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निकाय उपचुनाव में मिली हार से भाजपा बेचैन

राजस्थान में स्थानीय निकायों के उपचुनाव में सत्ताधारी भाजपा को मिली हार ने उसकी चिंता को बढ़ा दिया है। पार्टी अब इन चुनावों में भारी हार की समीक्षा करने में जुट गई है।
Author जयपुर | August 10, 2016 02:23 am
फाइल फोटो

राजस्थान में स्थानीय निकायों के उपचुनाव में सत्ताधारी भाजपा को मिली हार ने उसकी चिंता को बढ़ा दिया है। पार्टी अब इन चुनावों में भारी हार की समीक्षा करने में जुट गई है। भाजपा की चिंता इससे भी बढ गई है कि मंत्रियों और उसके विधायकों के इलाकों में भी जनता ने उसे नकार दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सत्ता के नशे में चूर होकर आम जनता की परेशानियों पर कोई ध्यान नहीं दे रही है।

राज्य में पिछले दिनों हुए निकायों के उपचुनाव के नतीजों से भाजपा में खलबली मची हुई है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इस बारे में उससे रिपोर्ट भी मांगी है। प्रदेश में भाजपा सरकार के मंत्रियों के समूह जिलों में जा रहे हैं। कई विकास योजनाओं के दावे किए जा रहे हैं। इसके बावजूद ढाई साल के शासन के बाद ही जनता ने उलटे नतीजे देने शुरू कर दिए हैं। इस बारे में प्रदेश भाजपा नेतृत्व अब सक्रिय हो गया है। उसने चुनाव वाले जिलों से पूरी रिपोर्ट तैयार कर भेजने का निर्देश दिया है। पार्टी ने विधायकों और मंत्रियों से भी अपने स्तर पर जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। केंद्रीय नेतृत्व का मानना है कि संगठन और सरकार के स्तर पर कमियां रहने से ही ऐसे नतीजे आए हैं। इसलिए इसकी पड़ताल करने का फैसला किया गया है। केंद्रीय नेतृत्व का मानना है कि अभी चुनाव में दो साल का समय है, इसलिए समय रहते ही कमियों को दूर कर लिया जाए। सूत्रों के मुताबिक सरकार के मंत्रियों की कार्यशैली से कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी पनपी हुई है। ऐसे ही नाराज कार्यकर्ताओं ने उपचुनाव में काम नहीं किया और पार्टी चित्त हो गई।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक तीन मंत्रियों और एक दर्जन से ज्यादा विधायकों के इलाकों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। इन विधायकों की अपने इलाकों में पकड़ कमजोर होने के संकेत पार्टी को पहले ही मिलने लग गए थे। पर्यटन राज्य मंत्री कृष्णेंद्र कौर दीपा के नदबई इलाके की नगर पालिका में पार्टी की हार हुई है। पाली जिले की बाली पंचायत समिति जो कि बिजली मंत्री पुष्पेंद्र सिंह का इलाका है में पार्टी को बड़े अंतर से हाल मिली। संसदीय सचिव सुरेश रावत के पुष्कर इलाके में भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। इनके अलावा विधायक भागीरथ चौधरी, धन सिंह रावत, भीमा भाई, शैतान सिंह राठौड, जयराम जाटव, ज्ञानचंद पारा, अमृता मेघवाल जैसे दिग्गज विधायकों के इलाकों में हार से भाजपा नेतृत्व चिंतित हो उठा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट का कहना है कि बड़ी हार के बावजूद भाजपा सत्ता के घमंड में चूर है। यही कारण है कि 21 जिलों में हुए इन चुनावों में नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आए हैं, फिर भी भाजपा नेता चुनाव हार के कारणों का आकलन और समीक्षा करने के स्थान पर जिस तरह से प्रतिक्रिया दे रहे हैं, उससे लगता है कि भाजपा सच्चाई को मंजूर नहीं करना चाहती है। कांग्रेस के लिए नतीजे संतोषजनक रहे है पर इसके बावजूद पार्टी और कड़ी मेहनत कर भाजपा को अगले चुनाव में शिकस्त देगी।

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