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विभाग बदले जाने से कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के समर्थकों का उत्साह घटा

मोदी सरकार में स्मृति ईरानी के घटे रुतबे ने उनकी अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ जारी लड़ाई की धार कुंद की है। भारी भरकम मानव संसाधन मंत्रालय से महत्वहीन कपड़ा मंत्रालय में स्मृति को भेजे जाने से उनके समथर्कों का उत्साह क्षीण हुआ है।
Author सुलतानपुर | July 7, 2016 03:05 am
(फाइल फोटो)

मोदी सरकार में स्मृति ईरानी के घटे रुतबे ने उनकी अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ जारी लड़ाई की धार कुंद की है। भारी भरकम मानव संसाधन मंत्रालय से महत्वहीन कपड़ा मंत्रालय में स्मृति को भेजे जाने से उनके समथर्कों का उत्साह क्षीण हुआ है। वर्ष 2014 के आम चुनान में राहुल के मुकाबले अमेठी में हारने के बाद भी स्मृति ईरानी अमेठी में काफी सक्रिय हैं। अब तक उन्हें प्रधानमंत्री के काफी नजदीक समझ जाता रहा है। ये माना जाता है कि स्मृति के अमेठी के नियमित दौरे प्रधानमंत्री की सहमति से होते हैं। स्मृति के अमेठी दौरों में भारी भीड़ उमड़ती है। हालांकि वर्ष 2019 का आम चुनाव अभी दूर है लेकिन केंद्र की प्रभावशाली मंत्री के रूप में स्मृति की गांधी परिवार के गढ़ अमेठी में सक्रियता राहुल गांधी के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। जल्दी ही होने वाले विधानसभा के चुनाव में भी इसके असर पर लोगों की निगाहें हैं। विधानसभा चुनावों में अब तक कांग्रेस को बसपा और सपा की चुनौती से गांधी परिवार के गढ़ को बचाना होता था। केंद्र में मोदी सरकार बनने और लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी स्मृति की अमेठी में जबरदस्त मेहनत से भाजपा भी इस इलाके में बड़ी ताकत बन गई है।

स्मृति को वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में यूपी में पार्टी के चेहरे के रूप में पेश करने की अटकलों ने अमेठी में भाजपा कार्यकर्ताओं को काफी उत्साहित कर रखा था। लेकिन हाल के राजनीतिक घटनाक्रम ने उसमें झटका दिया है। इलाहाबाद में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद से स्मृति को यूपी में पार्टी के चेहरे के रूप में पेश करने की चर्चाएं मंद हुई हैं। इधर मंत्रिमंडल में विस्तार के मौके पर उन्हें महत्वहीन मंत्रालय में भेजे जाने के बाद रही सही कसर और पूरी हो गई है। हाल में पार्टी ने अमेठी के अध्यक्ष पद पर स्मृति के भरोसेमंद उमा शंकर पांडे को मनोनीत किया था। विधानसभा की पांचों सीटों के दावेदार भी स्मृति ईरानी का भरोसा और समर्थन पाने की कोशिशों में जुटे थे। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह उन्हें पहले ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर कर चुके थे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी से नजदीकी के चलते टिकट के दावेदार मान कर चल रहे थे कि अमेठी के विधानसभा टिकटों में स्मृति की सिफारिश निर्णायक होगी। मंत्रिमंडल में उनका कद घटने से कार्यकर्ताओं और समथर्कों में संदेश गया है कि मोदी दरबार में भी उनकी अहमियत कम हो गई है।
उधर उन पर लगातार हमलावर राहुल समथर्कों को कहने का मौका मिला है कि स्मृति अमेठी की जनता का बाद में पहले अपनी पार्टी और अपने नेतृत्व का पूरा भरोसा हासिल करें।

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