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अक्षरधाम मंदिर हमले में 11 साल जेल में रहा, सुप्रीम कोर्ट से बरी हुआ, गोहत्या के आरोप में फिर जेल पहुंच गया चांद खान

पुलिस का दावा है कि चांद खान अपने दो अन्य साथियों के साथ कार में 500 किलोग्राम बीफ लेकर जा रहे थे।
Author September 21, 2016 08:36 am
चांद खान को साल 2002 में हुए अक्षरधाम हमले के आरोप में 11 साल जेल में गुजारने पड़े। बाद में वो बेगुनाह साबित हुए।

चांद खान उर्फ शान खान को 2002 में हुए अक्षरधाम मंदिर हमले मामले में 11 साल जेल में गुजराने पड़े थे। सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में उन्हें पांच अन्य लोगों समेत मामले से बरी किया था। दो साल बाद चांद खान एक बार फिर जेल में हैं। इस बार उन पर गोहत्या का आरोप है। जुलाई 2006 में खान को निचली अदालत ने अक्षरधाम मंदिर मामले में दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा दी थी। गुजरात हाई कोर्ट ने भी उनकी सजा बरकरार रखी थी। मई 2014 में जब सुप्रीम कोर्ट ने खान एवं अन्य को मामले में बरी किया उसके बाद ही वो गुजरात की साबरमती जेल से बाहर निकलकर उत्तर प्रदेश के बरेली में रहने वाले अपने परिवार के पास वापस जा पाए। लेकिन इस साल जून से खान पीलीभीत जेल में हैं। उन पर पीलीभीत के बीसलपुर पुलिस थाने में गोहत्या अधिनियम के तहत मामला दर्ज है।

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पुलिस के अनुसार 15 जून को सब-इंस्पेक्टर श्याम सिंह यादव ने बीसलपुर थाने में आने वाले नवाड़िया सितारगंज से एक कार में 500 किलो बीफ पकड़ा। पुलिस ने गाड़ी के साथ शान खान, अतीक़ और फैज़ान को भी गिरफ्तार किया। सभी आरोपी बरेली के काकरटोला के रहने वाले हैं। पुलिस ने तीनों के खिलाफ गोहत्या के अधिनियम के तहत मामला दर्ज करते हुए उनकी मारूती ज़ेन कार भी जब्त कर ली। पुलिस के अनुसार खान  ने उन्हें बताया था कि उनका एक नाम चांद खान भी है और वो अक्षरधाम मंदिर हमले मामले में गिरफ्तार हुए थे। खान के परिवारवालों का कहना है कि पुलिस जानबूझकर उनके “बैकग्राउंड” के कारण उन्हें फंसा रही है। गुजरात के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की चांद खान और शान खान एक ही व्यक्ति हैं।

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25 सितंबर 2002 को दो आतंकियों ने अक्षरधाम मंदिर पर हमला कर दिया था जिसमें 33 लोग मारे गए थे और 86 अन्य घायल हुए थे। राष्ट्रीय सुरक्षा गॉर्ड (एनएसजी) के कमांडों ने जवाबी कार्रवाई में आतंकियों को मार गिराया था। चांद खान को मामले में 12 सितंबर 2003 को गिरफ्तार किया गया था। खान के वकील रहे खालिद शेख कहते हैं, “अहदमाबाद ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोनों आतंकियों को अहमदाबाद लाने और शहर घुमाने के लिए दोषी करार दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी वकील की दलीलों को खारिज करते हुए उन्हें बरी कर दिया था। उच्चतम अदालत ने कहा था कि पुलिस के पास पर्याप्त सुबूत नहीं हैं।”

चांद खान के छोटे भाई ताहिर खान के अनुसार 2014 में जेल से रिहा होने के बाद प्राइवेट टैक्सी ड्राइवर के तौर पर काम करते थे। ताहिर कहते हैं, “जून में वो दो लोगों को टैक्सी में लेकर पीलीभीत जा रहे थे। रास्ते में पुलिस ने गाड़ी रोकी और उन्हें थाने में पूछताछ के लिए ले गई। उसके बाद उन पर गोहत्या अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर दिया गया।” चांद खान की पत्नी नगमा परवीन ने आरोप लगाया है कि पुलिस उनके परिवार को परेशान कर रही है जिससे मेरी बच्चियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

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