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अदालत ने मेधा पाटकर पर लगाया 10 हजार का जुर्माना

दिल्ली की एक अदालत ने मेधा पाटकर और केवीआइसी अध्यक्ष वीके सक्सेना की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई के दौरान नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर के बार-बार अनुपस्थित रहने पर उन पर 10,000 रुपए का गुरुवार को जुर्माना लगाया।
Author नई दिल्ली | August 4, 2017 00:57 am
मेधा पाटकर

दिल्ली की एक अदालत ने मेधा पाटकर और केवीआइसी अध्यक्ष वीके सक्सेना की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई के दौरान नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर के बार-बार अनुपस्थित रहने पर उन पर 10,000 रुपए का गुरुवार को जुर्माना लगाया। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट विक्रांत वैद्य ने मेधा पाटकर को आखिरी मौका देते हुए उन्हें चेतावनी दी कि यदि इस बार वो पेश होने में असफल रहती हैं तो सक्सेना के खिलाफ उनकी शिकायत रद्द कर दी जाएगी।

मजिस्ट्रेट ने पूछा कि आप यह (मुकदमा) क्यों करना चाहती हैं जब आप अदालत ही नहीं आ सकतीं? मेधा के वकील ने अदालत को बताया कि वो मध्यप्रदेश के एक गांव में भूख हड़ताल पर हैं। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने कहा-एक आखिरी मौका दिया जाता है और दस हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाता है। वहीं सक्सेना के वकील महिपाल ने व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगने वाली मेधा की याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि मेधा जानबूझ कर अदालत के समक्ष पेश नहीं हो रहीं हैं।

अगर वो अस्वस्थ्य हैं तो भूख हड़ताल कैसे कर रही हैं।अदालत ने नर्मदा आंदोलन की नेता मेधा के पिछली तारीख पर भी नहीं आने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वो स्वेच्छा से भूख हड़ताल पर गईं हैं और अगर वो सुनवाई की अगली तारीख 17 अगस्त को अदालत के समक्ष पेश नहीं हुईं तो उनकी शिकायत रद्द कर दी जाएगी। उनके वकील ने उनकी मेडिकल रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष पेश की और कहा कि वो अस्वस्थ्य हैं और दिल्ली की यात्रा करने की हालत में नहीं हैं।

बता दें कि अदालत ने 26 जून को मेधा को भविष्य में सचेत रहने की चेतावनी दी थी और पेशी की तारीख पर नहीं आने के कारण 29 मई को उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को रद्द कर दिया था। अदालत ने जनवरी 2015 में भी अदालत के समक्ष पेश नहीं होने पर मेधा पाटकर पर 3000 रुपए का जुर्माना लगाया था।

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