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तेल कंपनियों के साथ विवादों को सुलझाने में किसी दबाव में नहीं आएंगे: प्रधान

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राजग सरकार को कुछ समस्याएं पिछली यूपीए सरकार से विरासत में मिली हैं जिसके कारण विवादों को सुलझाने में देरी हुई है।
Author नई दिल्ली | May 3, 2016 01:29 am
केंद्रीय पेट्रोलियम और गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (PTI Photo)

सरकार ने सोमवार को साफ कर दिया कि केजी डी 6 गैस फील्ड को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों के लंबित मध्यस्थता विवादों को सुलझाने में वह किसी दबाव के आगे नहीं झुकेगी। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों के सवालों के जवाब में कहा कि किसी भी निजी कंपनी को लेकर सरकार पर कोई बाध्यता नहीं है। अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं और इसलिए सब को आश्वस्त रहना चाहिए।

इससे पूर्व भाजपा के ही सदस्य भोला सिंह ने सरकार से जानना चाहा था कि क्या सरकार की कोई मजबूरी है या उस पर कोई दबाव है जिसके कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी निजी पेट्रोलियम कंपनियों के साथ तेल फील्ड से जुड़े विवादों को सुलझाने में देरी हो रही है। सिंह ने कहा कि सरकार को निजी पेट्रोलियम कंपनियों के साथ ऐसे सभी विवादों को सुलझाने के लिए कड़े फैसले करने होंगे।

प्रधान ने कहा कि राजग सरकार को कुछ समस्याएं पिछली यूपीए सरकार से विरासत में मिली हैं जिसके कारण विवादों को सुलझाने में देरी हुई है। मंत्री ने बताया कि सरकार ने हाल ही में अनुमोदित गैस मूल्य निर्धारण नीति पेश की थी ताकि अविकसित गैस खोजों के लिए ऊंची कीमत दी जा सके बशर्ते कि वे उन मध्यस्थों को वापस ले लें जिसकी उन्होंने शुरुआत की थी। उन्होंने बताया कि आरआइएल ने सरकार के खिलाफ चार मध्यस्थों की पहल की थी। जिसमें एक ने बंगाल की खाड़ी में केजी डी 6 ब्लाक में उसके मौजूदा फील्ड के लिए गैस की ऊंची कीमत मांगी थी।

प्रधान ने बताया कि हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय ने विवाद निपटान प्रणाली में सुधार के लिए विभिन्न सुझाव दिए हैं जिनमें सुलह समझौते की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना और सरकार द्वारा समय से मध्यस्थों की निुयक्ति करना भी शामिल है।
मंत्री ने बताया कि मध्यस्थों और वकीलों की नियुक्ति अब समय से की जा रही है और विवादों के निपटान के लिए मंत्रालय में ठेकेदारों को एक मंच मुहैया कराया जा रहा है।

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