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सर्वे: वोट देने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार की जाति-धर्म देखता है गुजराती मतदाता

गुजरात में नौ दिसंबर और 14 दिसंबर को विधान सभा चुनाव के लिए मतदान होना है। नतीजे 18 दिसंबर को आएंगे।
Author November 7, 2017 11:01 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

गुजरात के मतदाता वोट देते समय सबसे ज्यादा महत्व उम्मीदवार की जाति और धर्म को देते हैं। चुनाव और राजनीतिक दलों पर अध्ययन करने वाले एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के ताजा अध्ययन से ये जानकारी सामने आयी है। एडीआर ने चुनाव को प्रभावित करने वाले पांच कारकों का सर्वे किया। इस सर्वे में देश की 527 लोक सभा क्षेत्रों के दो लाख 70 हजार लोग शामिल हुए थे। ये सर्वे इसी साल जनवरी से अप्रैल के बीच हुआ था। एडीआर ने देश की मतदाताओं की प्राथमिकता के समझने के लिए ये सर्वे किया था। सर्वे में गुजरात से जुड़े आंकड़े सोमवार (छह नवंबर) को जारी हुए।

सर्वे के अनुसार गुजरात में मतदाता सबसे ज्यादा अहमियत प्रत्याशी की जाति और धर्म को देते हैं। इनके बाद वो लोक सभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और विधान सभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को तरजीह देते हैं। एडीआर के सर्वे में वोट देने के लिए महत्वपूर्ण होने के मामले में गुजरातियों ने जाति-धर्म को 10 में औसतन 8.27 अंक दिए। वहीं प्रत्याशी को मतदाताओं ने 10 में केवल 4.58 अंक दिए। इसके अलावा सीएम या पीएम उम्मीदवार और चुनाव से पहले बांटे जाने वाले उपहार भी गुजराती मतदाताओं के लिए वोट देने के अहम प्रेरक थे।

सर्वे में शामिल करीब 61 प्रतिशत गुजरातियों को चुनाव से पहले गिफ्ट या उपहार बांटे जाने के बारे में जानकारी थी लेकिन उनमें से केवल 29 प्रतिशत को पता था कि ये गैर-कानूनी है। एडीआर के प्रमुख मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अनिल वर्मा ने मीडिया को ये जानकारी देते हुए बताया, “सर्वे में शामिल करीब 73 प्रतिशत लोगों ने कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को वोट नहीं देना चाहिए लेकिन करीब 80 प्रतिशत ऐसे उम्मीदवारों को वोट देने के लिए तैयार थे क्योंकि उनकी नजर में उन पर लगे आरोप गंभीर नहीं हैं, 73 प्रतिशत इसलिए दागियों को वोट देते हैं क्योंकि वो उनकी जाति या धर्म के हैं और 70 प्रतिशत इसलिए कि उन्हें लगता है कि उस उम्मीदवार ने “अच्छा काम” किया था।”

एडीआर ने साल 2012 में चुने गये गुजरात के 150 विधायकों के चुनाव आयोग को दिए हलफनामों का अध्ययन किया तो पाया कि करीब 31 प्रतिशत (49) पर आपराधिक मामले थे। साल 2014 में चुने गये गुजरात के 26 लोक सभा सांसदों में करीब 35 प्रतिशत (09) पर गंभीर आपराधिक मामले थे। गुजरात से चुने गये राज्य सभा सांसदों में करीब 22 प्रतिशत पर आपराधिक मामले रहे हैं। एडीआर ने अपने सर्वे में मतदाताओं को चुनाव के लिए अहम मुद्दों को अहमियत के हिसाब से एक से 10 अंक तक देने के लिए कहा था। मतदाताओं की नजर में तीन सबसे अहम मुद्दे रोजगार के अवसर, बेहतर परिवहन और महिला सशक्तिकरण रहे।  ग्रामीण गुजरात में वोटरों ने कृषि उपज के मूल्य को दूसरा सबसे अहम मुद्दा बताया। वर्मा ने पत्रकारों को बताया गुजराती वोटरों का रुझान कमोबेश देश के बाकी इलाकों के मतदाताओं जैसा ही है।

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  1. R
    ritesh
    Nov 7, 2017 at 6:35 pm
    ये नए नए राजनेता अपने आप को जनता किउं बुलाते हैं , अरविन्द हुआ , राहुल हुआ , शत्रु हुआ जो भी बात खुद के लिय कहनी है उसमें "मैं" की जगह जनता या देश लगा देते है , जनता जिसके साथ है उसको वोट दे दिय भाई !!, अब शत्रु जी ये बोल दें की देश सोनाक्षी को हॉलीवुड में देखना चाहता है .
    (1)(0)
    Reply
    1. A
      Abrar
      Nov 7, 2017 at 10:53 am
      ये है गुजरात मॉडल
      (0)(0)
      Reply
      1. N
        NK
        Nov 7, 2017 at 10:29 am
        कमाल है, फिर भी तथाकथित उच्च जाति के लोग कहते हैं कि नेता देश को जातियों में बाँट रहे हैं. जब यही सब है तो पूरा देश विकास के लिए क्यों चिल्लाता है. क्योंकि जाति और विकास एक साथ नहीं चल सकते. क्योंकि जातियां गुलामी का व्यवस्थित तरीका है जिसे ब्राह्मण वादी कभी भी मिटाना नहीं चाहेंगे. यदि ऐसा हुआ तो उनकी सत्ता हाथ से चली जायेगी.
        (3)(0)
        Reply
        1. रेवती मदन
          Nov 7, 2017 at 12:50 pm
          तू किस जाति का है रे ..उच्च जाति नीच जाति क्या इश्वर ने बनाया है...तुने अपने फायदे के लिये खुद को नीच जाति का बनाया हुआ है...ताकि गरीबों का हक मार सके ...और उल्टे ब्राह्मणो को दोष देते हो
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