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गुजरात राज्यसभा चुनाव: अब नोटा के विकल्प पर सियासत, राज्यसभा में हंगामा

इसका विरोध करते हुए कांग्रेस, बसपा और तृणमूल ने मंगलवार को राज्यसभा में हंगामा किया। इस वजह से सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।
Author नई दिल्ली | August 2, 2017 02:37 am
कांग्रेस नेता अहमद पटेल।

गुजरात में कांग्रेस विधायक दल में मची टूट-फूट के बीच वहां राज्यसभा चुनाव में नोटा (उम्मीदवारों में से कोई पसंद नहीं) का विकल्प उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है। इसका विरोध करते हुए कांग्रेस, बसपा और तृणमूल ने मंगलवार को राज्यसभा में हंगामा किया। इस वजह से सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। इस बीच कांग्रेस ने विप जारी करने का एलान किया है। वहीं गुजरात के मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कांग्रेस विधायक दल में मची टूट-फूट से प्रशासन का कोई लेना-देना नहीं है। उनका कहना है कि जिस पुलिस अधीक्षक पर जिस दिन विधायकों पर दबाव डालने का आरोप लगा है, उस दिन वह अमदाबाद मुख्यालय गए हुए थे।  सरकार के इस नए दांव की काट करते हुए कांग्रेस ने विप जारी करने का एलान किया है। आलाकमान के निर्देश पर गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष अर्जुन मोढ़वाडिया ने विधायक दल को इस बारे में सूचित कर दिया है। मोढ़वाडिया के मुताबिक, विप जारी होने से नोटा में वोट करने का विकल्प नहीं होगा। नोटा पर मुहर लगाने वाले विधायक की सदस्यता खारिज हो जाएगी। वहां कांग्रेस ने अहमद पटेल को मैदान में उतारा है।

गुजरात विधानसभा ने राज्यसभा चुनाव में वहां पहली बार नोटा का विकल्प लागू करने का एलान किया है। अमदाबाद में विधानसभा के सचिव डीएम पटेल ने एलान किया कि आठ अगस्त को विधायकों को जो मतदान पत्र दिए जाएंगे, उसमें नोटा का विकल्प भी छपा होगा। पिछले 20 साल में यह पहली बार है कि गुजरात विधानसभा के सदस्य राज्यसभा के लिए मतदान करेंगे। इस बार चार उम्मीदवार मैदान में हैं और तीन चुने जाने हैं। कांग्रेस छोड़ने वाले विधायक बलवंत सिंह राजपूत को भाजपा ने अपना तीसरा उम्मीदवार बना दिया है। भाजपा ने वहां से राजपूत के अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को खड़ा किया है। कांग्रेस के अहमद पटेल का मुकाबला राजपूत से है। गुजरात में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला के पार्टी छोड़ने के बाद उनके समर्थक विधायकों में छह लोग कांग्रेस छोड़ चुके हैं। इनमें से राजपूत समेत तीन भाजपा का दामन थाम चुके हैं। सात अन्य विधायकों के साथ कांग्रेस के नेता संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। पार्टी में और टूट-फूट रोकने के लिए आपदा प्रबंधन के तहत कांग्रेस ने गुजरात के अपने विधायकों में से 44 को बंगलुरु के एक रिसॉर्ट में पहुंचा दिया है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि इन विधायकों में से कई को तोड़ने का षड्यंत्र चल रहा है। नोटा का विकल्प इसी कड़ी में लाया गया है।
कांग्रेस नेता और राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता आनंद शर्मा ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि नोटा का विकल्प अवैध है। संविधान में संशोधन के बगैर इसे लागू नहीं किया जा सकता। जबकि, राज्यसभा में सदन के नेता अरुण जेटली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्यसभा चुनाव में भी चुनाव आयोग इस विकल्प को हरी झंडी दिखा चुका है।

इस मुद्दे पर कांग्रेस, बसपा और तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा में हंगामा किया। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, बसपा के सतीश मिश्र, सपा के रामगोपाल यादव और तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने इस मामले पर सरकार के बयान की मांग की। इस पर अरुण जेटली ने कहा कि नोटा की अधिसूचना चुनाव आयोग ने जारी की थी। संवैधानिक स्वायत्त निकाय के रूप में आयोग द्वारा किए गए किसी फैसले पर चर्चा करने के लिए राज्यसभा उपयुक्त मंच नहीं है। सभापति ने जेटली के पक्ष से सहमति जताते हुए कहा कि प्रश्नकाल के दौरान इस विषय को उठाने की वह अनुमति नहीं दे सकते हैं। विपक्ष का हंगामा नहीं थमने पर सभापति हामिद अंसारी ने पहले 12 बजकर दस मिनट पर दस मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी। उसके बाद दोपहर दो बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी गई। उधर, गुजरात के मुख्य सचिव जेएन सिंह ने चुनाव आयोग को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कांग्रेस के सभी विधायकों के घर पर सुरक्षा मुहैया कराई गई है। जो विधायक बंगलुरु गए हैं उनके घर पर भी सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं। मुख्य सचिव ने तीन विधायकों के आरोपों को लेकर भी रिपोर्ट दी है। तीनों ने आरोप लगाया था कि तापी के एसपी ने डरा-धमका कर भाजपा में शामिल होने का दबाव बनाया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस अधीक्षक अदालत में अपनी पेशी की तारीख की वजह से अमदाबाद में थे। उनके मोबाइल का लोकेशन भी अमदाबाद का है।

 

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