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बिहार: तो इसलिए तेजस्वी यादव को ‘भगवान’ मानने वाले RJD विधायक की आमरण अनशन की धमकी को नीतीश कुमार ने नहीं दिया भाव

सरोज यादव की इज्जत थोड़ी सी बच गई क्योंकि समर्थकों के इसरार पर तेजस्वी यादव ने जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया।
पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव। (FILE PHOTO)

कन्हैया भेलारी

भोजपुर जिला के बड़हरा विधानसभा क्षेत्र से राजद विधायक सरोज यादव ने 25 मई को पटना में अपनी ही सरकार के खिलाफ तामझाम के साथ आमरण अनशन शुरू किया। ताव में आकर 35 वर्षीय विधायक ने एलान कर दिया कि “अगर चार दिन के भीतर सरकार ने मेरी मांगें नहीं मानीं तो मैं आत्मदाह कर लूॅंगा।” बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने युवा एमएलए की धमकी का जरा भी नोटिस नहीं लिया। नतीजतन, विधायक जी तय अनशन स्थल से दरी-बिछौना बटोरकर भारी मन के साथ घर वापस लौट गए।

हालांकि उनकी इज्जत थोड़ी सी बच गई क्योंकि समर्थकों के इसरार पर राज्य के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। डिप्टी सीएम तेजस्वी ने सरोज यादव को आश्वासन दिया, “आपकी मांगों पर सरकार विचार करेगी।” विधायक जी की मांग भले ही अनसुनी रह गई हो, उन्हें एक फायदा जरूर हुआ। वो तीन दिन तक मीडिया में छाए रहे क्योंकि कोई विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज उठाए ये बहुत कम होता है। लेकिन लाख टके का सवाल ये है कि सरोज यादव सरकार से इतने नाराज क्यों हैं कि आत्मदाह करने की धमकी दे दी?

बकौल विधायक “मेरे विधानसभा क्षेत्र में कोई भी विकास का कार्य नहीं हो रहा है। जनता से जुड़ी समस्याओं के निदान के लिए सरकार की तरफ से कुछ भी प्रयास नहीं किया जा रहा है। जिला के सारे अधिकारी भ्रष्ट हो गए हैं। जिलाधिकारी सरकारी फंड रिलीज करने से पहले दो प्रतिशत कमीशन का डिमान्ड करता है।” वो सफाई देते हैं कि उनका अनशन सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि जिला प्रशासन के विरुद्ध था।ठेकेदारी और बड़े शहरों में मजदूर सप्लाइ करके धन अर्जित करने वाले दसवीं पास सरोज यादव तेजस्वी यादव की कृपा से विधायक बन गए। वो दिल से स्वीकार भी करते हैं कि “तेजस्वी यादव जी मेरे लिए भगवान हैं।” एमएलए बनने से पहले सरोज यादव जिला परिषद के सदस्य थे। अभी उनकी पत्नी जिला पार्षद हैं।

दूसरा बड़ा सवा ये है कि आखिर सीएम नीतीश कुमार ने विधायक सरोज यादव की अनशन और आत्मदाह की धमकी का कोई संज्ञान क्यों नहीं लिया?  सूत्र बताते हैं कि विधायक महोदय भोजपुर जिले के डीएम पर दबाव बना रहे थे कि उनके परिवार और रिश्तेदारी के कुल 13 लोगों को राइफल एवं पिस्टल का लाइसेंस तत्काल दें। विधायक जी जिन लोगों को बंदूक का लाइसेंस दिलवाना चाहते थे उनमें से कुछ पर ऐसे भी गंभीर अपराधिक मुकदमें चल रहे हैं।

पुख्ता प्रमाण है कि भोजपुर के डीएम से मिलकर सरोज यादव ने कड़क शब्दों में कहा था कि “बड़हरा प्रखंड में कार्यरत सारे कर्मचारियों को हटाकर उनकी जगह पर यादव जाति के क्लर्क को तैनात किया जाए, जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित ठेका-पट्टा उनके गुर्गों को दिया जाए और 42 जन वितरण प्रणाली के वितरकों को हटाकर एक जाति विशेष के जिम्मे किया जाए।”

सरोज यादव का विवादों से चोली दामन का रिस्ता है। चितौड़ गढ़ समझे जाने वाले बड़हरा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार कोई गैर-राजपूत चुनाव जीता। राजपूतों को हराने का हैंगओवर व ठसक इनके चाल-ढाल में स्पष्ट दिखता है। जिले के अधिकारी बताते हैं कि अपनी दबंगई को कायम रखने के लिए कई बार बिना वजह विधायक जी झगड़ा करते रहते हैं। हालांकि सूब के मुखिया नीतीश कुमार को अपने विशेष चैनल से उनकी हर करतूत की खबर मिलती रहती है।

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