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कैसे पांच-पांच कंपनियों का माल‍िक बना लालू का परिवार, जान‍िए क्‍या कहता है सरकारी रिकॉर्ड

इंडियन एक्सप्रेस को मिले दस्तावेज के अनुसार लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी, उनके बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी, बेटियां रागिनी और चंदा कम से कम पांच कंपनियों में शेयर होल्डर हैं।
Author May 2, 2017 11:37 am
दानापुर में बन रहे इस मॉल को लेकर है विवाद। (Express Photo)

एक बार जब पटना हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव से उनकी आय का स्रोत पूछा था तो उनके वकील ने अदालत को उन्हें ससुराल से तोहफे में मिली गायों के बारे में बताया था जो वक्त के साथ बढ़ती गईं और जिनसे वो डेयरी फार्म चलाने लगे। आय से अधिक संपत्ति के मामले में साल 2006 में बरी हुए लालू यादव ने तब अपनी आय का एकमात्र स्रोत डेयरी फार्म ही बताया था। उसके करीब एक दशक बाद भाजपा नेता सुशील मोदी ने लालू यादव के परिवार पर अपने कम से कम एक कारोबार को घोषित न करने का आरोप लगाया है। ये कारोबार है लालू यादव के बड़े बेटे और बिहार सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव द्वारा 2012 में खरीदी गयी जमीन पर चलने वाले मोटरसाइकिल शोरूम का कारोबार।

सुशील मोदी का आरोप है कि तेज प्रताप यादव ने साल 2015 में हुए विधान सभा चुनाव में चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में इस संपत्ति का जिक्र नहीं किया था। तेज प्रताप अभी बिहार की नीतीश कुमार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री हैं। इंडियन एक्सप्रेस को उक्त जमीन की खरीद से जुड़े दस्तावेज मिले हैं जिनके अनुसार तेज प्रताप यादव ने वास्तव में ये जमीन खरीदी थी। हालांकि इस आरोपी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी कि जो कंपनी मोटरसाइकिल शोरूम चलाती है उसमें तेज प्रताप भी अंशधारक हैं।

इंडियन एक्सप्रेस को मिले दस्तावेज के अनुसार लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी, उनके बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी, बेटियां रागिनी और चंदा कम से कम पांच कंपनियों में  अंशधारक (शेयर होल्डर) हैं। ये कंपनियां आयातन-निर्यात (एक्सपोर्ट -इम्पोर्ट) और निर्माण कार्य (कंस्ट्रक्शन) इत्यादि कारोबार से जुड़ी हैं। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) के दस्तावेज के अनुसार इनमें से चार कंपनियां पटना और एक दिल्ली स्थित हैं। इन कंपनियों के अधिकार लालू के परिजनों ने उनके मूल मालिकों से खरीदा था। पांचवी कंपनी में कई अंशधारक हैं और बिहार के मौजूदा उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव उसके डायरेक्टर हैं। सुशील मोदी ने कहा, “फर्जी कंपनियों के माध्यम से जमीन खरीदने पर किसी व्यक्ति को इसे नहीं खरीदना होता और जमीन खरीद के सारे कागजात कंपनी के नाम होते हैं।”

1- लारा प्रोजेक्ट एलएलपी– माना जा रहा है कि इस कंपनी का नाम लालू यादव और राबड़ी देवी के नाम के शुरुआती अक्षरों को मिलाकर बनाया गया है। पहले इसका नाम डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड था। इसकी स्थापना 1981 में दिल्ली में हुई थी। तब इसके मालिक थे राजद सांसद प्रेम चंद गुप्ता। साल 2010-11 में गुप्ता की पत्नी सरला ने अपने 1401 शेयर राबड़ी देवी के नाम और एक शेयर तेजस्वी के नाम ट्रांसफर कर दिए। साल 2013-14 में सरला ने फिर 1101 शेयर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के नाम ट्रांसफर किए। साल 2010-11 और साल 2013-14 में कंपनी की कुल संपत्ति क्रमशः 2.28 करोड़ रुपये और 2.29 करोड़ रुपये थी। आरओसी के दस्तावेज के अनुसार 2014 में कंपनी की संपत्ति में राबड़ी और तेजस्वी की संपत्ति करीब 4,02 लाख रुपये थी। सुशील मोदी का आरोप है कि शेयरों की कीमत को कम करके दिखाया गया और इनकम टैक्स की जांच से ही पता चलेगा कि ऐसा क्यों किया गया।

