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सरकार ने दिया भरोसा, देश में सभी हवाईअड्डे सुरक्षित

सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि देश में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आतंकवादियों द्वारा छोटे हवाईअड्डों का इस्तेमाल करने के खतरे के बारे में सरकार चौकस है।
Author नई दिल्ली | March 29, 2017 01:59 am
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रीजीजू

सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि देश में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आतंकवादियों द्वारा छोटे हवाईअड्डों का इस्तेमाल करने के खतरे के बारे में सरकार चौकस है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि देश में सभी हवाईअड्डे सुरक्षित हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रीजीजू ने लोकसभा में हिना गावित के सवाल के जवाब में कहा कि हम विश्वास दिलाना चाहते हैं कि देश में सभी हवाईअड्डे सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि देश में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आतंकवादियों द्वारा छोटे और सुदूरवर्ती हवाईअड्डों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका से वह अवगत हैं और ऐसे सभी महत्त्वपूर्ण ठिकानों का सुरक्षा आॅडिट कराया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 से देश के 59 हवाईअड्डों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ) संभाल रहा है। वहीं जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर और लेह विमानपत्तनों की सुरक्षा सीआरपीएफ के जिम्मे है। उन्होंने बताया कि तीन और हवाईअड्डों के लिए सीआइएसएफ की तैनाती की मंजूरी की गई है।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय गंभीरता से नागर विमानन मंत्रालय के साथ बातचीत कर रहा है ताकि समान ढांचा हो और देश के सभी हवाईअड्डों की सुरक्षा सीआइएसएफ के हवाले हो। अमेरिका की तर्ज पर भारत में भी हवाईअड्डों, रेलवे और सड़क सुरक्षा के लिए एक विशेष परिवहन सुरक्षा प्राधिकार होने संबंधी बीजद सांसद बैजयंत पांडा के प्रश्न पर मंत्री ने कहा कि रेलवे की सुरक्षा आरपीएफ संभालती है वहीं सीआइएसएफ हवाईअड्डों और अन्य ऐसे महत्त्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा के लिए लगातार नई प्रशिक्षण पद्धतियां इजाद कर रहा है।
इसी तरह हवाईअड्डों पर प्रवेश के समय टिकट जांच के लिए सीआइएसएफ की जगह विमानन कंपनियों के स्टाफ को तैनात किये जाने की संभावना के एक प्रश्न पर रिजीजू ने केवल इतना कहा कि सदस्यों के सुझाव आमंत्रित हैं। उन्होंने बताया कि सीआइएसएफ देश में हवाईअड्डों, औद्योगिक इकाइयों, राष्ट्रीय स्मारकों और सरकारी भवनों समेत 329 महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को सुरक्षा कवच मुहैया करा रहा है।

एक अन्य सवाल के जवाब में रिजीजू ने बताया कि शारीरिक जांच में खरा नहीं उतरने के कारण एक आइपीएस अधिकारी को हटा दिया गया, जबकि दो अन्य को खराब प्रदर्शन के कारण नौकरी से बाहर कर दिया गया। उन्होंने बताया कि आइपीएस प्रोबेशन अधिकारियों को हैदराबाद में सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी द्वारा संचालित अनिवार्य शारीरिक फिटनेस परीक्षा को पास करने की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि अधिकतर आइपीएस अधिकारी अनिवार्य शारीरिक फिटनेस परीक्षा में पास हो गए लेकिन वर्ष 2010 से 2015 तक पिछले छह सालों में दो उम्मीदवारों ने पुन: परीक्षा और विशेष परीक्षाओं के जरिए शारीरिक फिटनेस परीक्षा पास की।

लेकिन एक आईपीएस प्रोबेशनर सभी प्रयासों में इस परीक्षा को पास करने में विफल रहे और निर्धारित नियमों के तहत उन्हें आईपीएस से बाहर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि आइपीएस के उच्च प्रदर्शन मानकों को बनाए रखने के लिए अधिकारियों की सावधिक सेवा समीक्षा की जाती है जिसमें सेवा में उनके बने रहने की पात्रता का आकलन किया जाता है।
रिजीजू ने बताया कि इसका मकसद ऐसे अधिकारियों को बाहर करना होता है जो अपनी उपयोगिता खो चुके हैं और उच्च सेवा मानकों को बनाए रखने में अक्षम हैं।
उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय सेवा नियम 1958 के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए जनहित में पांच जनवरी को जारी आदेश में दो आइपीएस अधिकारियों को समय पूर्व सेवानिवृत्ति दे दी गई।

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