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अपोलो अस्पताल तो बस शुरुआत है, पुलिस के निशाने पर दिल्ली-NCR के दर्जन भर हॉस्पिटल और 5-Star होटल

दिल्ली पुलिस पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर इस पूरे गोरखधंधे का भंडाफोड़ करने की योजना पर काम कर रही है।
Author नई दिल्ली | June 5, 2016 00:52 am
नई दिल्ली का अपोलो अस्पताल

किडनी के अवैध कारोबार में अपोलो अस्पताल से जुड़े दो कर्मचारियों और तीन दलालों की गिरफ्तारी तो बस शुरुआत है, असल में इसके तार कई अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं। पुलिस के निशाने पर अब दिल्ली-एनसीआर के एक दर्जन से ज्यादा बड़े अस्पताल, वहां काम कर रहे डॉक्टर और पांच सितारा होटल हैं जहां इस कारोबार का लेन-देन होता है।

पुलिस के आला अधिकारियों की देखरेख में बनी टीमें इन संदिग्ध अस्पतालों पर नजर रखने के साथ ही बहुत जल्द कई दूसरे राज्यों में दबिश देने जा रही हैं ताकि इस तरह के अन्य गिरोहों को बेनकाब किया जा सके। पुलिस के आला सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के बड़े अस्पतालों में लंबे समय से किडनी बेचने का धंधा चल रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देशों की धज्जियां उड़ाते इन अस्पतालों और वहां काम कर रहे लालची डॉक्टरों के तार दिल्ली के पांच सितारा होटलों से भी जुड़े हैं, जहां जरूरतमंद लोगों को फर्जी कागजात से कमरे दिलाकर किडनी बेचने-खरीदने की औपचारिकताएं पूरी की जाती थीं। पुलिस की टीमें संदिग्ध अस्पतालों से किडनी रोगियों की सूची मांगकर उसके तार होटलों से जोड़ रही हैं।

दिल्ली पुलिस पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर इस पूरे गोरखधंधे का भंडाफोड़ करने की योजना पर काम कर रही है। फरीदाबाद, गुड़गांव, सोनीपत, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, चेन्नई, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, पटना, रांची, देहरादून और रायपुर में भी पकड़े गए गिरोह के संपर्कों की सूची बनाई गई है। पुलिस इस मामले में गिरफ्तार असीम सिकदर, सत्यप्रकाश, देवाशीष, शैलेश सक्सेना और आदित्य सिंह के कुछ साथियों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ कर रही है ताकि उनकी संलिप्तता का पता लगाया जा सके।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और तमिलनाडु के अलावा बिहार, झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के भी लोगों की मिलीभगत को जांच के दायरे में रखा गया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि बिचौलिए जरूरतमंद लोगों के साथ महीनों वक्त गुजारकर यह सुनिश्चित कर लेते थे कि दिल्ली आने के बाद वे मुकरेंगे नहीं। इसके बाद उन्हें दिल्ली लाकर पांच सितारा होटलों में ठहराने की व्यवस्था की जाती थी।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, किडनी की रकम ग्राहकों की हैसियत पर तय होती है। व्यापारिक घराने से ताल्लुक रखने वाले और विदेशों में नौकरी कर पैसे कमाने वाले कई रोगी अपनी जान बचाने के लिए किडनी बेचने वाले लोगों को मुंहमांगी रकम देने को तैयार हो जाते हैं। पुलिस की टीमें अब दिल्ली के उन रोगियों से भी संपर्क साध रही हैं जिन्हें बीते कुछ दिनों के अंदर किडनी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है।

भारत में करीब 20 लाख से अधिक लोग किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं। इसमें हर साल चार लाख मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन हर साल सिर्फ सात से आठ हजार किडनी ट्रांसप्लांट ही हो पाता है। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए हर अस्पताल के पास एक अधिकारिक कमेटी होती है जो डोनेशन की इजाजत देती है। जीवित व्यक्ति द्वारा किडनी दान करने के मामले में दानदाता के पास मरीज से पारिवारिक संबंध का सबूत होना जरूरी है।

हर महीने होने वाले किडनी ट्रांसप्लांट की जानकारी मूल्यांकन के लिए स्वास्थ्य विभाग को भेजना अनिवार्य है। किडनी ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है। कानून के मुताबिक, शरीर के किसी भी अंग को बेचने या खरीदने पर दस साल की सजा और दो करोड़ रुपए तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। कोई भी व्यक्ति अपने परिवार के किसी भी सदस्य के लिए किडनी दान कर सकता है, लेकिन किसी बाहरी दानदाता से किडनी लेने के लिए अदालत से इजाजत लेना जरूरी है।

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