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गुजरात हाई कोर्ट ने 10% ईबीसी आरक्षण अध्यादेश रद्द किया, सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

हाई कोर्ट ने कहा कि अनारक्षित श्रेणी में गरीबों के लिए दस फीसदी का आरक्षण देने से कुल आरक्षण 50 फीसदी के पार हो जाता है जिसकी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्णय के तहत अनुमति नहीं है।
Author अहमदाबाद | September 11, 2016 12:59 pm
गुजरात हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन से पहले भाजपा सरकार को झटका देते हुए गुजरात उच्च न्यायालय ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए अनारक्षित श्रेणी के तहत दस फीसदी आरक्षण अध्यादेश को गुरुवार (4 अगस्त) को रद्द कर दिया। आंदोलनरत पटेल समुदाय को शांत करने के लिए राज्य की भाजपा सरकार ने यह कदम उठाया था। राज्य सरकार ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देगी। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के वकील के आग्रह पर दो हफ्ते के लिए आदेश को स्थगित रखा है ताकि वे उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकें। न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति वी. एम. पंचोली की खंडपीठ ने एक मई को जारी अध्यादेश को ‘अनुपयुक्त और असंवैधानिक’ बताते हुए कहा कि सरकार के दावे के मुताबिक इस तरह का आरक्षण कोई वर्गीकरण नहीं है बल्कि वास्तव में आरक्षण है। अदालत ने यह भी कहा कि अनारक्षित श्रेणी में गरीबों के लिए दस फीसदी का आरक्षण देने से कुल आरक्षण 50 फीसदी के पार हो जाता है जिसकी उच्चतम न्यायालय के पूर्व के निर्णय के तहत अनुमति नहीं है। उच्च न्यायालय का फैसला ऐसे समय में आया है जब भाजपा सरकार राज्य में शुक्रवार (5 अगस्त) को मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे के बाद नया मुख्यमंत्री बनाने वाली है। अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारूढ़ दल पाटीदार आरक्षण आंदोलन सहित कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।

ईबीएस आरक्षण पर अपने रुख पर कायम रहते हुए भाजपा सरकार ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ वह उच्चतम न्यायालय जाएगी। बहरहाल पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने आदेश का स्वागत किया और कहा कि ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण के लिए उनका आंदोलन जारी रहेगा। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने ईबीसी को बिना किसी अध्ययन या वैज्ञानिक आंकड़े के आरक्षण दे दिया। याचिकाकर्ता दयाराम वर्मा, राजीवभाई मनानी, दुलारी बसारजे और गुजरात अभिभावक संगठन ने अध्यादेश को अलग-अलग चुनौती दी थी। अध्यादेश के तहत अनारक्षित श्रेणी के तहत ऐसे उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में दस फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया था जिनके परिवार की वार्षिक आय छह लाख रुपए है। उनकी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई।

आदेश पर प्रतिक्रिया जताते हुए स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल ने कहा कि सरकार ईबीसी आरक्षण के प्रावधानों का पालन करेगी और उच्च न्यायालय के फैसले को जल्द से जल्द उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से कहा कि आरक्षण उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है जिसमें इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार मामले में अदालत ने आरक्षण की सीमा 50 फीसदी तय की थी। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त दस फीसदी आरक्षण से शैक्षणिक संस्थानों में अनारक्षित श्रेणी के तहत ऐसे उम्मीदवारों की संख्या कम हो जाएगी जिनके परिवार की वार्षिक आय छह लाख रूपये से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि प्रावधान से संविधान के अनुच्छेद 46 का उल्लंघन होता है जो राज्य के नीति निर्देशक हैं और इसमें 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण की अनुमति नहीं है।

सरकारी वकील ने अदालत से कहा कि आरक्षण वास्तव में ‘सामान्य, खुले, अनारक्षित वर्ग में आगे का वर्गीकरण है’ और यह उच्चतम न्यायालय या संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन नहीं है। राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष अपने हलफनामे में कहा कि अध्यादेश न तो संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता है न ही यह उच्चतम न्यायालय के आदेशों के खिलाफ है। हलफनामे में कहा गया, ‘अध्यादेश को संविधान के अनुच्छेद 46 के साथ पढ़ा जाना चाहिए (जिसमें कहा गया है कि समाज के कमजोर तबके के लिए सामाजिक न्याय की जरूरत है) न कि इसे पिछड़ा वर्ग आरक्षण के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।’ राज्य सरकार ने एक मई को अध्यादेश जारी कर अनारक्षित श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए दस फीसदी आरक्षण मुहैया कराया था। यह आरक्षण सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन के लिए एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणी के तहत प्राप्त आरक्षण के अलावे था। आरक्षण छह लाख रुपए वार्षिक आमदनी वाले लोगों पर लागू है।

नितिन पटेल ने कहा, ‘जब हमने दस फीसदी ईबीसी आरक्षण की घोषणा की तो हमारी सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ईबीसी आरक्षण के इन प्रावधानों का हम किसी भी स्थिति में पालन करेंगे। हम उच्च न्यायालय के आज (गुरुवार, 4 अगस्त) के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील करेंगे।’ उच्च न्यायालय के फैसले की प्रशंसा करते हुए हार्दिक ने कहा, ‘अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ईबीसी आरक्षण असंवैधानिक है। हम आदेश का स्वागत करते हैं क्योंकि हम हमेशा संविधान के तहत आरक्षण चाहते हैं।’ उदयपुर, राजस्थान से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से पटेल ने कहा, ‘इसलिए न्याय मिलने तक ओबीसी आरक्षण के तहत हम आरक्षण के लिए आंदोलन जारी रखेंगे।’ देशद्रोह के मामले में पिछले महीने जमानत मिलने के बाद उच्च न्यायालय ने उन्हें छह महीने गुजरात से बाहर रहने का निर्देश दिया था।

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