March 24, 2017

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उत्तराखंड: दलित की हत्या के हफ्ते बाद गांव पहुंचे मुख्यमंत्री

उत्तराखंड के कुमाऊ मंडल के बागेश्वर जिले के भेटा करड़िया गांव के सोहनराम की हत्या का मामला राजनैतिक तूल पकड़ने लगा है।

Author देहरादून | October 13, 2016 04:59 am
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत

उत्तराखंड के कुमाऊ मंडल के बागेश्वर जिले के भेटा करड़िया गांव के सोहनराम की हत्या का मामला राजनैतिक तूल पकड़ने लगा है। पूर्व भाजपा सांसद तरुण विजय ने इस हत्याकांड को जातिगत नफरत और समाज का सबसे बड़ा कलंक बताया है। वहीं मुख्यमंत्री हरीश रावत मंगलवार को भेटा करड़िया गांव सोहनराम के घर पर पहुंचे थे।  रावत ने सोहनराम के माता-पिता, उनकी पत्नी मीना से भेंट कर उन्हे ढ़ांढ़स बंधाया। मुख्यमंत्री रावत ने दलित सोहनराम के परिवार को समाज कल्याण विभाग की ओर से अनुसूचित जाति उत्पीड़न योजना के तहत पांच लाख 62 हजार 500 रुपए का चेक तथा राज्य सरकार की और से पांच लाख रुपए का चेक मृतक परिवार को सौंपा। साथ ही मुख्यमंत्री ने बागेश्वर के जिलाधिकारी को आदेश दिया कि राज्य सरकार के पांच लाख के चेक में से ढाई लाख रुपए मृतक सोहनराम के माता-पिता का संयुक्तखाता खोल कर उसमें डाले जाएं और बाकी के ढाई लाख रुपए मृतक के बच्चों के नाम का संयुक्त खाता खोल कर उसमें डाले जाएं।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को मृतक के भेटा करड़िया गांव में मिनी आगनवाड़ी केंद्र खोल कर उसकीपत्नी मीना को उसमें नौकरी देने के निर्देश दिए। भावुक होते हुए मुख्यमंत्री ने गांव वालों से कहा कि सोहनराम का परिवार हम सबका परिवार है। हमें मिल जुलकर इस परिवार के साथ खड़ा होना है। गांव की इस बेटी के ऊपर दुख का पहाड़ टूटा है। रावत बोले कि मैं मृतक सोहनराम के परिवार वालों से माफी मांगने आया हूं। अब आगे से किसी गरीब की ऐसे हत्या नहीं होने दी जाएगी।

बीते मंगलवार को सोहनराम के गांव के एक अगड़ी जाति के एक शिक्षक ने आटा पिसने की चक्की छूने पर हत्या कर दी थी। इस शिक्षक ने सोहनराम पर आटा चक्की छूकर उसे अशुद्ध करने का आरोप लगाया था और दराती से सोहनराम की गर्दन काट दी थी। मौके पर ही सोहनराम ने तड़फ तड़फ कर दम दोड़ दिया था। इस घटना के बाद सबसे पहले सोहनराम के परिवार से मिलने कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दलित नेता प्रदीप टम्टा गए थे। टम्टा सोहनराम के परिवार की दुर्दशा देख कर फफक-फफक कर रो पड़े थे। और उन्होंने मुख्यमंत्री रावत का ध्यान इस घटना की ओर दिलाया।

मुख्यमंत्री को दलित सोहनराम के परिवार का हाल-चाल जानने के लिए उसके गांव भेटा पहुंचने में एक हफ्ता लग गया। दरअसल उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में दलित और अगड़े समुदाय के बीच नफरत के बादल इतने ज्यादा घने हैं कि दलित समुदाय पर अत्याचार होने पर अगड़ी जाति के नेता राजनीतिक नफा-नुकसान को देख कर ही दलित समुदाय के पक्ष में खड़े होते हैं। अगड़ी जाति के राजनेताओं को यह डर सताता है कि कहीं दलितों को खुश करने के लिए उनका राजनीतिक नुकसान न हो जाए।यदि कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दलित नेता प्रदीप टम्टा मुख्यमंत्री पर दबाव न बनाते तो शायद अगड़ी जाति के नेता मुख्यमंत्री हरीश रावत के कदम सोहनराम के गांव भेटा करड़िया में न पहुंचते।

 

 

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First Published on October 13, 2016 4:59 am

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