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दंगाई भीड़ का हर सदस्य अपराध का दोषी : गुजरात हाई कोर्ट

अदालत ने 2003 के सांप्रदायिक दंगों के एक मामले में सात दोषियों की उम्रकैद की सजा को घटाकर 10 साल के सश्रम कारावास में तब्दील करते हुए यह बात कही थी।
Author अमदाबाद | April 20, 2016 00:06 am
गुजरात हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

गुजरात हाई कोर्ट ने कहा है कि दंगाई भीड़ का हर सदस्य उसके घटकों में से कुछ के किए गए अपराध का दोषी है। अदालत ने यह भी कहा कि सांप्रदायिक दंगों से जुड़े मामलों से बहुत सावधानी से निपटने की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश केएस झावेरी और न्यायमूर्ति जीबी शाह की पीठ ने 11 फरवरी के अपने आदेश में यह बात कही थी। अदालत ने 2003 के सांप्रदायिक दंगों के एक मामले में सात दोषियों की उम्रकैद की सजा को घटाकर 10 साल के सश्रम कारावास में तब्दील करते हुए यह बात कही थी। इस आदेश को हाई कोर्ट की वेबसाइट पर हाल में अपलोड किया गया था।

अदालत ने कहा- कानून पर्याप्त स्पष्ट है कि गैरकानूनी जमावड़े के किसी सदस्य ने जमावड़े के सामान्य उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए कोई अपराध किया है तो गैरकानूनी जमावड़े का हर सदस्य उस अपराध का दोषी होगा। गैरकानूनी जमावड़े के हर सदस्य के विशेष कार्य को साबित करने की जरूरत नहीं है जब आरोपियों के जमावड़े का सदस्य होने की बात साबित हो जाती है। अदालत ने यह आदेश सात लोगों को सुनने के बाद दिया। इन लोगों ने निचली अदालत के 2006 के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें हत्या, डकैती और दंगा के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

सात नवंबर, 2003 को शहर के शाह आलम इलाके में करीब 1500 लोगों की भीड़ जमा हुई थी और उसने मुकेश पांचाल नाम के व्यक्ति की हत्या कर दी थी। पांचाल का शव शहर के चंडोला झील से बरामद किया गया था। उन्होंने अन्य राहगीरों पर भी हमला किया था और उनके साथ लूटपाट की थी। निचली अदालत ने सात लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उसके बाद इन लोगों ने 17 मार्च 2006 के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

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