कंपनी के निदेशकों देवकी नंदन तुलसयान और गौरव गुप्ता ने 11 फरवरी 2014 को इस्तीफा दे दिया। एक अन्य निदेशक विजय पाल ने 26 जून 2014 को इस्तीफा दिया। उसके बाद एक-एक कर तेज प्रताप, तेजस्वी, चंदा और रागिनी इसके अतिरिक्त निदेशक बनाए गए। कुछेक साल बाद कंपनी का नाम बदलकर लारा प्रोजेक्ट एलएलपी किया गया और लालू की बेटियां इससे अलग हो गईं। राबड़ी देवी और उनके बेटों को मनोनीत साझीदार बनाया गया। डिलाइट कंपनी का मकसद आयात-निर्यात था। नई कंपनी लारा प्रोजेक्ट का मकसद निर्माण कार्य बताया गया। इस बदलाव की वजह से कंपनी बिहार के दानापुर में बन रहे बिहार के कथित सबसे बड़े मॉल के निर्माणकार्य के लिए सक्षम हो सकी।

आरओसी के दस्तावेज के मुताबिक दानापुर स्थित जमीन पटना निवासी हर्ष कोच्चर और विनय कोच्चर से 15.85 लाख में साल 2005 में खरीदी गयी थी। तब मांगी लाल रस्तोगी डिलाइट के निदेशक थे। प्रेम चंद गुप्ता कहते हैं, “लारा प्रोजेक्ट में तीन अंशधारक हैं- राबड़ी देवी, तेज प्रताप और तेजस्वी। उन्होंने सभी नियम-कानूनों का पालन किया है, हर साल इनकम टैक्स रिटर्न भरा है। मेरे परिवार के लोगों ने लालू के परिजनो को शेयर ट्रांसफर किए थे और ये सब दस्तावेज में मौजूद है।” ये पूछने पर कि उनके परिवार ने कंपनी से मालिकाना हक क्यों छोड़ा, गुप्ता ने कहा कि ये परिवार का फैसला था। विवाद होने के बाद लालू यादव ने कहा था, “सब कुछ सार्वजनिक है।” वहीं तेजस्वी ने कहा कि “आरओसी के रिकॉर्ड इंटरनेट पर मौजूद हैं।” हालांकि तेज प्रताप ने इस पर अब कुछ नहीं कहा है।

तेजस्वी ने अभी तक इस पर सफाई नहीं दी है कि उन्होंने साल 2015 में चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में दानापुर में बन रहे मॉल की जमीन के मालिक होने की बात क्यों नहीं बतायी थी? तेज और तेजस्वी ने अपने हलफनामे में पटना और गोपालगंज में कुल 11 निजी और सामूहिक साझीदारी वाली जमीनों का ब्योरा दिया था। बेली रोड पर बन रहे इस मॉल का निर्माण राजद विधायक सैयद अबु दोजाना की कंपनी कर रही है।

lalu yadav, tej pratap and tejashwi लालू यादव और उनके बेटों तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव द्वारा चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में घोषित संपत्ति।

2- लारा डिस्ट्रिब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड- पहले इस कंपनी का नाम लारा इंटीरियर्स लिमिटेड था जिसे 17 जनवरी 2005 में बनाया गया था। इसका दफ्तर पटना के फ्रेजर रोड पर था। 22 मार्च 2010 को इसका नाम बदलकर लारा डिस्ट्रिब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड किया गया। इसका नया पता था कौटिल्य नगर, पटना। लालू की बेटियां मीसा भारती, चंदा, रागिनी और राबड़ी देवी इसके निदेशक थे। तेज प्रताप को अप्रैल 2010 में निदेशक बनाया गया। 2015 में विधायक बनने के बाद वो निदेशक पद से हट गये।  हालांकि अभी भी इसके सबसे ज्यादा शेयर (2.51 लाख) तेज प्रताप के पास हैं। राबड़ी के पास 1.17 लाख, रागिनी के पास एक लाख, चंदा के पास 2000 और मीसा के पास 1000 शेयर हैं। कंपनी का कार्य है इंटीरियर डिजाइन प्रोडक्ट। सुशील मोदी का आरोप है कि औरंगाबाद में स्थित मोटरसाइकिल शोरूम की मालिक यही कंपनी है।

