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हाशिए पर भाजपा के बुजुर्ग नेता, अपने ही शहर में जोशी को नहीं दिया मंच

पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को भले ही नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने मंच पर साथ बिठा कर अपनी वैचारिक विवशता का परिचय दिया हो, लेकिन यह विवशता सिर्फ आडवाणी जी तक ही सीमित होकर रह गई।
Author इलाहाबाद | June 13, 2016 05:18 am
भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी

भारतीय जनता पार्टी में बुजुर्ग और अनुभवी नेता हाशिए पर हैं। इस बात की झलक रविवार को इलाहाबाद में शुरू हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी देखने को मिली। केपी कालेज के मैदान में आयोजित बैठक में मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को तो स्थान दिया गया, लेकिन वरिष्ठ नेता डा. मुरली मनोहर जोशी मंच से नीचे ही बैठे। डा. जोशी का साथ देने के लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह और कबीना मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे।

इलाहाबाद में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पार्टी के तजुर्बेकार नेताओं को हाशिए पर रखा गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को भले ही नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने मंच पर साथ बिठा कर अपनी वैचारिक विवशता का परिचय दिया हो, लेकिन यह विवशता सिर्फ आडवाणी जी तक ही सीमित होकर रह गई। जिस इलाहाबाद शहर से डा. मुरली मनोहर जोशी तीन बार सांसद रहे, उसी शहर में पार्टी के इस तजुर्बेकार नेता को मंच पर स्थान नहीं मिला। उत्तर प्रदेश में किसी ब्राह्मण चेहरे को आधार बना कर विधानसभा चुनाव में उतरने की रणनीति बनाने में जुटी भारतीय जनता पार्टी और उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने आज कार्यकारिणी में जिस तरह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में ब्राह्मणों के बीच सम्मान रखने वाले डा. मुरली मनोहर जोशी को हाशिए पर रखा, उससे पार्टी कई सवालों की जद में आ गई है। राजनीति में गहरी रुचि रखने वाले इलाहाबाद के लोग डा. जोशी को कार्यकारिणी में मंच न दिए जाने से बेहद आहत दिखे।

डा. मुरली मनोहर जोशी के अलावा राज नाथ सिंह को भी मंच पर स्थान न देकर उत्तर प्रदेश के क्षत्रियों को भी अमित शाह ने नाराज किया है। इतना ही नहीं अमित शाह ने राजनाथ सिंह को मुख्यमंत्री के तौर पर उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान पेश करने की तमाम चर्चाओं पर भी ऐसा कर विराम लगा दिया। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों पर डोरे डालने की कोशिश में लगे अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रदेश के 14 प्रतिशत ब्राह्मण मतदाताओं की ताकत का अंदाजा बखूबी है। लेकिन उन्होंने पार्टी के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को हटाकर प्रदेश के ब्राह्मणों को नाराज किया है।

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से अधिकांश पर ब्राह्मण मतदाताओं का वर्चस्व कायम है। समाजवादी पार्टी के राष्टÑीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने ब्राह्मणों के इसी वर्चस्व को भांप कर कई बार कहा था कि वे किसी भी राजनीतिक दल की फिजा बनाने में अहम किरदार अदा करते हैं। वर्ष 2007 में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा के चुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती को मिला पूर्ण बहुमत भी उसी सोशल इंजीनियरिंग का नतीजा माना जाता है जिसके तहत पहली बार बसपा ने ब्राह्मणों को अपने साथ जोड़ा था और नया नारा दिया था कि ब्राह्मण शंख बजायेगा, हाथी बढ़ता जाएगा।

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  1. Hpg Hdl
    Jun 13, 2016 at 10:34 am
    ये कोई अनपढ़ कांग्रेसी पत्रकार है जो लिखा है ये लेख ! ये अगुस्ता रिपोर्टर to nahi है
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    Reply
    1. P
      prashant
      Jun 13, 2016 at 4:50 am
      मूर्खता पूर्ण लेखन । राष्ट्रिय कार्यकारिणी के मंच पर हमेशा केवल राष्ट्रिय अध्यक्ष , लोकसभा और राज्यसभा के नेता बैठते आये हैं । आडवाणी जी को शुरू से उनके इन पदों और रहने या न रहने पर भी जग़ह दी जाती रही हे । उल जलूल तरीके से सोचना शायद अब जनसत्ता का काम बन गया है ।
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      Reply
      1. Ravindra Yadav
        Jun 13, 2016 at 7:41 am
        राजनीती में स्वम को आगे बढ़ाने से ही वोट मिलते है
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        Reply
        1. K
          Kapil Tyagi
          Jun 13, 2016 at 3:51 pm
          कुछ साल बाद मोदी जी और अमित शाह का भी यही हाल होने वाला है | जैसी करनी वैसी भरनी |
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          Reply
        सबरंग