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दिल्ली सीएम के घर के बाहर किसानों ने कांग्रेस साथ मिलकर किया प्रदर्शन

दिल्ली के किसानों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निवास के बाहर प्रदर्शन किया।
Author नई दिल्ली | August 17, 2016 03:32 am
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल। (फाइल फोटो)

दिल्ली के किसानों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निवास के बाहर प्रदर्शन किया। ये किसान दिल्ली सरकार की ओर से ट्यूबवेल के इस्तेमाल पर व्यावसायिक दरों पर एकतरफा बिजली की दरें बढ़ाए जाने का विरोध कर रहे थे। किसानों ने यह प्रदर्शन दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के बैनर तले किया और प्रदर्शनकारियों की अगुआई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने की। कांग्रेस कार्यकर्ता और किसान हाथों में झंडे व तख्तियां लेकर जनता को धोखा देने के लिए केजरीवाल सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। प्रदर्शनकारी ‘केजरीवाल की मनमानी मंहगा हुआ खेत का पानी’, ‘मुआवजे के नाम पर ठेंगा बिजली का रेट महंगा’, ‘जन-जन रूठा है केजरीवाल झूठा है’ जैसे नारे लगा रहे थे।

प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन के अलावा पूर्व सांसद सज्जन कुमार, रमेश कुमार व महाबल मिश्रा, मुख्य प्रवक्ता शर्मिष्ठा मुखर्जी, पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार और कई अन्य नेता मौजूद थे। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए माकन ने आम आदमी पार्टी की सरकार व एनडीपीएल की ओर से ट्यूबवेल के इस्तेमाल पर व्यावसायिक दरों पर एकतरफा बिजली की दरें बढ़ाए जाने व सिंचाई के लिए ट्यूबवेल की लोड कैपेसिटी को 20 किलोवाट से कम करके 10 किलोवाट किए जाने की निंदा की। माकन ने कहा कि बिजली की व्यावसायिक दरों की सीमा 20 से 10 किलोवाट किए जाने के कारण किसानों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है क्योंकि अब ट्यूबवेल के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बिजली के लिए 10 किलोवाट से ऊपर व्यावसायिक दरों पर बिल लिए जा रहे हैं।

माकन ने कहा कि केजरीवाल सरकार को सत्ता में आए डेढ़ साल से ज्यादा हो चुके हैं और उनके मुफ्त बिजली, पानी व सड़क को लेकर किए गए वादे झूठे नजर आ रहे है। वहीं कांग्रेस ने दिल्ली में एक जिम्मेदार व सजग विपक्ष की भूमिका निभाते हुए आम जनता से जुड़े मुद्दों को बड़ी मजबूती से उठाया है। माकन ने कहा कि केजरीवाल ने पिछले साल ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद होने पर हर किसान को प्रति एकड़ 50-50 हजार रुपए मुआवजा देने की घोषणा की थी, लेकिन मुआवजे के नाम पर किसानों को 2000, 3000 व 1500 रुपए के मुआवजे दिए जा रहे हैं, जोकि न केवल किसानों के साथ धोखा है बल्कि उनके साथ विश्वासघात है। माकन ने कहा कि जब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी, तब उसने किसानों की परेशानियों को देखते हुए 15 अक्तूबर 2009 को एक आदेश निकाला था जिसमें कृषि उपभोक्ताओं की एमडीआइ लिमिट 20 किलोवाट कर दी थी।

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