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रास में बोले जगत प्रकाश नड्डा- प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण का प्रस्ताव नहीं

नड्डा के मुताबिक इस शोषण को रोकने की दृष्टि से केंद्र सरकार ने देश में सरोगेसी के लिए विदेशियों को प्रतिबंधित कर दिया है।
Author नई दिल्ली | March 1, 2016 23:13 pm
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा (फाइल फोटो)

सरकार का प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण के लिए कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को राज्यसभा को बताया कि मंत्रालय में प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण के लिए कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व नैदानिक तकनीकी (लिंग चयन निषेध) अधिनियम, 1994 के तहत लिंग निर्धारण के लिए गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व नैदानिक तकनीकों के किसी प्रकार के दुरुपयोग को देश भर में प्रतिबंधित कर दिया गया है।

नड्डा ने बताया कि मंत्रालय को गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व नैदानिक तकनीकी (लिंग चयन निषेध) अधिनियम, 1994 और उसके तहत बनाए गए नियमों के विभिन्न प्रावधानों के संबंध में अभ्यावेदन और सुझाव मिलते हैं। इस पर गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व नैदानिक तकनीक संबंधी मामलों पर सर्वोच्च नीति बनाने वाला सुपर एडवाइजरी बोर्ड विचार करता है।

उन्होंने बताया किर सरकार सरोगेसी प्रक्रिया को वैधानिक और पारदर्शी बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। नड्डा ने राज्यसभा को बताया कि किराए की कोख से पैदा हुए बच्चों के माता-पिता संबंधी मामले को कानूनी और पारदर्शी बनाने के लिए सरोगेसी (विनियमन) विधेयक, 2016 के प्रारूप में प्रावधान किए गए हैं।

उन्होंने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि फिलहाल देश में सरोगेसी को विनियमित करने की वैधानिक प्रणाली के अभाव में आर्थिक लाभ की खातिर, कमजोर वर्ग की महिलाओं का व्यावसायिक सरोगेसी के नाम पर शोषण होने की आशंका है। नड्डा के मुताबिक इस शोषण को रोकने की दृष्टि से केंद्र सरकार ने देश में सरोगेसी के लिए विदेशियों को प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही सरोगेट माताओं और सरोगेसी से होने वाले बच्चों के हितों की सुरक्षा के लिए सरोगेसी (विनियमन) विधेयक 2015 नामक एक विस्तृत कानून का मसविदा भी तैयार किया गया है।

सरकार ने कहा है कि देश में टीबी के कारण मृत्यु की दर में कमी आई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने राज्यसभा में बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक क्षय रोग रिपोर्ट 2015 के अनुसार, देश में 2014 में टीबी के कारण होने वाली मौतों का अनुमान 220,000 लगाया गया था जो किसी भी देश की तुलना में सर्वाधिक है।

इस आंकड़े के अधिक होने का कारण भारत में आबादी का अधिक होना है। उन्होंने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि भारत में टीबी के कारण घटना, व्यापकता और मृत्यु दर में विगत 15 साल में निरंतर कमी आई है। इसके साथ ही भारत ने सहस्राब्दी लक्ष्य भी प्राप्त किया है। साल 1990 के स्तरों की तुलना में व्यापकता और मृत्यु दर आधी हो गई है। नड्डा ने बताया कि विश्व भर में अधिक भार वाले देशों टीबी के कारण मृत्यु दर में भारत का स्थान 16वां है

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