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चार साल में दूध में 30 लाख टन की कमी

दुनिया के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देश भारत में 2020 तक सालाना दूध उत्पादन में 30 लाख टन की हानि होने की आशंका है।
Author मुंबई | February 17, 2017 02:17 am

दुनिया के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देश भारत में 2020 तक सालाना दूध उत्पादन में 30 लाख टन की हानि होने की आशंका है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से दूध उत्पादन का नुकसान होगा बल्कि इससे प्रति व्यक्ति उपभोग में भी कमी आएगी। भारतीय डेयरी संघ (पश्चिम क्षेत्र)की ओग से आयोजित 45वें डेयरी उद्योग सम्मेलन में उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि देश का दुग्ध उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और 2015-16 में यह 16 करोड़ टन रहा। विशेषज्ञों ने राय जताई कि बढ़ते तापमान की वजह से विशेष रूप से मिलीजुली नस्ल की गायों पर पड़ने वाले असर की वजह से घरेलू मांग को पूरा करना मुश्किल होगा और आखिरकार प्रति व्यक्ति खपत में कमी आएगी। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी)के चेयरमैन दिलीप रथ ने कहा- डेयरी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके दोनों से प्रभावित होगा। तापमान में परिवर्तन से पशुआें पर प्रभाव की वजह से दूध उत्पादन पर असर पड़ेगा। गर्मी के दबाव से पशुआें की प्रजनन की क्षमता पर भी बुरा असर होता है।

अनुसंधान से पता चला है कि गर्मी की वजह से पशुआें की दूध देने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके अनुसार गर्म और ठंडी हवाआें दोनों का गाय भैंस की दूध देने की क्षमता पर असर पड़ता है। रथ ने कहा कि हमें अग्रसारी तरीके से अपने दुग्ध उत्पादकों को जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से बचाना होगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और इस मामले में यह आत्मनिर्भर है।

वैश्विक दुग्ध उत्पादन में भारत का हिस्सा 18 फीसद का है। रथ ने कहा कि बाजार शोध रपटों के अनुसार दूध और दूध उत्पादों के भारतीय बाजार में सालाना 15 फीसद की दर से वृद्धि की संभावना है। इस सम्मेलन में 23 तकनीकी व वाणिज्यिक सत्रों का आयोजन होगा। इनमें वैज्ञानिक और उद्योग विशेषज्ञ अपने शोध और निष्कर्ष प्रस्तुत करेंगे। सम्मेलन में भारत के अलावा बुल्गारिया, चीन, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, लुथानिया, मलेशिया, नीदरलैंड, ब्रिटेन, अमेरिका और थाइलैंड के प्रतिनिधियों ने अपने उत्पादों प्रौद्योगिकियों और सेवाआें को प्रदर्शित किया है।

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