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राष्ट्रपति शासन के खिलाफ पूर्व CM नबाम तुकी की याचिका

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की है।
Author नई दिल्ली | January 29, 2016 03:40 am
अरुणाचल प्रदेश के पूर्व सीएम नबाम तुकी

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की है। कांग्रेस नेता द्वारा दायर याचिका पर न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ के नेतृत्व वाली पांच जजों के संवैधानिक पीठ द्वारा सोमवार को सुनवाई किए जाने की संभावना है। संभावना है कि राज्य विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक राजेश ताचो जैसे अन्य लोगों की याचिकाओं के साथ ही तुकी की ताजा याचिका पर सुनवाई होगी।

तुकी ने ताजा याचिका केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के यह कहे जाने के बाद दायर की कि पूर्व की याचिकाओं में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को चुनौती नहीं दी गई है, जो याचिकाओं के दायर होने के बाद लगाया गया था। बुधवार को अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने का मुद्दा शीर्ष अदालत पहुंच गया था। जिसने यह कहते हुए राज्य में केंद्रीय शासन लगाए जाने की सिफारिश से संबंधित राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा की रिपोर्ट मांगी कि यह काफी गंभीर मामला है।

पीठ ने अटॉर्नी जनरल से तब तकनीकी आपत्तियां नहीं उठाने को कहा जब वे अपने इस तर्क पर कायम रहे कि नियम नियम हैं और वे सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। इसने राज्यपाल और केंद्रीय गृह मंत्रालय से शुक्रवार तक जवाब दाखिल करने की बात कहते हुए मामला एक फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया था और तब तक के लिए याचिकाकर्ताओं को उनके आग्रह में संशोधन करने की अनुमति दे दी गई है।

पीठ ने अपने अध्ययन के लिए राष्ट्रपति शासन लगाए जाने से संबंधित रिपोर्ट और सिफारिश को बंद लिफाफे में रखे जाने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा- जब तक हमें राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने संबंधी आधार नहीं मिलता, हम आगे नहीं बढ़ सकते। इस पीठ में न्यायमूर्ति दीपक मिश्र, न्यायमूर्ति एमबी लोकुर, न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति एनवी रमन भी शामिल हैं। पीठ का यह भी मत था कि जब तक पक्ष राष्ट्रपति शासन लगाए जाने संबंधी आधार नहीं देखते, तब तक कोई अंतरिम आदेश हासिल नहीं किया जा सकता।

पीठ ने कहा था- हम सभी पक्षों को सुने बिना आदेश जारी नहीं करेंगे। यह एक संवेदनशील मुद्दा है। फली एस नरीमन, कपिल सिब्बल, राजीव धवन और विवेक तनखा सहित कई वरिष्ठ वकीलों ने राज्यपाल की इस अपील का विरोध किया कि उनकी रिपोर्ट और सिफारिश की गोपनीयता बनाए रखी जाए। साथ ही कहा कि पांच जजों से अधिक की वृहद पीठ इस पहलू पर पहले ही अपनी बात रख चुकी है।

पांच जजों का पीठ राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों के दायरे पर संवैधानिक प्रावधानों का निरीक्षण कर रहा है। नबाम रेबिया की ओर से पूर्व में दायर याचिका में सरकार की सहायता और सलाह के बिना विधानसभा सत्र आहूत करने संबंधी राज्यपाल की शक्ति सहित विभिन्न कानूनी सवाल उठाए गए हैं। बागी कांग्रेस विधायकों और भाजपा विधायकों ने 16 दिसंबर को ईटानगर के एक सामुदायिक हॉल में एक विधानसभा सत्र आहूत कर नबाम रेबिया को अध्यक्ष पद से कथित तौर पर हटा दिया था।

यह भी आरोप लगाया गया कि राज्यपाल ने मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद की मदद व सलाह के बिना ही विधानसभा का सत्र 14 जनवरी की बजाय 16 दिसंबर को ही बुला लिया था। अरुणाचल प्रदेश की 60 सदस्यीय विधानसभा में 47 विधायक रखने वाली कांग्रेस को तब जबर्दस्त झटका लगा था जब इनमें से 21 विधायकों ने बगावत कर दी। भाजपा के 11 विधायकों ने नबाम तुकी सरकार को उखाड़ने के प्रयास के तहत कांग्रेस के बागी विधायकों का समर्थन किया। बाद में कांग्रेस के 14 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया।
राज्यपाल ने तब 16 दिसंबर को विधानसभा का सत्र बुलाया। जिसमें उपाध्यक्ष ने कांग्रेस के 14 बागी विधायकों की अयोग्यता खत्म कर दी और रेबिया को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। सत्र का आयोजन ईटानगर में एक सामुदायिक हॉल में हुआ।

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