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ऐसे निर्माण से मेट्रो को कोई खतरा तो नहीं!

मेट्रो कॉरिडोर के प्रभाव क्षेत्र में आने वाली निर्माण योजना के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) देने की स्थिति क्या है यह न्यू अशोक नगर स्थित सब्जी और फल बाजार के पास हो रहे भवन निर्माण से पता चलता है।
Author नई दिल्ली | April 9, 2016 04:03 am

मेट्रो कॉरिडोर के प्रभाव क्षेत्र में आने वाली निर्माण योजना के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) देने की स्थिति क्या है यह न्यू अशोक नगर स्थित सब्जी और फल बाजार के पास हो रहे भवन निर्माण से पता चलता है। यहां बने मकान का ढांचा मेट्रो पुल से बिलकुल सट गया है। इस पर मेट्रो की नजर गई कि नहीं पता नहीं, लेकिन यहां निर्माण कार्य पिछले दो महीने से चल रहा है। यह मेट्रो की सुरक्षा प्रणाली और एनओसी देने पर सवाल खड़ा करता है।

न्यू अशोक नगर के निर्माणाधीन मकान को देखकर यही लगता है कि यह ढांचा कोई आजकल में तो तैयार नहीं हुआ होगा क्योंकि आज की तारीख में इसमें दरवाजे और खिड़की लगने लगे हैं। अशोक नगर के रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले दो महीने से निर्माण कार्य चल रहा है। मकान का छत बनने के बाद मेट्रो पर आराम से पत्थर भी मारा जा सकता है और मेट्रो से बिल्कुल सटे होने से भविष्य में कोई अनहोनी की भी आशंका है। मेट्रो का पुल मकान से बिल्कुल सट गया है जो किसी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रित करता है।

हालांकि, मेट्रो अधिकारियों ने शुक्रवार को इस निर्माण की फोटो डीएमआरसी के सिविल अधिकारियों को भेजी है और इस बारे में डीएमआरसी की ओर से तकनीकी पहलू सोमवार को बताने को कहा है। जबकि यह निमार्ण कार्य पिछले दो महीने से चल रहा है। अब तो इसमें दरवाजे और खिड़की लगने शुरू हो गए हैं और मेट्रो पुल बमुश्किल एक फुट की दूर पर है। न्यू अशोक नगर के लोगों का कहना था कि मेट्रो सुरक्षा की दृष्टि से स्वत: संज्ञान भी ले सकती थी। वहीं 20 मार्च से मेट्रो ने इंटरनेट के जरिए कॉरिडोर के प्रभाव क्षेत्र में आने वाले स्थानों को प्रदर्शित किया है। इसका मकसद था कि एनओसी के लिए लोग मेट्रो कॉरिडोर के प्रभाव क्षेत्र में आने वाले अपने स्थान के बारे में जान सकें।

वहीं नियमों के मुताबिक, मेट्रो के प्रभाव क्षेत्र के दोनो तरफ 11 मीटर के अंदर किसी निर्माण कार्य के लिए डीएमआरसी से मंजूरी लेनी जरूरी है। मेट्रो अधिकारियों से जब अशोक नगर के निर्माण की एनओसी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति एनओसी के लिए पहले नगर निगम को आवेदन करता है। इसके बाद नगर निगम मेट्रो रडार क्षेत्र में आने वाली निर्माण योजना को डीएमआरसी को भेजती है और फिर मेट्रो उस निर्माण कार्य पर एनओसी जारी करता है। इस प्रक्रिया को तो मेट्रो ने समझाया, लेकिन यह नहीं बताया कि कुछ फुट की दूरी पर न्यू अशोक नगर में चल रहे इस निर्माण के लिए मंजूरी है या नहीं। इस मेट्रो के अधिकारी तुरंत बता पाने में अक्षम थे।

वहीं यहां सवाल उठता है कि मेट्रो ने अपने ट्रैक, पुल और मेट्रो स्टेशन के बाहर सुरक्षा व्यवस्था के लिए क्या प्रणाली अपनाई है। जबकि रेल पटरियों की सुरक्षा के लिए कर्मचारी तैनात होते हैं और दिन में कई बार रेलवे लाइन की सुरक्षा जांच करते हैं। इस सवाल पर मेट्रो अधिकारी का कहना था कि यहां भी सुरक्षा जांच होती है पर किस तरह होती है इसका जवाब नहीं मिला। अशोक नगर के लोगों का कहना है कि मेट्रो या निगम की मिलीभगत से यह निर्माण कार्य चल रहा है। मेट्रो अधिकारियों को इस निर्माण की जानकारी नहीं है यह असंभव सा लगता है। और अगर जानकारी नहीं है तो यह सुरक्षा के लिहाज से बहुत खतरनाक है।

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