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दसवीं बोर्ड में हुई फेल लेकिन 12वीं में स्कूल ने किया प्रमोट, मामला पहुंचा हाईकोर्ट

कोर्ट ने कहा कि जब तक कोई 10वीं की परीक्षा पास नहीं करता उसे 11वीं में दाखिला नहीं दिया जा सकता और न ही उसे 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है।
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

गुजरात में एक स्कूल ने 10वीं बोर्ड में फेल हुई लड़की का 11वीं क्लास में एडमिशन दे दिया और अब जब लड़की ने 11वीं की परीक्षा पास कर ली है, 12वीं में प्रमोट हो गई है तब स्कूल ने उसके नामांकन को ही रद्द कर दिया है। दरअसल, जान्वी ठांकी नाम की 18 वर्षीय छात्रा दो साल पहले 10वीं बोर्ड में सभी विषयों में फेल हो चुकी थी लेकिन जब उसने अपने सभी विषयों के इंटरनल मार्क्स को जोड़ा तो उसका अंक 35 फीसदी तक पहुंच गया। इसी आधार पर स्कूल ने उसे 11वीं में एडमिशन दे दिया। उसने मेहनत की और 11वीं की परीक्षा पास कर ली, स्कूल ने उसे 12वीं में प्रमोट कर दिया लेकिन जब 12वीं के बोर्ड का एग्जाम फॉर्म भरने का वक्त आया तो उसे मना कर दिया गया।

जामनगर जिले के खंभालिया के गोकानी स्कूल फॉर आर्ट्स एंड कॉमर्स में पढ़ रही जान्वी ने मार्च 2015 में गुजरात सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड से 10वीं बोर्ड की परीक्षा पास नहीं की थी। लेकिन इंटरनल मार्क्स जोड़ने के पर उसे 35 फीसदी अंक हासिल हो रहे थे। इसी आधार पर उसे 11वीं में दाखिला भी मिला। लेकिन अब 12वीं बोर्ड के एग्जाम फॉर्म भरते समय स्कूल मैनेजमेंट को अपनी गलती का अहसास हुआ। इसके बाद स्कूल ने जान्वी से 10वीं, 11वीं का मार्कशीट मंगवाया ताकि उसा वेरिफिकेशन किया जा सके। जब स्कूल ने पाया कि जान्वी 10वीं फेल है तो उसकी 11वीं का मार्कशीट स्कूल ने जब्त कर लिया।

स्कूल के फैसले के विरोध में जान्वी ने गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसके वकील एम आई मंसूरी ने अदालत से अनुरोध किया कि 10वीं बोर्ड की परीक्षा के अंकों की गणना में उसने गलती की है लेकिन 11वीं की परीक्षा उसने अच्छे अंकों से पास की है। इसलिए जान्वी को इस साल 2017 में 12वीं बोर्ड की परीक्षा में बैठने का आदेश दिया जाय। वकील ने स्कूल और गुजरात सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड को भी इस बावत दिशा-निर्देश देने की अपील की। सुनवाई के दौरान स्कूल प्रबंधन ने भी अपनी गलती मानी।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद गुजरात हाईकोर्ट ने जान्वी की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि दो साल पहले हुई एक गलती की वजह से व्यवस्था को बदला नहीं जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि जब तक कोई 10वीं की परीक्षा पास नहीं करता उसे 11वीं में दाखिला नहीं दिया जा सकता और न ही उसे 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है।

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