January 18, 2017

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उत्तराखंड: दो दिन की बैठक, तीन पूर्व मुख्यमंत्री फिर भी बीजेपी को नहीं मिला सीएम पद के लिए एक चेहरा

बैठक में भगत सिंह कोश्यारी और भुवन चंद्र खंडूडी ने अपनी नाराजगी खुलेआम जाहिर की।

(फाइल फोटो)

भाजपा की रुड़की में दो दिवसीय प्रदेश कार्य समिति की बैठक में भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मुख्यमंत्री का कोई चेहरा भी नहीं तय कर पाई। मुख्यमंत्री के नाम पर भाजपा के नेताओं में गहरे मतभेद दिखाई दिए। भाजपा के नेताओं को यह डर सताता रहा कि अगर एक भी नाम मुख्यमंत्री के लिए ऐलान कर दिया तो भाजपा में फूट पड़ जाएगी।
समापन सत्र के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि भाजपा के पास विधानसभा चुनाव के लिए तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत 16 चेहरे हैं। जो सभी बेदाग हैं, और समय आने पर इनमें से एक चेहरा घोषित कर दिया जाएगा। भाजपा की दो दिवसीय प्रदेश कार्य समिति में पार्टी की फूट खुलेआम दिखाई दी। पार्टी के वरिष्ठ नेता एक दूसरे पर कटाक्ष करते नजर आए। राज्य में 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की यह आखिरी बैठक मानी जा रही है। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, भाजपा के राष्ट्रीय सह-महामंत्री संगठन शिव कुमार, भाजपा के प्रभारी श्याम जाजू, सतपाल महाराज, पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, अनिल बलूनी समेत भाजपा के कई दिग्गज मौजूद थे। बैठक में भगत सिंह कोश्यारी और भुवन चंद्र खंडूरी ने अपनी नाराजगी खुलेआम जाहिर की। कोश्यारी ने तो केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की ओर इशारा करते हुए कई कटाक्ष भी किए।

इस बात से नाराज हैं कि उन्हें पार्टी 2017 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के रूप में पेश क्यों नहीं करती है। कोश्यारी ने इशारों-इशारों में कहा कि पार्टी को एक नहीं कई नेता अपनी मर्जी से चला रहे हैं। कोश्यारी कार्य समिति की बैठक में पहले दिन तो उपस्थित रहे अगले दिन वह बैठक में शामिल नहीं हुए। बैठक में पहले दिन भुवन चंद्र खंडूडी शामिल नहीं हुए थे।वे समापन सत्र में बैठक में शामिल हुए और उन्होंने भाजपा के नेताओं को जमकर लताड़ लगाई। खंडूडी ने भाजपा के नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि वे आपस में लड़ना बंद करें वरना 2017 में फिर कांग्रेस की सरकार राज्य में बन जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस इसलिए सत्ता में हैं कि हम सभी भाजपाई आपस में लड़ रहे हैं। हमने गलती की है, मैं भी इसका गुनहगार हूं। खंडूडी ने कहा कि चुनाव में यह मुद्दा नहीं होना चाहिए कि कौन मुख्यमंत्री का चेहरा है, बल्कि हमें आपस में एकता बनाते हुए पार्टी के उम्मीदवार को जिताना चाहिए।

भाजपा की दो दिवसीय कार्य समिति में सतपाल महाराज एक दिन भी मंच पर नहीं बैठे और न ही उन्होंने भाषण दिया। सतपाल महाराज की खामोशी भाजपा की कार्य समिति को लेकर कई सवाल छोड़ गई। सतपाल महाराज, खंडूडी और कोश्यारी की नाराजगी विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी पड़ सकती है। यदि समय रहते इन तीनों नेताओं को भाजपा हाईकमान ने नहीं साधा तो राज्य में हरीश रावत की सत्ता पलटने का भाजपा का ख्वाब ख्वाब ही रह जाएगा।

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First Published on October 6, 2016 5:59 am

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