कहा- जिनके काले धन लुट गए वे संसद नहीं चलने दे रहे

स्मृति ने कहा, ‘नोटबंदी काले धन, भ्रष्टाचार और देश के गरीब नागरिकों के पैसों से अपने खजाने भर कर रखने वालों के खिलाफ केंद्र के युद्ध का हिस्सा है।’

Author अहमदाबाद | November 19, 2016 18:07 pm
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी। (PTI Photo/19 Nov, 2016/File)

नोटबंदी का विरोध कर रही विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने शनिवार (19 नवंबर) को दावा किया कि केंद्र के कदम के बाद जिनके ‘काले धन लुट गए’, वे संसद नहीं चलने दे रहे। कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी पार्टियों के हंगामे के कारण पिछले दो दिन में संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी है। लोकसभा में विपक्षी पार्टियों की मांग रही है कि एक ऐसे नियम के तहत नोटबंदी के मुद्दे पर चर्चा कराई जाए जिसमें मत विभाजन का प्रावधान है। राज्यसभा में विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में इस मुद्दे पर चर्चा बहाल कराने की मांग कर रहा है। स्मृति ने कहा, ‘स्वाभाविक है कि जिनके काले धन लुट गए, वे संसद नहीं चलने दे रहे। हमें अपने राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर देशहित में मिलकर काम करना चाहिए।’

कपड़ा मंत्रालय की एक नई पहल के तहत हस्तशिल्पकारों को पहचान-पत्र बांटने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम के इतर स्मृति ने कहा, ‘नोटबंदी काले धन, भ्रष्टाचार और देश के गरीब नागरिकों के पैसों से अपने खजाने भर कर रखने वालों के खिलाफ केंद्र के युद्ध का हिस्सा है।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अपने पुराने नोट बदलवाकर नए नोट हासिल करने की खातिर कतार में खड़े नागरिक प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिलकर भ्रष्टाचार से लड़ने वाले योद्धा हैं। स्मृति ने कहा, ‘मैं उनके प्रति आभारी हूं। भारत ऐसे भारतीयों के प्रति हमेशा आभारी रहेगा जो (काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध के) मोदी के आह्वान को समझते हैं।’ बैंकों की कतारों में खड़े होकर जान गंवाने वालों से जुड़े एक सवाल के जवाब में स्मृति ने कहा, ‘हर परिवार के साथ मेरी सहानुभूति है। हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि लोगों को बैंक कर्मियों से मदद मिले।’

उन्होंने कहा, ‘मैं उनके प्रति आभारी हूं जो इस भावना से एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं कि यह (नोटबंदी) एक ऐतिहासिक कदम है। आने वाली पीढ़ियां उनकी कर्जदार रहेंगी।’ कार्यक्रम के दौरान स्मृति ने हस्तशिल्पकारों के उत्थान के लिए कई कदमों का ऐलान किया, जिनमें हस्तशिल्पकारों के नौवीं कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सालाना 1,200 रूपए वजीफे का प्रावधान शामिल है। इसके अलावा, हस्तशिल्पकारों के प्रशिक्षण और उन्हें कर्ज एवं बीमा योजनाएं मुहैया कराने के लिए शिविरों का भी आयोजन किया जाएगा। गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के परिवारों, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति एवं अल्पसंख्यक समुदायों के हस्तशिल्पकारों को नि:शुल्क टूल-किट भी मुहैया कराए जाएंगे। स्मृति ने यह भी कहा कि केंद्र के शिल्प गुरू अवॉर्ड के लिए पात्रता की खातिर आयु सीमा 55 से घटाकर 50 साल कर दी गई है । हस्तशिल्पकारों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार की खातिर आयु सीमा 30 से घटाकर 25 साल कर दी गई है ।

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First Published on November 19, 2016 6:07 pm

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