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गुड़िया बलात्कार और हत्याकांड: पूर्व आइजी समेत आठ पुलिसवाले गिरफ्तार

जांच रिपोर्ट में पता चला है कि सूरज सिंह को पूछताछ के दौरान मारा गया या उसकी मौत हुई, पर दिखाया यह गया कि उसकी जान हवालात में राजू के साथ हाथापाई में गई थी।
Author शिमला | August 30, 2017 03:23 am
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

कोटखाई में 10वीं की छात्रा गुड़िया से सामूहिक बलात्कार और हत्याकांड में धरे गए एक आरोपी सूरज की हवालात में ‘मौत’ के मामले में सीबीआइ ने पूर्व आइजीपी (साउथ रेंज, ठियोग) जहूर जैदी, डीएसपी मनोज जोशी के अलावा 6 अन्य पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार लोगों को मंगलवार शिमला की एक अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें चार सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। 6 जुलाई को शिमला के कोटखाई में गांव हलेला के जंगलात में गुड़िया की लाश मिली थी। मेडिकल जांच में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की पुष्टि हो गई थी। इस मामले में गिरफ्तार एक अभियुक्त सूरज की हवालात में मौत हो गई थी। पुलिस ने कह ाथा कि दूसरे अभियुक्त राजू ने उसकी हत्या की है। लेकिन मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया था कि उसकी हत्या में पुलिस का हाथ हो सकता है। बहरहाल गिरफ्तार आठों पुलिस कर्मी उसी एसआइटी के सदस्य हैं, जिसे इस कांड पर हुए जबरदस्त विरोध के बाद जांच के लिए गठित किया गया था। जब जैदी की अगुवाई में गठित एसआइटी ने 13 जुलाई को सूरज सिंह समेत 6 आरोपियों की धरपकड़ की थी। पर उसके 5 दिन बाद ही नेपाल वासी सूरज की 18 जुलाई को कोटखाई थाने की हवालात में हत्या कर दी गई थी। प्रदेश पुलिस ने दावा किया था कि सूरज को कथित रूप से रजिंदर सिंह उर्फ राजू ने ही मारा था, जो गुड़िया कांड में मुख्य आरोपी है।

मंगलवार को यहां इन पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए सीबीआइ के सूत्रों ने बताया कि यह कार्रवाई हवालात में सूरज की हत्या मामले में हुई है। इस मामले में 19 जुलाई, 2017 को थाना कोटखाई में आइपीसी की धारा 302 के तहत अलहदा एफआइआर (नंबर 101/2017) दर्ज की गई थी। धरे गए पुलिसकर्मियों में कोटखाई के थाना प्रभारी रजिंदर सिंह, एएसआइ दीप चंद शर्मा भी हैं, जो जांच अधिकारी थे। पुलिस कांस्टेबल मोहन लाल, सूरत सिंह, रफीक अली और रणजीत सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है।
जब प्रदेश सरकार ने यह मामला सीबीआइ को हस्तांतरित किया था तो जैदी को आइजीपी पद से हटाकर शिमला के एसपी डीडब्लू नेगी के साथ पुलिस मुख्यालय में स्थानांतरित कर दिया था। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर गठित एसआइटी के प्रमुख डीआइजी रैंक के एक अधिकारी की अगुवाई में सीबीआइ ने संदिग्ध आरोपी सूरज सिंह की कोटखाई थाने के हवालात में हत्या मामले में साजिश का खुलासा किया था।

सूरज के शव की जांच सीबीआइ और एम्स दिल्ली से आए फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने नए सिरे से की थी। यह पहले की गई फॉरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मेल नहीं खाती थी। सूरज की हत्या के बाद गुस्साई भीड़ के हाथों फूंके गए थाना की जांच की गई थी और रात में वहां तैनात संतरी दिनेश का भी बयान लिया गया था। सूरज सिंह की पत्नी ममता, जो फिलहाल शिमला के समीप ही मशोबरा स्थित नारी निकेतन में रह रही है, ने रजिंदर उर्फ राजू को पाक-साफ करार दिया और कहा कि वह तो उसके पति सूरज को भाई की तरह मानता था और वह उसकी हत्या नहीं कर सकता। ममता ने पुलिस को ही सूरज की हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया था।जांच रिपोर्ट में पता चला है कि सूरज सिंह को पूछताछ के दौरान मारा गया या उसकी मौत हुई, पर दिखाया यह गया कि उसकी जान हवालात में राजू के साथ हाथापाई में गई थी। हाई कोर्ट की निगरानी में की जा रही जांच की स्टेटस रिपोर्ट आगामी 6 सितंबर को अदालत में रखी जानी है।

बीती 13 जुलाई को गुड़िया कांड में धरे गए 6 आरोपियों में आशीष चौहान (29), रजिंदर सिंह उर्फ राजू (32), सुभाष सिंह बिष्ट (42), दीपक (38) सूरज सिंह (29) और लोक जन (19) थे। गुड़िया कांड में एफआइआर कोटखाई थाने में आइपीसी की धारा 302, 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा-4 के तहत दर्ज की गई थी। इसमें सीबीआइ जांच के आदेश दरअसल, उस जनहित याचिका पर ही प्रदेश हाइकोर्ट के विशेष खंडपीठ ने दिए थे, जिसमें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप शर्मा शामिल थे। इसी याचिका पर अदालत ने मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर संज्ञान लिया था। प्रदेश के महाधिवक्ता श्रवण डोगरा ने बीती 19 जुलाई को अदालत में इस मामले की जांच-पड़ताल सीबीआइ को सौंप दिए जाने को कहा था। गौरतलब है कि गुड़िया कांड की पिछली सुनवाई पर हाई कोर्ट ने इसमें कोई बड़ी पहल नहीं कर पाने और किसी की धरपकड़ नहीं कर पाने के लिए सीबीआइ को जमकर फटकार लगाई थी।

 

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