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केजरीवाल और LG नजीब के बीच फिर छिड़ी अधिकारों की जंग

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल नजीब जंग के बहाने केंद्र सरकार एक बार फिर आमने-सामने है।
Author नई दिल्ली | January 17, 2016 03:46 am
केजरीवाल और LG नजीब के बीच फिर छिड़ी अधिकारों की जंग

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल नजीब जंग के बहाने केंद्र सरकार एक बार फिर आमने-सामने है। उपराज्यपाल ने सीएनजी फिटनेस घोटाले की जांच के लिए दिल्ली सरकार के पूर्व न्यायाधीश एसएन अग्रवाल आयोग को अवैध मानते हुए एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक शाखा) को इस घोटाले के कागज देने के आदेश देने से मना कर दिया तो अग्रवाल ने उन पर निजी आरोप लगा दिए।

जिस तरह केंद्र सरकार की मनाही के बावजूद दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए पूर्व सॉलिसीटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम की अगुआई में बनी एक सदस्यीय जांच आयोग को भंग नहीं किया गया उसी तरह अग्रवाल आयोग भी काम करना बंद नहीं कर रहा है।

उपराज्यपाल और केंद्र सरकार के खिलाफ बोलने वाले नेता, वकील या पूर्व न्यायाधीश तो उनके अधिकार क्षेत्र में आते नहीं हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए जो भी अधिकारी दिल्ली के मुख्यमंत्री या उनके किसी सहयोगी को समझाने की कोशिश करता है वह उनके निशाने पर आ जाता है। इसी का परिणाम हुआ कि दिल्ली के इतिहास में पहली बार राज्य सरकार के खिलाफ दिल्ली सरकार में काम करने वाले आइएएस अधिकारी और दानिक्स अधिकारी एक दिन (31 दिसंबर) के सामूहिक अवकाश पर रहे। यह जगजाहिर है कि दानिक्स और आइएएस अफसरों में तैनाती के लिए तनी रहती है। इसके बावजूद हालात ऐसे हो गए हैं कि दानिक्स एसोसिएशन के बिना मांगे आइएएस एसोसिएशन ने समर्थन दिया। दोनों आयोगों के गठन को अमान्य करने के साथ ही विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बिना केंद्र सरकार की इजाजत से पास किए गए सभी 14 विधेयकों के लिए केंद्र सरकार को लिखा है। इसके साथ ही उन्होंने चार पन्ने का एक सर्कुलर जारी करके अफसरों को गैरकानूनी काम न करने की हिदायत दी। उस पत्र में साफ लिखा हुआ है कि जिस किसी अफसर ने उसका उल्लंघन किया उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
इसी के बाद सरकारी वकीलों के वेतन चार गुणा बढ़ाने की फाइल पर विशेष सचिव अभियोजन यशपाल शर्मा और विशेष सचिव कारागार सुभाष चंद्रा ने जबरन हस्ताक्षर करने से मना कर दिया तो मंत्री सतेंद्र जैन ने उन्हें निलंबित कर दिया। दिल्ली के अधिकारियों को उपराज्यपाल केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से नियंत्रित करते हैं। अफसरों की नियुक्ति से लेकर तबादला और निलंबन का अधिकार केंद्रीय गृह मंत्रालय को है।

केजरीवाल को 31 दिसंबर को सामूहिक अवकाश लेने से पहले और उसके बाद दानिक्स एसोसिएशन के नेता समझाना चाहते थे। लेकिन वे मिलने को तैयार नहीं हुए। जिस तरह फरवरी में सरकार बनने के साथ ही उनका विवाद आइएएस अफसरों से हुआ उनसे नाराज होने के बाद उन्होंने दानिक्स अफसरों के लिए नए वेतनमान घोषित कर दिए जिसे केंद्र सरकार ने मना कर दिया। अबकी बार उन्होंने दानिक्स कैडर के अफसरों के ग्रेड बदलने का फैसला कर दिया। वह भी केंद्र सरकार नहीं मानेगी। ताजा विवाद में भी अफसर जबरन फंस रहे हैं।

2012 के सीएनजी फिटनेस घोटाले की जांच राष्ट्रपति शासन में उपराज्यपाल ने जज(सेवानिवृत) मुकुल मुदगल से करवाई, जांच में लोगों से ज्यादा पैसे वसूलने की बात आई। लेकिन जांच में इसे घोटाले के बजाए लापरवाही का मामला माना गया। इसलिए उपराज्यपाल ने अगली कार्रवाई के लिए एसीबी को जिम्मेदारी दी। उसमें परिवहन आयुक्त रहे कई अफसरों के नाम हैं। केजरीवाल सरकार के अग्रवाल आयोग को केंद्र सरकार ने अवैध माना।

उसने एसीबी से इस घोटाले के कागज मांगे तो उसने नहीं दिए। आयोग ने उपराज्यपाल को पत्र लिखा तो उन्होंने आयोग को अवैध मानकर कागज देने से मना कर दिया। इस पर अग्रवाल ने उपराज्यपाल को पत्र लिख कर उन पर केंद्रीय कर्मचारी जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया। यही हाल डीडीसीए घोटाले का है। केंद्र की मनाही के बावजूद दोनों आयोग काम करने लगे हैं। इससे केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच एक नया विवाद शुरू होने से ज्यादा अधिकारियों की बलि होने का खतरा हो गया है।

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