December 09, 2016

ताज़ा खबर

 

ग्राउंट रिपोर्ट: कोई भूखे-प्यासे लाइन में खड़ा है कि हटने पर नंबर न चला जाए तो कोई खड़े-खड़े कर रहा है लंच

नोटबंदी से बेहाल लोग सुबह से शाम तक लग रहे हैं लाइन में। नंबर न चला जाए इस डर से पानी पीने भी नहीं जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में नोट निकालने के लिए लाइन में लगे लोग (कीर्ति राजेश चौरसिया)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आठ नवंबर को 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा के बाद देश में नगदी की भारी किल्लत हो गई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी की वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में अब तक दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 10 नवंबर से बैंकों में पुराने नोट बदले जा रहे हैं और पैसे निकाले जा रहे हैं। 11 नवंबर से सभी एटीएम में पैसे निकलने शुरू हो गए हैं। लेकिन बैंकों और एटीएम में शुरुआती दिनों में नगद कुछ देर घंटों में खत्म हो गए। घोषणा के आठ दिन बाद भी हालात बहुत ज्यादा बेहतर नहीं हुए हैं। बैंकों और एटीएम के बाहर भारी संख्या में ग्राहकों की भीड़ देखी जा सकती है। इस भीड़ को संभाल पाना पुलिस और प्रशासन के लिए भी कठिन साबित हो रहा है। पैसे निकालने को लेकर कई जगहों पर विवाद, लड़ाइयां और मारपीट तक की खबरें भी आई हैं। नोटबंदी का आम जनजीवन पर क्या असर हुआ है ये जानने के लिए जनसत्ता ने उन लोगों से बात की जो इससे सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में नोटबंदी के कारण हालात बदतर हो चले हैं। सोमवार (14) नवंबर को सरकार ने घोषणा की कि दवा की दुकानों पर पुराने नोट 24 नवंबर तक चलेंगे लेकिन कई दुकानदार पुराने नोट नहीं ले रहे हैं। इसके अलावा बीमारों और छोटे बच्चों को फल-फूल और दूध नहीं मिल पा रहे हैं।  छतरपुर जिला अस्पताल के महिला वार्ड में भर्ती 26 वर्षीय रचना रिछारिया ने हाल ही 12 नवंबर को एक बेटे को जन्म दिया है। उनके बेटा स्वास्थ्य ख़राब होने के चलते जन्म से ही SNCU (गहन चिकित्सा वार्ड) में भर्ती है। बाजार में 1000-500 के नोट न चलने की वजह से इनके पति हेमंत रिछारिया जरूरी दवाएं और दूसरी चीजों नहीं खरीद पा रहे हैं। हेमंत नोट बदलने के लिए बैंक के बाहर लाइन में लगे रहते हैं। सुबह से शाम हो जाती है तब कहीं जाकर वो 2000 के नोट बदल पाते हैं। हेमंत मंगलवार (16 नवंबर) सुबह आठ बजे से लाइन में लग गए थे लेकिन शाम के चार बजे उन्हें बैंक से पैसे नहीं मिले थे।

रचना और हेमंत की दो बेटियां (अदिति 6 वर्ष और सिद्धी 3 वर्ष) हैं जो पिछले एक सप्ताह से अपने दादा-दादी के पास रह रही हैं। और तभी से स्कूल भी नहीं जा पा रही हैं। और यहां रचना और उनके बच्चे का भी स्वस्थ्य खराब है। रचना का सारा समय नोटों की तलाश में गए पति की राह देखते और बच्चे को तकते समय निकल जाता है। नोट बंदी के चक्कर में जहां पति दिनभर बैंक के बाहर लाइन में लगा रहता है तो वहीं बीमार रचना अस्पताल में अकेली पड़ी रहती हैं।

मध्य प्रदेश के छतरपुर में पैसे निकालने के लिए लाइन में लगे लोग। मध्य प्रदेश के छतरपुर में पैसे निकालने के लिए लाइन में लगे लोग।

छतरपुर शहर के रानी तलैया निवासी 20 वर्षीय बेबी खान ने सोमवार को अस्पताल में स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। बेबी के पति अहमद खान एक होटल में शेफ हैं। बेबी और उनके बच्चे को अस्पताल से मुफ़्त मिले इलाज और दवाइयों के अलावा बाजार से दूसरे जरूरी सामान लेने पड़ते हैं पर नोट न चलने की वजह से उनके पति भी बैंक में लाइन में लगे हुए हैं। बेबी अपनी सास के साथ बैठकर पति के आने का इंतजार कर रही हैं कि वो कब पैसे लेकर आयें तो बच्चे और अपने लिये दवाइयां और अन्य जरुरी सामान मंगवा सकें।

