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राजस्थान में कांग्रेस को एकजुट करने की कोशिश, पार्टी के सभी बड़े नेताओं की 26 को होगी बैठक

राज्य में करारी चुनावी हार से सदमे में चल रही कांग्रेस मजबूती के साथ मैदान में उतरने की योजना बनाने में लग गई है। उत्तर प्रदेश में पुराने कांग्रेस नेताओं को आगे करने के आलाकमान के फैसले से राजस्थान में भी पार्टी में अलग ही जोश दिखने लगा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (Photo Source: Reuters)

राजस्थान में चुनावी हार के बाद से सुस्त पड़ी कांग्रेस अब नए सिरे से एकजुट होने की तैयारी में लग गई है। पार्टी ने अगले चुनाव की रणनीति के तहत ही बड़े नेताओं को एकजुट हो जनता के बीच जाने की कसरत शुरू कर दी है। इसके तहत ही पार्टी के सभी बड़े नेताओं की यहां 26 जुलाई को बैठक होगी। इसमें सभी मतभेद भुला कर जनता में संदेश देने का काम किया जाएगा।

राज्य में करारी चुनावी हार से सदमे में चल रही कांग्रेस मजबूती के साथ मैदान में उतरने की योजना बनाने में लग गई है। उत्तर प्रदेश में पुराने कांग्रेस नेताओं को आगे करने के आलाकमान के फैसले से राजस्थान में भी पार्टी में अलग ही जोश दिखने लगा है। प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव गुरूदास कामत राजनीति से सन्यास वापस लेने के बाद राजस्थान में पार्टी में जोश पैदा करने की मुहिम में लग गए है। कामत ने पिछले दिनों यहां पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में साफ कर दिया था कि जो काम करेगा उसे ही आगे बढ़ाया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट की टीम में से सक्रिय नहीं रहने वाले पदाधिकारियों को जल्द ही हटाने का संकेत भी कामत ने दिया था। इसके बाद से ही पायलट ने अपने तमाम पदाधिकारियों को सक्रियता से संगठन के काम में लगने का निर्देश दिया था। कामत ने प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच पनपी गुटबाजी पर भी लगाम लगाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ बड़े नेताओं की एक बैठक भी कराने का फैसला किया है।

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों और राष्ट्रीय पदाधिकारियों की एक साझा बैठक यहां 26 जुलाई को बुलाई गई है। इस बैठक को प्रभारी महासचिव कामत के साथ ही सह प्रभारी मिर्जा इरशाद बेग लेंगे। इसमें प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट और प्रतिपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी भी शामिल होंगे। इस बैठक का मकसद बड़े नेताओं के बीच चल रहे मतभेदों को दूर करना है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में सभी पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और केंद्र में मंत्री रहे नेताओं को बुलाया जाएगा। इस बैठक पर ही कांग्रेसजनों की निगाहें लगी हुई है। प्रदेश कांग्रेस का मानना है कि पार्टी के तमाम बड़े नेता एकजुट हो जाते हैं तो फिर पार्टी मजबूती से भाजपा का सामना आसानी से करेगी। प्रदेश में भाजपा सरकार की नाकामियों के चलते जनता में आक्रोश पनपा हुआ है। जनता की नाराजगी को देखते हुए ही कांग्रेस जनआंदोलन कर अपनी खोई पकड को फिर से हासिल कर सकेगी।

प्रदेश कांग्रेस में अब शहरी मतदाताओं पर भी पकड़ बनाने की कसरत की जा रही है। इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने शहरी नेताओं की बैठक 25 जुलाई को बुलाई है। इसमें प्रदेश के सभी सात नगर निगमों के नेताओं के बुलाया गया है। पार्टी की शहरी इलाकों में पकड़ कमजोर होने के कारण ही अब नेतृत्व ने शहरों में भी अपना जनाधार मजबूत करने का फैसला किया है। शहरी क्षेत्र के नेताओं की पूरे दिन अलग अलग बैठकों के दौर चलेंगे। इन बैठकों में भी प्रभारी महासचिव गुरूदास कामत मौजूद रहेंगे। पार्टी की सोच है कि शहरी इलाकों में मजबूती हासिल करने से भाजपा को चुनौती देना आसान होगा।

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