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बिहार में चिटफंड कंपनियों के खिलाफ अगले महीने से विशेष अभियान

यह फैसला गुरूवार देर शाम को राज्य के वित्त मंत्री अब्दुलबारी सिद्दीकी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया।
बिहार में चिटफंड का खेल करीब दो दशक से चल रहा है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जनता की गाढ़ी कमाई लेकर रातोरात चंपत हो रही चिटफंड कंपनियों के खिलाफ बिहार में अगले महीने मई से विशेष अभियान चलेगा। जो कंपनियां आम जन से पैसे जमा ले रही है उन्हें उनके धन की वापसी की गारंटी देनी होगी। इस बाबत जिला स्तर पर एक कमेटी बनाई जाएगी जो इन पर निगरानी करेगी और ठगी के शिकार लोगों को गवाह बनाकर पुलिस में मामला दर्ज कराएगी।

यह फैसला गुरूवार देर शाम को राज्य के वित्त मंत्री अब्दुलबारी सिद्दीकी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में आर्थिक अपराध अनुसंधान इकाई के आईजी जितेंद्र सिंह गंगवार, वित्त महकमा के विशेष सचिव सांवर भारती, आरबीआई के रीजनल डाइरेक्टर एनपी टोपनो, वित्त महकमा के प्रधान सचिव रवि मित्तल समेत पटना के डीएम और एसएसपी मौजूद थे।

दरअसल, हाल में बिहार के विभिन्न जिलों से जनता की गाढ़ी कमाई प्रलोभन दे जमा धन को ले चिट फंड कंपनियां रातोरात फरार हुई है। वैसे भी यह खेल बिहार में दो दशक से चल रहा है। भागलपुर में ऐसे किस्से साल दो साल में सुनने को मिल ही जाते हैं। लोग बाद में रोते पीटते रह जाते हैं। हाल में ही प्रतीक ग्रुप लोगों के करोड़ों रूपये लूट चलते बनी। ऐसों पर ही नकेल कसने के लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।

जानकार बताते हैं कि बैठक में कंपनियों की स्थानीय प्रशासन से सम्बद्धता को जरुरी बनाने का निर्णय लिया गया, ताकि जमा लेने के अधिकार के साथ पैसों की वापसी की गारंटी हो और प्रशासन की जवाबदेही भी तय की जा सके। वित्त मंत्री का मानना है कि लूट खसोट के पहले कंपनियां गुलाबी वायदे करती है। तामझाम के साथ गांव देहात और जिलों के शहरों में अपने दफ्तर खोल लोगों को विश्वास में लेती है। ऐसी जालसाज कंपनियां बीपीआईडी एक्ट का सहारा ले फायदा उठा रही है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पैसों की वापसी का निर्देश जारी किया है। बाबजूद इसके परिपक्वता पर दोबारा निवेश का दबाव बनाया जाता है। इतना ही नहीं जबर्दस्ती की जाती है। इसलिए बचत व साख समितियों के निबंधन और इनके क्रियाकलापों पर कड़ी निगाह रखने की बैठक ने महसूस की।

अलबत्ता हरेक जिलों में ऐसी कंपनियों की सूची तैयार कराई जाए और इनकी निगरानी के लिए एक कमेटी बने। जिले में एक नोडल अधिकारी ठगी के शिकार लोगों को गवाह बनाकर एफआईआर दर्ज कराए। इसके वास्ते मई महीने में इस बाबत खास अभियान चलाया जाए। यह निर्देश बिहार के सभी जिलों के जिलाधीश को दिया गया है।

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