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Assam election Results: असम में अजमल नहीं बन सके ‘किंगमेकर’

असम चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद बदरूद्दीन अजमल की पार्टी एआइयूडीएफ का किंगमेकर बनने का सपना साकार नहीं हो सका और उनकी पार्टी के खाते में 13 सीटें जाती दिख रही है और चुनाव में अजमल को खुद हार का सामना करना पड़ा।
Author गुहावटी | May 20, 2016 04:21 am
असम चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद बदरूद्दीन अजमल की पार्टी एआइयूडीएफ का किंगमेकर बनने का सपना साकार नहीं हो सका

असम चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद बदरूद्दीन अजमल की पार्टी एआइयूडीएफ का किंगमेकर बनने का सपना साकार नहीं हो सका और उनकी पार्टी के खाते में 13 सीटें जाती दिख रही है और चुनाव में अजमल को खुद हार का सामना करना पड़ा।
चुनाव में जहां भाजपा नीत गठबंधन 87 सीटें जीत कर राज्य में सत्ता पर कब्जा जमाने के करीब पहुंच गई है वहीं 2011 में 18 सीट जीतने वाली अजमल की एआइयूडीएफ को इस बार कम सीटें ही मिली हैं । पिछले विधानसभा में अजमल की पार्टी मुख्य विपक्षी दल थी। एआइयूडीएफ प्रमुख और धुवरी से सांसद बदरूद्दीन अजमल की 16,723 मतों से हार हुई । उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी वाजिद अली चौधरी ने पराजित किया।

चुनाव में मतदान के दौरान अजमल ने भविष्यवाणी की थी कि इस चुनाव में किसी को बहुमत नहीं मिलेगा और वे किंगमेकर की भूमिका में होंगे । उन्होंने संकेत दिया था कि वे कांग्रेस के साथ जा सकते हैं। हालांकि बदरूद्दीन की पेशकश को कांग्रेस ने तब यह कहकर खारिज कर दिया था कि उसे किसी की जरूरत नहीं पड़ेगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव के दिन अजमल ने भाजपा से दूरी बनाने की बात संभवतया इसलिए की थी कि मतदाताओं के बीच यह संदेश न फैल जाए कि चुनाव बाद एआइयूडीएफ, भाजपा का दामन थाम सकती है। बिहार में कांग्रेस की सहयोगी जेडीयू ने असम में आरजेडी और एआइयूडीएफ के साथ तालमेल करके लोकतांत्रिक मोर्चा बनाया है और बदरूद्दीन अजमल इस मोर्चे के नेता हैं। लोकतांत्रिक मोर्चा के कांग्रेस के वोट में सेंध लगाने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस और भाजपा दोनों परोक्ष रूप से अजमल को अपने पाले में करने की कोशिश में थे, लेकिन सार्वजनिक तौर पर ये दोनों पार्टियां मौलाना के खिलाफ ही नजर आई जिसका कारण बांग्लादेशी घुसपैठिए के मुद्दे को बताया जा रहा है। इस चुनाव में गोगोई ने बीजेपी को बाहरी बताकर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की। पूरे चुनाव में गोगोई ने बीजेपी पर असम में घुसपैठ करने का आरोप लगाया है। बिहार चुनाव में नीतीश के नारे का सहारा गोगोई असम चुनाव में लेते दिखे। बांग्लादेशी घुसपैठिए के विषय को चुनावी मुद्दा बनाने का भी नुकसान अजमल की पार्टी को उठाना पड़ा ।

समय-समय पर असम की राजनीति में प्रतिबंधित संगठन उल्फा समेत अन्य स्थानीय संगठन इस तरह से असमिया अस्मिता के विषय को पेश करते रहे हैं । असम में कुल मुस्लिम आबादी 34 फीसदी है। 9 जिलों के 39 विधानसभा क्षेत्रों में इस वर्ग का अच्छा खासा प्रभाव है लेकिन चुनाव परिणाम से स्पष्ट है कि अल्पसंख्यक मत कांग्रेस और एआइयूडीएफ के बीच बंटा है जिसका नुकसान दोनों दलों को उठाना पड़ा है। एआइयूडीएफ 76 और जेडीयू-आरजेडी 12 सीटों पर लड़ा था।
जनजातियों का झुकाव पारंपरिक रूप से कांग्रेस की ओर रहा है, मगर हाल के समय में स्थिति में कुछ बदलाव नजर आया है। ऊपरी असम में सर्वानंद सोनोवाल की वजह से भाजपा इसमें काफी सेंध लगा पाई है ।

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