सुशील मोदी का आरोप है कि मध्य बिहार ग्रामीण बैंक ने लारा प्राइवेट डिस्ट्रिब्यूटर को इस जमीन की सिक्योरिटी पर 2.29 करोड़ रुपये का लोन दिया है। दस्तावेज के अनुसार इस जमीन के मालिक तेज प्रताप यादव हैं लेकिन उन्होंने साल 2015 के चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में इसका जिक्र नहीं किया है। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवार ने कहा, “सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। हम किसी भी जांच के लिए तैयार हैं।”

3- एके इंफोसिस्टिम प्राइवेट लिमिटेड- हरियाणा के कारोबारियों भाइयों अमित कात्याल और राजेश कात्याल ने 28 सितंबर 2006 को ये कंपनी बनायी। मार्च 2007 में कंपनी ने पानापुर और चितकोहरा में क्रमशः 29 डेसीमिल और 43 डेसीमिल जमीन खरीदी। बाद में इसके शेयरधारकों अमित और ओपी कात्याल ने अपना मालिकाना हक राबड़ी और तेजस्वी को ट्रांसफर कर दिया। दोनों को क्रमशः 85 और 15 प्रतिशत शेयर मिले। साल 2014 में तेज प्रताप, तेजस्वी, चंदा और रागिनी इसके निदेशक बनाए गए। लालू यादव की बेटियों अभी भी इसकि निदेशक हैं लेकिन बेटे अब कंपनी से हट चुके हैं।

अमित कात्याल ने अपने 1500 शेयर तेजस्वी को और 4000 शेयर राबड़ी को ट्रांसफर किए थे। कात्याल परिवार की कंपनी आइसबर्ग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड ने बिहार के बिहटा में शराब फैक्ट्री खोली। उस समय राबड़ी देवी (2000-2005) बिहार की मुख्यमंत्री थीं। सुशील मोदी कंपनी के दस्तावेज की चार्टेड अकाउंटेंट से जांच करा रहे हैं। वहीं राजद प्रवक्ता मनोझ झा का कहना है कि “सुशील मोदी हिट एंड रन की नीति अपना रहे हैं। सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।”

4- एबी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड- 2008 में नई दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी स्थित इस कंपनी ने न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में पांच करोड़ रुपये में 500 गज जमीन खरीदी। कंपनी ने मुंबई के पांच आभूषण कंपनियों से लोन लिया था। डिलाइट मार्केटिंग ( जो बाद में लारा प्रोजेक्ट बन गई) ने अपने दफ्तर का यही पता दिया था। एबी एक्सपोर्ट्स के शेयरधारक अशोक कुमार बंथिया और संगीता बंथिया थे। 2011 में कंपनी का मालिकाना हक और घर तेजस्वी, तेज प्रताप और चंदा को दे दिया गया। इन तीनों के पास इस कंपनी के 98 प्रतिशत शेयर हैं। इस जमीन पर एक चारमंजिला इमारत बन रही है। न तो तेज प्रताप ने, न ही तेजस्वी यादव ने अपने हलफनामे में इस जमीन के बारे में कोई जानकारी दी। इंडियन एक्सप्रेस ने इस बाबत दोनों से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। राजद प्रवक्ता तिवारी ने कहा, “हमारे पार्टी प्रमुख किसी भी जांच के लिए तैयार हैं।”

5- फेयरग्रो होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड- इस कंपनी का पता है 130/1 बकुल बागान रोड, कोलकाता। कंपनी के पास 76.32 लाख रुपये की संपत्ति है। आरओसी के दस्तावेज के अनुसार 2015 में इसके निदेशक थे दिल्ली निवासी यश चौधरी, बृज सरीन। कंपनी में 20 लोग और कंपनियां शेयरधारक थीं। तेजस्वी यादव को 20 अक्टूबर 2014 को इसका निदेशक नियुक्त किया गया। राजद प्रवक्ता के कहा कि किसी कंपनी का निदेशक बनना गैर-कानूनी नहीं है।

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