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जानिए कैसे बदले गए रघुराम राजन के पुराने 500-1000 के नोट, उठाना पड़ा था यह कदम

नोटबंदी में 500-1000 रुपए के नोट बंद हो गए थे। ऐसे में सबने मुसीबत झेली। रघुराम राजन ने भी।
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन

नोटबंदी में 500-1000 रुपए के नोट बंद हो गए थे। ऐसे में सबने मुसीबत झेली। नोट बदलवाने के लिए सबको लाइन में लगना पड़ा। यहां तक कि नोट जारी करने वाली संस्था आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के नोट भी आसानी से नहीं बदले गए। अपनी किताब I Do What I DO के लिए नई दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम में रघुराम राजन ने नोटबंदी के दिनों को याद किया। राजन ने यह भी बताया कि वह नोटबंदी के पक्ष में नहीं थे। राजन ने कहा कि वह जानते थे कि लंबे वक्त में होने वाले इसके फायदे छोटे वक्त में होने वाले असर से कमतर रहेंगे।

राजन ने बताया कि सरकार ने फरवरी 2016 में उनसे मौखिक रूप से नोटबंदी के बारे में पूछा था लेकिन तब कोई तारीख तय नहीं की गई थी। फिर रघुराम राजन का कार्यकाल पूरा होने के बाद जब आठ नवंबर 2016 को 500/1000 रुपए के नोटों को बंद करने का फैसला उन्होंने सुना तो वह खुद भी चौंक गए। रघुराम राजन उस वक्त यूएस में थे। उनके पास भी भारतीय करेंसी थी। उनमें वे नोट भी शामिल थे जो कि बंद हो गए थे। इसलिए उन्हें भारत वापस आना पड़ा ताकि वे नोट बदलवा सकें। रघुराम राजन फिलहाल यूएस में रहकर पढ़ा रहे हैं। किताब के लिए वह दिल्ली आए हुए हैं।

नोटबंदी को अर्थशास्त्री फेल बता रहे हैं। RBI द्वारा जारी किए गए डाटा के मुताबिक, बंद किए गए 99 प्रतिशत नोट बैकों में वापस आ गए हैं। यानी वे सब फिर से सिस्टम का हिस्सा बन गए। नोटबंदी के बाद आए जीडीपी के आंकडे में बताया गया कि पहली तिमाही जो कि जून में खत्म हुई उसमें नोटबंदी का नकारात्मक प्रभाव दिखा। आकंड़ों के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था पिछले तीन साल के मुकाबले निचले पायदान पर आ गई। यह पहले क्वॉटर में 5.7 प्रतिशत रही।

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