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नरेंद्र मोदी सरकार को धमकी देने के बाद किसानों ने पिया मूत्र, दी मल खाने की चेतावनी

पिछले 38 दिनों से ये किसान अलग तरीकों से आंदोलन कर सुर्खियां बटोर रहे हैं।
किसान केंद्र से अपने लोन की माफी की मांग कर रहे हैं।

सरकार के खिलाफ अपना ऋण माफ कराने के लिए लंबे समय से दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर आंदोलन कर रहे तमिलनाडु के किसानों ने आज (22 अप्रैल) अपना मूत्र पिया। इससे पहले किसानों ने मोदी सरकार को धमकी देते हुए कहा था कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वह शनिवार को अपना मूत्र पीएंगे और अगर फिर भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो रविवार को अपना मल खाएंगे।

एचटी की खबर के मुताबिक पिछले 38 दिनों से ये किसान अलग तरीकों से आंदोलन कर सुर्खियां बटोर रहे हैं। ये लोग अपने साथ मानव कंकाल भी लाए थे, जिसे लेकर इन लोगों का दावा था कि ये उन किसानों के हैं, जिन्होंने आत्महत्या की है। इन लोगों ने नग्न होकर रायसीना हिल्स पर प्रदर्शन करने के अलावा चूहे और सांप भी खाए थे। इसके अलावा नकली अंत्येष्टि भी की। अब ये लोग जन्तर-मन्तर पर मूत्र जमा करने के लिए एक प्लास्टिक की बोतल लिए सरकार के जवाब के इंतजार में बैठे हैं। आंदोलन की अगुआई कर रही नेशनल साउथ-इंडियन रिवर्स लिंकिंग फार्मर्स असोसिएशन के स्टेट प्रेजिडेंट पी.अयाकन्नू ने कहा था कि हमें पीने के लिए तमिलनाडु में पानी नहीं मिल रहा है और पीएम नरेंद्र मोदी इसकी अनदेखी कर रहे हैं, तो हमें अब अपने मूत्र से ही प्यास बुझानी पड़ेगी।

आपको बता दें कि 20 अप्रैल को किसानों ने एक शख्स को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुखौटा पहनाया था और फिर वहां बैठे सारे किसानों पर उससे कोड़े लगवाए थे। कोड़े मार रहे शख्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुखौटा पहनने के अलावा उनकी तरह के कपड़े भी पहन रखे थे। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने एचटी से बात करते हुए कहा था, ‘हम लोगों को नजरअंदाज करके मोदी ने बता दिया कि वह हम लोगों को दिल्ली से भगाना चाहते हैं, कभी-कभी तो हमें लगता है कि इससे अच्छा तो हम लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाए।’

यह है मामला: तमिलनाडु के किसान 38 दिनों से दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। ये किसान केंद्र से अपने लोन की माफी की मांग कर रहे हैं। उन किसानों का कहना है कि उनकी फसल कई बार आए सूखे और चक्रवात में बर्बाद हो चुकी है। किसानों ने उन लोगों को मिलने वाले राहत पैकेज पर भी पुनर्विचार करने के लिए कहा है। किसानों की यह भी मांग है कि उनको अगली साल के लिए बीज खरीदने दिए जाएं और हुए नुकसान की भरपाई की जाए।

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