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योगी आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा का उत्तर प्रदेश विधानपरिषद में पहुंचने का रास्ता साफ

योगी प्रदेश के ऐसे लगातार तीसरे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने उच्च सदन की राह अख्तियार की है। इससे पहले मायावती और अखिलेश यादव भी मुख्यमंत्री बनने के बाद विधान परिषद के सदस्य बने थे।
Author September 5, 2017 19:57 pm
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके दो उप मुख्यमंत्रियों के उप्र विधानपरिषद में निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया है। वह इसलिए क्योंकि आज (5 सितंबर) नामांकन के अंतिम दिन किसी पार्टी के अन्य उम्मीदवार ने परिषद के लिए नामांकन दाखिल नहीं किया। विधानपरिषद में पांच सीटें खाली हुई हैं, जिसके लिए उपचुनाव हो रहा है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के अलावा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा के अलावा दो मंत्री मोहसिन रजा और स्वतंत्रदेव सिंह ने आज नामांकन के अंतिम दिन अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। विधानसभा के प्रमुख सचिव और चुनाव अधिकारी प्रदीप दुबे ने बताया कि परिषद के लिये नामांकन के अंतिम दिन आज निर्धारित समय तीन बजे तक इन पांच प्रत्याशियों के अलावा किसी अन्य प्रत्याशी ने नामांकन नहीं दाखिल किया है। बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच होगी और जांच में नामांकन पत्र सही पाए जाने के बाद इनके निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा एक औपचारिकता मात्र रह जाएगी।

नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पाण्डेय के साथ विधानभवन पहुंचे मुख्यमंत्री योगी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और डॉक्टर दिनेश शर्मा, परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह और वक्फ राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने नामांकन के अंतिम दिन अपना-अपना पर्चा दाखिल किया। विधानसभा में नामांकन के लिए जाने से पहले सभी प्रत्याशी पार्टी के कार्यालय में जमा हुए और वहां से पैदल ही विधानसभा की ओर रवाना हुए। इस अवसर पर पार्टी के कई विधायक मंत्री मौजूद थे। विधायक और पार्टी नेता जय श्री राम और भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे।
योगी और मौर्य सांसद हैं, जबकि दिनेश शर्मा, स्वतंत्रदेव सिंह और मोहसिन रजा इस वक्त किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। पिछली 19 मार्च को राज्य सरकार में ओहदेदार की शपथ लेने के छह माह के अंदर इन सभी का प्रदेश विधानमण्डल के किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है। यह अवधि आगामी 19 सितम्बर को खत्म हो रही है।

योगी प्रदेश के ऐसे लगातार तीसरे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने उच्च सदन की राह अख्तियार की है। इससे पहले मायावती और अखिलेश यादव भी मुख्यमंत्री बनने के बाद विधान परिषद के सदस्य बने थे। उच्च सदन की जिन पांच सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें से चार सपा सदस्यों बुक्कल नवाब, यशवंत सिंह, सरोजिनी अग्रवाल और अशोक बाजपेयी तथा एक बसपा सदस्य ठाकुर जयवीर सिंह के इस्तीफे के कारण खाली हुई हैं। ये सभी त्यागपत्र देने के बाद भाजपा में शामिल हो गए हैं।

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