मध्य प्रदेश के छतरपुर में पैसे निकालने के लिए लाइन में लगे लोग। मध्य प्रदेश के छतरपुर में पैसे निकालने के लिए लाइन में लगे लोग।

छतरपुर शहर के दूधनाथ कालोनी की रहने वाली 29 वर्षीय अरुणा तिवारी सुबह से एसबीआई बैंक के बसस्टैंड ब्रांच के बाहर लाइन में लगी हुई हैं। घर में इनकी एक चार वर्षीय बेटी ख़ुशी है जो कि एलकेजी में पढ़ती है। जब से नोटबंदी का फरमान आया है अक्सर इनकी बेटी स्कूल नहीं जा पा रही है। जिस दिन खुद तैयार करके भेज देतीं हैं उस दिन जा पाती है। घर में उनकी सास बच्ची को संभालती हैं। उनके पति अपने रोजमर्रा के काम पर निकल जाते हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए जरूरी पैसों की किल्लत के चलते उन्हें नोट बदलने के लिये दिन भर लाइन में लगना पड़ता है। अरुणा लाइन में लगने के लिए लंच साथ लेकर आतीं हैं और कतार में खड़े-खड़े ही लंच कर लेतीं हैं।

पार्वती के पति बैंक से पैसे निकालने के लिए सुबह से शाम तक लाइन में लगते हैं। पार्वती के पति बैंक से पैसे निकालने के लिए सुबह से शाम तक लाइन में लगते हैं। (तस्वीर- कीर्ति राजेश चौरसिया)

28 वर्षीय पार्वती अहिरवार छतरपुर के गठेवरा गांव की रहने वाली हैं। उनके पति देवीदीन अहिरवार मजदूरी करते हैं। नोट बदलने के लिए सुबह सात बजे से बैंक के बाहर लाइन में लग गईं थीं लेकिन दोपहर तीन बजे तक उन्हें पैसे नहीं मिले। पार्वती सुबह से भूखी प्यासी हैं। पार्वती कहती हैं कि वो लोगों की भारी भीड़ की वजह से लाइन तोड़कर पानी पीने तक नहीं जा सकतीं वरना नंबर चला जायेगा। उनके छह साल और चार साल के बच्चे बीमार हैं। बिमारी के चलते बच्चों को वो अपनी भाभी के घर छोड़कर आई हैं। पार्वती कहते हैं कि जब तक बैंक से पैसे नहीं बदल जाते तब तक वो बच्चों का इलाज नहीं करवा पाएंगी।

लाइन में लगे लोगों को बिस्किट और पानी देते समाजसेवी (तस्वीर- कीर्ति राजेश चौरसिया) लाइन में लगे लोगों को बिस्किट और पानी देते समाजसेवी (तस्वीर- कीर्ति राजेश चौरसिया)

इस बदइंतजामी के बीच आम लोगों का मदद के लिए सामने आने जरूरतमंदों के लिए एकमात्र राहत है। आम लोगों की मुश्किलों को देखते हुए छतरपुर शहर के कई समाजसेवी बैंकों और एटीएम के बाहर लाइन में लगे लोगों को पानी के पाउच और बिस्किट के पैकेट बांटने में लगे हुए हैं। यह बिस्किट, पाऊच सिर्फ बच्चों, छात्राओं और महिलाओं और वृद्धजनों को बांटे जा रहे हैं। लोगों की इस तरह की मानवीयता और समाज सेवा से परेशां लोग भी भूरी-भूरी प्रसंसा कर रहे हैं।

रिपोर्ट- कीर्ति राजेश चौरसिया, छतरपुर (मध्य प्रदेश)

वीडियो में देखें- जनसत्ता एक्सक्लूसिव: नोटबंदी की ज़मीनी हकीकत

वीडियो: सरकार ने बार-बार नोट बदलवानों पर लगाम लगाने के लिए किया इंतजाम-

वीडियो: जानिए कब-कब हुआ है भारत में विमुद्रीकरण-

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 16, 2016 2:15 pm

सबरंग