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श्मशान में जमीन के नीच से आ रही थी बच्चे की रोने की आवाजें, खोदकर देखा तो खुली रह गई आंखें

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक टीएस बघेल ने बताया कि नवजात शिशु को उपचार के लिये जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस उसके माता-पिता की तलाश कर रही है। इस हेतु आसपास के प्रसूति केन्द्रों के रिकार्ड की जांच की जा रही है।
Author बड़वानी | July 5, 2017 17:18 pm
संकेतात्मक तस्वीर (source-Indian express)

मध्य प्रदेश के एक गांव में 10 दिन का एक बच्चा जमीन में गड़ा हुआ बरामद हुआ है। बच्चे को किस जिला मुख्यालय से लगभग 64 किलोमीटर दूर धुसगांव के श्मशान के पास मिट्टी में दबे दस दिन के बच्चे को जिंदा बरामद किया गया है। धुसगांव में रहने वाले शेर सिंह (32 साल) ने बताया कि वह अपनी पत्नी सुनीता (28 वर्षीय) के साथ श्मशान के पास से गुजर रहे थे, तभी वहां खेल रहे बच्चों ने बताया कि उन्होंने वहां छोटे बच्चे के रोने की आवाज सुनी है। तलाश करने पर पत्थर और मिट्टी के नीचे एक शिशु दबा हुआ दिखाई दिया। उन्होंने बताया कि शिशु जमीन में लगभग एक फीट नीचे दबा था। उसके मुंह पर पत्थर रखा था और वह मिट्टी से सना था। सिंह ने बताया कि हमने तुरंत ओझर पुलिस चौकी को इसकी सूचना दी।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक टीएस बघेल ने बताया कि नवजात शिशु को उपचार के लिये जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस उसके माता-पिता की तलाश कर रही है। इस हेतु आसपास के प्रसूति केन्द्रों के रिकार्ड की जांच की जा रही है। बरामद किये गये शिशु का इलाज कर रहे बच्चों के चिकित्सक डा रूप सिंह भादले ने बताया कि बच्चे का जन्म करीब दस दिन पहले हुआ है और उसे फ्लू एवं सर्दी हो रही है। बच्चे की हालत खतरे से बाहर है। बच्चे को मिट्टी से बाहर निकालने वाले दंपत्ति उसकी देखभाल के लिये अस्पताल में ही ठहरे हुए हैं और उसके जल्दी स्वस्थ्य होने की कामना कर रहे हैं। सिंह और सुनीता दोनों ही इस बच्चे को गोद लेना भी चाहते हैं। उनको तीन पुत्रियां हैं और वह मानते हैं कि उन्हें ईश्वर ने यह बच्चा गोद लेने का मौका दिया है।

बच्चे को दफनाने का इसी तरह का एक मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर में भी हाल ही में सामने आया था। जानकारी के मुताबिक अविवाहित लड़की अपनी मां के साथ गर्भपात के लिए दवा लेकर घर लौट रही थी। इसी दौरान उसे प्रसव पीड़ा होने लगी और उसने बच्चों को जन्म दिया, लेकिन लोकलाज के कारण उसने बच्चे को जमीन में दफना दिया। जब इस बात की जानकारी गांववालों को लगी तो उन्होंने जमीन खोदकर बच्चों को जीवित बाहर निकाला। बच्चे को बाहर निकालने के बाद उन लोगों ने उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया।

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