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सृजन घोटाला: सीबीआई ने शुरू की जांच, अधिकारियों की संपत्ति का निकाला जा रहा ब्योरा

सूत्रों के मुताबिक, इन सब के ठिकानों पर पुलिस की एसआईटी छापे मार चुकी है। लेकिन इनके राजनैतिक गहरे संबंध की वजह से अभी तक ये गिरफ्त के बाहर हैं।
भागलपुर स्थित सृजन एनजीओ का दफ्तर। (फोटो- जनसत्ता)

सरकारी खजाने पर सैकड़ों करोड़ रुपए का चूना लगाने वाले सृजन घोटाले की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ले ली है और इस सिलसिले में दर्ज एफआईआर और दूसरे जरूरी कागजातों का बारीकी से अध्ययन कर रही है। साथ ही घोटाले से जुड़े सरकारी व बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों, सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के पदधारकों और फायदा लेने वाले लोगों की सूची बनाकर इनकी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा जुटाने में लगी है। मामले की जांच एएसपी सुरेंद्र मल्लिक की अगुआई में 15 सदस्यीय सीबीआई टीम कर रही है। हालांकि, इस मामले की जांच पहले से बिहार एसआईटी और आर्थिक अपराध की ईकाई कर रही थी। सीबीआई ने जांच का जिम्मा लेते ही एसआईटी और आर्थिक अपराध की टीम से भागलपुर, बांका और सहरसा तीन जिलों की फाइल अपने कब्जे में ले ली है।

सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने सहरसा में कलेक्ट्रिएट, बैंक और दूसरे दफ्तरों में भी छापेमारी की और घोटाले से संबंधित दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिया। इसके आलावा सहरसा के भूअर्जन अधिकारी राज कुमार गुप्ता से भी पूछताछ की और उनसे कागजात मांगे। रिपोर्ट में पता चला कि वहां भी करीब 164 करोड़ रुपए का चूना लगाया गया है। सीबीआई ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली है। जांच के अंतर्गत पता चला कि बांका में भी तकरीबन 84 करोड़ रुपए सहकारिता बैंक के सृजन ने निकाले गए। सीबीआई द्वारा इसकी भी प्राथमिकी लिखाई गई। इस तरह तीनों जिले मिलाकर कुल 15 एफआईआर पुलिस ने दर्ज की है। जिनमें 13 केवल भागलपुर में दर्ज हुई है। सबौर थाना में सृजन के 10 पदधारकों के खिलाफ भी एक मामला प्रखंड सहकारिता प्रसार अधिकारी सुशील कुमार ने दर्ज कराया है। जिन पर आपराधिक व फर्जीवाड़े की संगीन दफा के तहत मामला पुलिस ने लिखा है। इस हिसाब से तकरीबन 1200 करोड़ रुपए की चपत सरकारी खजाने को लगाई गई है। जांच के दौरान रकम में इजाफा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि 17 अगस्त को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सीबीआई जांच की सिफारिश केंद्र सरकार से की थी। सीबीआई टीम जांच का जिम्मा अपने हाथ में लेते ही सृजन से जुड़े जिन लोगों की संपत्ति का ब्यौरा जुटा रही है उनमें गिरफ्तार और निलंबित कल्याण अधिकारी अरुण कुमार, इसी महकमा के गिरफ्तार होने के बाद मृत नाजिर महेश मंडल, भागलपुर ज़िलाधीश के सहायक प्रेम कुमार, भूअर्जन के नाजिर राकेश कुमार झा, दूसरे नाजिर राकेश यादव, सुपौल के सहकारिता अधिकारी पंकज कुमार झा, सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक के अधिकारी वीके गुप्ता, अवकाश प्राप्त बैंक प्रबंधक एसके दास, बैंक ऑफ बड़ौदा के सेवानिवृत्त मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार सिंह, इंडियन बैंक के कर्मचारी अजय पांडे, सृजन के सतीश झा, सरिता झा, प्रेरणा प्रिंटिंग प्रेस के बंशीधर झा और ड्राइवर विनोद सिंह हैं और ये सभी जेल में बंद हैं।

बताया जा रहा है कि कई अधिकारी फरार हैं। इनमें एडीएम रैंक के पूर्व भूअर्जन अधिकारी राजीव रंजन सिंह, सृजन की सचिव प्रिया कुमार, इनके पति और सृजन के सलाहकार अमित कुमार, निष्काषित भाजपा के प्रदेश किसान प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष विपिन शर्मा, इनकी पत्नी रूबी कुमारी, आरएलएसपी नेता अभिषेक उर्फ दीपक वर्मा, इनकी पत्नी अर्पणा वर्मा, व्यापारी पीके घोष, एनवी राजू, किशोर घोष समेत एक दर्जन से ज्यादा लोग हैं। इनका नाम एफआईआर में भी दर्ज है और सीबीआई इनकी भी संपत्ति का ब्यौरा ले रही है। यहां यह बताना जरूरी है कि ये रंक से राजा यकायक बने हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इन सब के ठिकानों पर पुलिस की एसआईटी छापे मार चुकी है। लेकिन इनके राजनैतिक गहरे संबंध की वजह से अभी तक ये गिरफ्त के बाहर हैं। सीबीआई के सामने इनको गिरफ्तार करने, इनके राजनैतिक आकाओं का पर्दाफाश करने के साथ जिनके दस्तखत बैंकों के चेकों पर हैं, उनकी असलियत उजागर करने की भी चुनौती है। सृजन घोटाला उजागर होने के बाद कई आईएएस जो इस घेरे में आए हैं और जो भागलपुर के जिलाधीश ओहदे पर पहले रह चुके हैं, उन्होंने अपने दस्तखत को फर्जी बताया है।

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