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गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व IPS डीजी वंजारा ने कहा- राजनीति मेरे लिए अछूत नहीं

वंजारा ने कहा कि उन्होंने जो भी किया है, उसमें वह हमेशा ‘‘नंबर एक’’ रहे हैं।
सेवानिवृत आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा (फाइल फोटो)

पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं इशरत जहां कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में आरोपी डीजी वंजारा ने आज (10 सितंबर ) संकेत दिया कि वह राजनीति में जाने के खिलाफ नहीं हैं। यह उल्लेख करते हुए कि कोई नया संगठन बनाने के लिए उनके पास ‘‘संसाधनों’’ का अभाव है, वंजारा ने गुजरात के विकास को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा पर भी हमला बोला। वंजारा को हाल में मुंबई की एक अदालत ने शोहराबुद्दीन शेख और तुलसी प्रजापति कथित फर्जी मुठभेड़ मामलों में आरोपमुक्त कर दिया था। उन्होंने इस साल के अंत में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव लड़ने के बारे में कुछ नहीं कहा, लेकिन गांधीनगर में एक कार्यक्रम में अपने समर्थकों से कहा कि वह पहले ही ‘‘बेताज बादशाह’’ बन चुके हैं।डीजी वंजारा ने कहा, ‘‘लोग जानना चाहते हैं कि मेरी क्या योजना है? मैं क्या करूंगा, मैं किस पार्टी में शामिल होउंगा, या मैं कोई नई पार्टी बनाऊंगा? मैं वर्षों तक जेल में रहा हूं, इसलिए मेरे पास नई पार्टी बनाने के लिए संसाधन नहीं हैं। लेकिन अपनी भावनाओं के बारे में बताना चाहता हूं कि राजनीति मेरे लिए अछूत नहीं है।’’ वंजारा ने कहा कि उन्होंने जो भी किया है, उसमें वह हमेशा ‘‘नंबर एक’’ रहे हैं।

पिछले दो दशक से गुजरात की सत्ता पर काबिज भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए वंजारा ने कहा कि यदि सरकार का इरादा सही हो तो उसे अपनी शक्तिशाली मशीनरी के साथ गुजरात को दुबई या सिंगापुर में बदलने के लिए केवल एक कार्यकाल चाहिए। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने 1 अगस्त को गुजरात के पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी डी.जी.बंजारा तथा एम.एन.दिनेश को साल 2005 में शोहराबुद्दीन शेख ‘फर्जी मुठभेड़’ मामले में बरी कर दिया। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी बंजारा अहमदाबाद पुलिस में अपराध शाखा के प्रमुख थे और बाद में पुलिस उपनिरीक्षक बने, जबकि आईपीएस अधिकारी दिनेश राजस्थान पुलिस में कार्यरत थे और बाद में गुजरात आतंकवाद-रोधी दस्ते के प्रमुख बनाए गए।अदालत के इस फैसले से सीबीआई को जोरदार झटका लगा है, जिसने मामले में बंजारा पर मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप लगाया था, जबकि दिनेश ने उस मुठभेड़ का नेतृत्व किया था, जिसमें बंजारा को 12 साल पहले मार गिराया गया था।

इस मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी घमासान हुआ, जिसमें एक संदिग्ध बदमाश सोहराबुद्दीन शेख को गुजरात में नवंबर 2005 में एक मुठभेड़ में मार गिराया गया था। मामले की जांच करने वाली सीबीआई के मुताबिक, शेख तथा उसकी पत्नी कौसर बी को गुजरात एटीएस की टीम ने कथित तौर पर तब पकड़ा था, जब वे बस से आंध्र प्रदेश के हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे। शेख को गांधीनगर के निकट मुठभेड़ में मार गिराया गया था, जबकि उसकी पत्नी को कुछ दिनों बाद मारा गया था। शेख को वैश्विक आतंकवादी संगठन से जुड़ा बताया गया और कहा कि वह ‘हमले की साजिश’ कर रहा था। दंपत्ति के साथ यात्रा कर रहे एक सह यात्री तुलसीराम प्रजापति को दिसंबर 2006 में बनासकांठा जिले के छापरी गांव में मुठभेड़ में पुलिस ने मार गिराया था। प्रजापति इस मामले का एकमात्र चश्मदीद था।
वंजारा साल 2007 से लेकर फरवरी 2015 तक न्यायिक हिरासत में रहे। फरवरी 2015 में उन्हें जमानत मिली, लेकिन साल 2013 में उन्होंने सेवा से इस्तीफा दे दिया, जबकि दिनेश साल 2014 में रिहा हुए।

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