December 11, 2016

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पैरों में पांच किलो के जूते पहनकर चलती है 2.7 टन वजनी ये हथिनी

हर रोज सुबह पी रामचंद्रन हथनी लक्ष्मी के पैरों में लगे घावों को धोते हैं और उनपर मरहम लगाते हैं। उसके बाद जख्मों को पट्टी से कवर करते हैं।

हथिनी लक्ष्मी के पैरों में घाव है, जिसकी वजह से उसके लिए विशेष जूते बनाए गए हैं।

आपने कभी हाथी को जूते पहनते हुए देखा है? लक्ष्मी नाम की एक हथिनी के पैरों में चोट लगने की वजह से उसके लिए विशेष तौर पर जूते बनाए गए हैं। इन जूतों की मदद से 57 साल की 2.7 टन वजनी हथिनी को फिर से चलने फिरने में सुविधा होगी। पैरों में लगे कई सारे जख्म के बाद इस हथिनी को पलानी से इस साल जून में राजापलायम के एनिमल केयर ट्रस्ट लाया गया था। हथिनी लक्ष्मी का इलाज कर रहे पशुचिकित्सक पी रामचंद्रन बताते हैं कि पैरों में चोट की वजह से लक्ष्मी को 30 मीटर चलने में 15 मिनट लगता था। जब लक्ष्मी को राजापलायम सेंटर लाया गया था तब उसका वजन 2.4 टन था, लेकिन 5 महीने की ट्रीटमेंट के बाद उसका वजन 2.7 टन हो गया है।

हर रोज सुबह पी रामचंद्रन हथिनी लक्ष्मी के पैरों में लगे घावों को धोते हैं और उनपर मरहम लगाते हैं। उसके बाद जख्मों को पट्टी से कवर करते हैं। ये सब करने के बाद लक्ष्मी के पैरों में जूते पहनाए जाते हैं। हर आठ घंटे के बाद लक्ष्मी के पैरों से जूते निकाल लिए जाते हैं। जूते पहनाने का मकसद ये होता है कि हथिनी लक्ष्मी के जख्मों पर लगी दवा देर तक टिकी रहे, जिससे घाव जल्दी भर सके। यह इलाज पिछले एक सालों से चल रहा है और इसकी वजह से अब लक्ष्मी हथिनी आराम से चलने लगी है।

हथिनी के लिए जूते डिजाइन करने का आइडिया एनिमल केयर ट्रस्ट के फाउंडर एसडी सेल्वरम राजा का था और इसे डिजाइन करने में एक महीने का समय लगा। लक्ष्मी के लिए तीन जोड़ी जूते डिजाइन किए गए थे जिसमें से एक को चुना गया। लक्ष्मी के लिए तैयार किए गए जूतों के तलवे हार्ड रबर से बनाए गए हैं। जूते के एक पेयर का वजन 5 किलो है। इसमें नॉयलॉन और कैनवास का भी इस्तेमाल किया गया है।

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First Published on November 12, 2016 4:52 pm

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