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अविरल गंगा ही हो सकती है निर्मल: नीतीश कुमार

गंगा की अविरलता प्रकृति, पर्यावरण व राष्ट्र से जुड़ा मुद्दा है, इसे कायम रखने के लिए कदम उठाना ही पड़ेगा। गाद प्रबंधन के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनानी होगी।
Author नई दिल्ली/ पटना | May 19, 2017 01:04 am
नीतीश कुमार

गंगा की अविरलता प्रकृति, पर्यावरण व राष्ट्र से जुड़ा मुद्दा है, इसे कायम रखने के लिए कदम उठाना ही पड़ेगा। गाद प्रबंधन के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनानी होगी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि गंगा की अविरलता सुनिश्चित किए बिना इसकी निर्मलता संभव नहीं है। वह दिल्ली में बिहार सरकार की ओर से आयोजित कराए गए दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे। विषय था ‘गंगा की अविरलता में बाधक गाद, समस्या व समाधान’। नीतीश ने कहा कि आज गंगा की स्थिति देखकर रोना आता है। नदी के तल में जमा गाद पानी के प्रवाह में अवरोध पैदा कर रही है। गाद से जटिल समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसका प्रतिकूल प्रभाव बिहार के साथ-साथ अन्य राज्यों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि गंगा की अविरलता मेरे लिए कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह सिर्फ बिहार के स्वार्थ से जुड़ा मुद्दा भी नहीं है। यह राष्ट्र से जुड़ा हुआ मुद्दा है। यह प्रकृति व पर्यावरण से जुडा मुद्दा है। गंगा की अविरलता को कायम रखने के लिए कदम उठाना ही पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक पर्यावरणविद व नदी के विशेषज्ञ गाद से उत्पन्न जटिल समस्याओं के समाधान के तरीकों को ढूंढेंगे ताकि नदी की अविरलता सुनिश्चित की जा सके। नीतीश ने कहा कि अपने बचपन के दिनों में वह गंगा नदी से पानी भरकर लाया करते थे। उस समय गंगा जल काफी स्वच्छ था। आज गंगा का प्रवाह प्रदूषण व गाद से पट गया है। फरक्का बैराज बनने के बाद इसके ऊपरी भाग में निरंतर गाद सालों साल जमा होती रही है, जिसके कारण बाढ़ का पानी बक्सर, पटना व भागलपुर तक काफी देर तक रूका रहता है। यह बाढ़ बिहार में जल-जमाव व काफी तबाही मचाता है, जिससे राज्य को हर साल प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष काफी नुकसान होता है। 2016 में बिहार में आई बाढ़ की विभीषिका इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे गरीब राज्य को पांच सालों में केवल कटाव-निरोधक कार्यों पर 1058 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े हैं। केंद्र सरकार को गाद प्रबंधन के लिए एक अच्छी नीति बनानी चाहिए। इस नीति को व्यावहारिक रूप से सभी समस्याओं के अध्ययन और इलाके को जमीनी स्तर पर देख कर तैयार करना अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि चितले समिति ने भी गाद को रास्ता देने की बात कही है।

सांसद व पत्रकार हरिवंश ने कहा कि इतिहास, संस्कृति, दर्शन सब कुछ हमने नदियों से सीखा। उन्होंने विकास के वैकल्पिक मॉडल की जरूरत बताई। जल कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह ने कहा कि अविरलता नदियों का अधिकार है। अब गंगा के मसले पर सार्थक उपाय किए जाएं। कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने स्वागत भाषण दिया। एसएन सुब्बाराव सहित अन्य लोगों ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।

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