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केंद्र सरकार को नीतीश कुमार का पत्र, लिखा- नालंदा यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता से छेड़छाड़ न करें

मुख्यमंत्री ने 5 दिसंबर के अपने पत्र में केन्द्र सरकार से अनुरोध किया है कि नालंदा यूनिवर्सिटी की मूल भावना के साथ छेड़छाड़ न हीं किया जाना चाहिए।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (बीचे में) साथ में बैठे हैं उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (बाएं)। (फोटो- PTI)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नालंदा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के चांसलर जॉर्ज यिओ के इस्तीफे पर दुख और नाराजगी जताते हुए केन्द्र सरकार को विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बरकरार रखने के लिए पत्र लिखा है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को लिखे पत्र में नीतीश कुमार ने विश्वविद्यालय के रोजाना काम काज में मंत्रालय के दखल का उल्लेख किया है। मुख्यमंत्री ने 5 दिसंबर के अपने पत्र में केन्द्र सरकार से अनुरोध किया है कि नालंदा यूनिवर्सिटी की मूल भावना के साथ छेड़छाड़ न हीं किया जाना चाहिए।

दो पन्नों के पत्र में नीतीश कुमार ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा है कि यूनिवर्सिटी के चांसलर ने आरोप लगाया है कि गवर्निंग बोर्ड को भंग करने और नए गवर्निंग बोर्ड को बनाने में उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया, जबकि नियमानुकूल ऐसा किया जाना चाहिए था।

गौरतलब है कि यह आरोप लगाते हुए यूनिवर्सिटी के चांसलर जॉर्ज यिओ ने इस्‍तीफा दे दिया था। यिओ ने 25 नवंबर को अपने इस्‍तीफे की जानकारी दी। उन्‍होंने नई गवर्निंग बोर्ड के गठन और इस बारे में उनसे ना तो उनसे सलाह ली गई और ना उन्‍हें इस प्रक्रिया में शामिल किए जाने को इस्‍तीफे का कारण बताया था। यिओ के बयान के अनुसार, “जब मुझे जुलाई 2015 में चांसलर नियुक्‍त किया गया था तब मुझे कहा गया था कि एक संशोधित एक्‍ट के तहत गवर्निंग बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस पर विदेश मंत्रालय की ओर से मुझ से राय भी मांगी गई थी। संशोधित एक्‍ट आने पर वर्तमान प्रक्रिया की कई कमियों को दूर किया जा सकता था।” उन्‍होंने नए गवर्निंग बोर्ड को उनके व बाकी सदस्‍यों के लिए एक ‘सरप्राइज’ के रूप में बताया।”

इससे पहले नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को नालंदा यूनिवर्सिटी के बोर्ड में जगह नहीं दी गई थी। वह यूनिवर्सिटी के चांसलर, गवर्निंग बोर्ड के मेंबर रह चुके हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में सेन ने मोदी सरकार के खिलाफ काफी कुछ कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना के बाद फरवरी 2015 में चांसलर के पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद वह गवर्निंग बॉडी के सदस्य रहे। उन्हें 2007 में मनमोहन सरकार द्वारा नालंदा यूनिवर्सिटी का पुनः प्रवर्तन करने के बाद नालंदा मेंटर ग्रुप (NMG) का सदस्य बनाया गया था। सेन के अलावा हॉवर्ड के पूर्व प्रोफेसर और टीएमसी सांसद सुगता बोस और यूके के अर्थशास्त्री मेघनाथ देसाई को भी नए बोर्ड में जगह नहीं मिली है।

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