ताज़ा खबर
 

नई दिल्लीः अब बिना बताए बिजली काटी तो बिजली कंपनियों को देना होगा हर्जाना

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘इससे बिजली वितरण कंपनियों की जिम्मेदारी तय होगी। छह महीने बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी और यदि वे अपना इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं सुधारते हैं तो हर्जाने में लगने की समयावधि घटाई जा सकती है’।
Author नई दिल्ली | June 1, 2016 01:49 am
प्रतीकात्मक फोटो।

दिल्ली के बिजली उपभोक्ता अब बिना पूर्व सूचना के किए गए पावर कट के लिए बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) द्वारा हर्जाने के हकदार होंगे। दिल्ली सरकार के निर्देशानुसार दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने सोमवार को अपने नियमों में संशोधन लाया जो तत्काल प्रभाव से लागू है। इसके अनुसार यदि डिस्कॉम तय समय-सीमा में खराबी दुरुस्त नहीं कर पाती है या लोडशेडिंग की अवधि दो घंटे से ज्यादा होती है तो उन्हें हर्जाना देना होगा।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘इससे बिजली वितरण कंपनियों की जिम्मेदारी तय होगी। छह महीने बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी और यदि वे अपना इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं सुधारते हैं तो हर्जाने में लगने की समयावधि घटाई जा सकती है’। डीईआरसी द्वारा सप्लाई कोड में संशोधन के बाद उपभोक्ता किसी खराबी के कारण बिजली गुल होने की स्थिति में तय समय-सीमा के अंदर बहाल नहीं किए जाने पर प्रति घंटे 50 से 100 रुपए तक हर्जाने के हकदार होंगे। हर्जाना बिजली बिल में अधिकतम 90 दिनों में समायोजित करना होगा और ऐसा न किए जाने की शिकायत होने पर हर्जाना पांच हजार रुपए या पांच गुना हो सकता है।

जुर्माने की राशि कितनी होगी और बिजली गुल होने के कितने समय बाद लगाया जाएगा, यह फॉल्ट की स्थिति पर निर्भर होगा। वितरण लाइन में खराबी (100 से ज्यादा उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हों) होने पर पर दो घंटे के अंदर अस्थायी आपूर्ति बहाल करनी है और ऐसा नहीं करने पर पहले दो घंटे के लिए 50 रुपए प्रति घंटे प्रति उपभोक्ता के हिसाब से हर्जाना देना होगा और दो घंटे के बाद यह 100 रुपए प्रति घंटा हो जाएगा। गड़बड़ी को बारह घंटे के अंदर दुरूस्त करना होगा।

फ्यूज उड़ने या एमसीबी ट्रिप और सर्विस लाइन टूटने की स्थिति में दुरुस्त करने का समय तीन घंटा दिया गया है और इसमें विफल रहने पर हरेक उपभोक्ता को प्रति घंटा 100 रुपए का हर्जाना मिलेगा। इसी तरह से वितरण ट्रांसफोर्मर फेल होने या जलने (100 से ज्यादा उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हों) की स्थिति में दो घंटे के अंदर अस्थायी आपूर्ति बहाल करनी होगी। हर्जाना पहले दो घंटे के लिए 50 रुपए प्रति घंटा और उसके बाद 100 रुपए प्रति घंटा होगा। ट्रांसफार्मर बदलने की समय-सीमा 48 घंटे दी गई है। इसी तरह बिजली आपूर्ति इंफ्रास्ट्रक्चर में अन्य खराबियों के लिए वितरण कंपनियों की उपभोक्ताओं के प्रति जवाबदेही तय की गई है।

इसके साथ ही ओवरलोड कम करने के लिए किसी खास एरिया में लोड शेडिंग की अवधि(100 से ज्यादा उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हों) 2 घंटे से ज्यादा नहीं हो सकती, ऐसा नहीं करने पर प्रति उपभोक्ता प्रति घंटे की दर से पहले दो घंटे 50 रुपए और उसके बाद 100 रुपए का हर्जाना देना होगा। सरकार ने अपने बयान में कहा है कि यह फैसला उपभोक्ताओं को बिना पूर्व सूचना के बिजली गुल होने से राहत पहुंचाने के लिए है और उम्मीद है कि इससे डिस्कॉम्स की बिजली आपूर्ति क्षमता और गुणवत्ता में सुधार होगा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.