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गजेंद्र ख़ुदकुशी जांच: दिल्ली पुलिस और ज़िला मजिस्ट्रेट मे तकरार

राजस्थान के किसान गजेंद्र सिंह की खुदकुशी के दो दिन बाद भी जांच में दिल्ली पुलिस और जिला मजिस्ट्रेट के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को निजी टीवी चैनलों से फुटेज मंगाई...
Author April 25, 2015 10:13 am
सूत्रों के मुताबिक यह विवाद इसलिए ज्यादा चर्चा में है कि दिल्ली पुलिस की आपत्तियों को दरकिनार कर नई दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट ने खुदकुशी मामले की जांच शुरू कर दी। (फ़ोटो-पीटीआई)

राजस्थान के किसान गजेंद्र सिंह की खुदकुशी के दो दिन बाद भी जांच में दिल्ली पुलिस और जिला मजिस्ट्रेट के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को निजी टीवी चैनलों से फुटेज मंगाई तो शुक्रवार को जिला मजिस्ट्रेट ने भी चैनलों से फुटेज और आम लोगों से घटना से संबंधित साक्ष्य और सूचनाएं साझा करने की अपील की।

सूत्रों का कहना है कि जंतर-मंतर पर बुधवार को आप की रैली में किसान की आत्महत्या के संबंध में जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) की ओर से तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को इससे संबंधित विस्तृत जानकारी उनके साथ साझा नहीं की। पुलिस ने कानूनी पहलुओं का हवाला देते हुए डीएम के आग्रह को ठुकरा दिया।

दिल्ली सरकार ने बुधवार को राजस्थान के किसान गजेंद्र सिंह की कथित आत्महत्या मामले की जांच डीएम से कराने की घोषणा की थी। डीएम ने पुलिस को इस मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी पेश करने के लिए शुक्रवार दिन में 11 बजे तक का समय दिया था।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने बताया कि पुलिस को सीआरपीसी कानून सहित दिल्ली पुलिस कानून के तहत मामले की जांच का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को भी कोई शंका है तो हम कानूनी राय लेंगे। उन्होंने इस गतिरोध पर बयान देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि सरकार और पुलिस के बीच संवाद उनका विशेषाधिकार है।

पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि राजधानी में हर साल आत्महत्या सहित अप्राकृतिक मौत के करीब सात हजार मामले दर्ज होते हैं, जिनकी जांच पुलिस ही करती है। दिल्ली सरकार ने कभी भी इन मामलों में रुचि नहीं दिखाई। कुछ खास और संदिग्ध मामलों की जांच एसडीएम को सौंपी जाती है। आखिर वे इस मामले में मजिस्ट्रेटी जांच क्यों चाहते हैं जबकि पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक कानूनन दहेज से संबंधित मामलों में ही मजिस्ट्रेट स्तर की जांच होती है। लेकिन यदि किसी मामले में यदि पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर लेती है तब इसकी तहकीकात पुलिस जांच का हिस्सा हो जाती है, जो इस मामले में भी हुआ है। सुनंदा पुष्कर मामला इसका उदाहरण है।

पुलिस ने दलील दी कि सीआरपीसी और दिल्ली पुलिस कानून के तहत पुलिस आयुक्त को डीएम के समान ही अधिकार हैं। सूत्रों के मुताबिक यदि मामले के संबंध में सूचनाएं साझा करने से इनकार करने को लेकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की जाती है तो वे अदालत में इस बात का जवाब देने के लिए तैयार हैं।

सूत्रों के मुताबिक यह विवाद इसलिए ज्यादा चर्चा में है कि दिल्ली पुलिस की आपत्तियों को दरकिनार कर नई दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट ने खुदकुशी मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटना के बारे में लोगों के पास मौजूद सूचना या साक्ष्य को साझा करने की अपील की है।

जिला मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने शुक्रवार को एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया। उन्होंने टीवी चैनलों से घटना की वीडियो फुटेज मांगी है। इस नोटिस में आम लोगों से अपील की गई है कि वो घटना से संबंधित किसी भी सूचना या साक्ष्य को 27 अप्रैल से पहले शाहजहां रोड के जामनगर हाउस में स्थित डीएम कार्यालय में कार्य अवधि के दौरान मुहैया कराएं।

जिला मजिस्ट्रेट ने इलाके के पुलिस उपायुक्त को पत्र खिलकर घटना के सभी साक्ष्य मुहैया कराने को कहा था। कुमार ने कहा कि आप सरकार ने उन्हें मामले की जांच करने को कहा है। पुलिस ने इसे खारिज करते हुए कहा कि मामला उनके अधिकार क्षेत्र का नहीं है। पुलिस ने यह कहते हुए साक्ष्य देने से इनकार कर दिया कि मामले की जांच का अधिकार डीएम को नहीं है।

जबकि कुमार ने नियमों का हवाला देते हुए पुलिस से शुक्रवार सुबह 11 बजे तक साक्ष्य मुहैया कराने को कहा था। उन्होंने ऐसा न होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। जिला मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने कहा कि मामले की जांच शुरू हो गई है। हम पुलिस के खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई के लिए अभियोजन की राय ले रहे हैं, क्योंकि उसने जांच में हमारे साथ सहयोग करने से इनकार कर दिया है।

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